इन्सिया केम्प्वाला की बालकहानी कोवू और बाज़

इन्सिया केम्प्वाला

कुछ लोगों के पास कुत्ते हैंऔर दूसरे लोगों के पास बिल्लियाँ हैं। मेरे पास छह चिड़ियाँ हैं। उनके नाम कोवू, नाला, रफ़ीकी, सराबी, कैस्पर, और स्क्वर्ट हैं। ये एक कहानी कोवू और एक बाज़ के बारे में है।

चार साल पहले, एक दिन मैं, मेरी मम्मी और मेरी छोटी बहन खाने की मेज़ पर बैठे थे। तब हमारे पास दो चिड़ियाँ थीं, कोवू और नाला। दोनों बाहर पिंजड़े के ऊपर बैठे थे। कोवू गाना गा रहा था। अचानक उसने गाना बंद कर दिया। हमने बाहर देखा तो नाला ज़मीन पर पड़ी थी; जबकि कोवू हमें दिखाई नहीं दिया। नाला बहुत डरी हुई थी। जब हम उसको अंदर ले जा रहे थे, तब दीवार पर हमने एक बाज़ देखा। बाज़ हमारे घर फ़िर से आया था क्योंकि वह नाला को भी खाना चाहता था। जब हमने बाज़ देखा, तब हम जान गये कि बाज़ कोवू को ले गया।

कोवू
कोवू को हमने बहुत ढूंढ़ा लेकिन वह हमें नहीं मिला। मैं और मेरी बहन बहुत रोए। रो-रोकर हमारी आँखें सूज गईं। हमारी मम्मी बहुत परेशान हुई थीं। उसी दिन, मेरी मम्मी एक चिड़िया की दुकान पर गईं। उनके पिंजड़े में बहुत सारी चिड़ियाँ थीं। एक छोटी चिड़िया, रफ़ीकी, बच्चा था। उसके पंख फटे हुए थे क्योंकि दूसरी चिड़ियों ने उसके पंख खा लिये थे। मेरी मम्मी को देखकर रफ़ीकी बहुत खुश हुआ। मेरी मम्मी उसको घर लायीं। मैं और मेरी बहन ने उसके साथ खूब खेला। हम जल्दी ही रफ़ीकी को बहुत प्यार करने लगे।

एक हफ़्ता के बाद, मैं, मेरी बहन और मेरी मम्मी हमारे घर में आराम कर रहे थे।जब मैं रफ़ीकी के साथ खेल रही थी तब हमने कोवू का गाना सुना। क्या कोवू ज़िन्दा है! या हम एक सपना देख रहे है। मेरी मम्मी सड़क पर दौड़ीं और चार घर दूर कोवू मिल गया। घर के मालिक ने मम्मी को बताया कि कोवू बाज़ से दूर भाग निकला और एक गाड़ी के टायर में रात भर छिपा रहा। सुबह, उस घर के मालिक को कोवू मिला और वह उसे घर में ले आया। मालिक और उसकी पत्नी ने उसके लिए चिड़िया का खाना खरीदा। तब कोवू को बहुत डर लग रहा था और उसने खाना नहीं खाया। एक हफ़्ते के बाद, मालिक ने कोवू को घर के बाहर निकाला। जब कोवू बाहर आया, तब उसने गाना शुरु किया और हमने उसका गाना सुना। अंत में हमें कोवू मिल गया।
नाला
अब एक दूसरी समस्या थी। घर पर हमारे साथ नाला और रफ़ीकी थे। हमें कोवू मिल गया। हम रफ़ीकी से भी प्यार करते थे। इसलिए हमने तीनों को रखने का फैसला किया क्योंकि रफ़ीकी भी हमारे परिवार में शामिल हो गए थे।  
तीन साल के बाद कोवू और नाला के तीन बच्चे हए। उनके नाम सराबी, कैस्पर, और स्क्वर्ट रखे।तब रफ़ीकी उनके चाचा बन गए। हमने बहुत प्यार से इन बच्चों की देखभाल करी।हमने उन्हें हाथ से खाना खिलाया और कंधे पर बिठाया। अब हमारे परिवार में छह प्यारी चिड़ियाँ हैं।

शिक्षा: जीते रहो, गुनगुनाते रहो।

इन्सिया कैलिफोर्निया में पैदा हुई और पली बढ़ी है। वर्तमान में पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में BS/MD की छात्रा है। वह जीवविज्ञान के तीसरे साल में पढ़ती है। डॉक्टर बनने की योजना बना रही है। इन्सिया ने विश्वविद्यालय में १-४ हिंदी कक्षा पढ़ी है। यह उनकी पहली हिंदी की कहानी का प्रकाशन है।





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