हरिमोहन गुप्त

81 वर्षीय मृदुभाषी डॉ. हरिमोहन गुप्त अभी भी चार घंटे प्रतिदिन मरीजों को देकर अपना शेष समय साहित्य साधना में व्यतीत करते हैं। आपने अब तक लगभग 13 पुस्तकें लिखी हैं। जिसमें “साध्वी सीता” महाकाव्य के अतिरिक्त 6 खण्ड काव्य प्रकाशित हैं। आपकी रचनाओं में दोहा संग्रह,  कहानियाँ, मुक्तक, गीत, तथा नाटक शामिल हैं। आपकी रचनाएँ शिमला दूरदर्शन एवं आकाशवाणी छतरपुर से प्रसारित हो चुकी हैं। आप कादम्बरी जबलपुर और म. प्र. तुलसी एकेडमी से आप सम्मानित हैं। सन 2015 में कामदगिरी के पीठाधीश्वर द्वारा ‘साध्वी सीता’ पर ‘माहकवि’ की उपाधि से विभूषित किये जा चुके हैं।