द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान वैज्ञानिकों में समभाव

मेहेर वान

अगस्त 1945 तक अमेरिका के मैनहैटन प्रोजेक्ट के तहत दो तरह के परमाणु बम बनाये गये। इन्हें गिराने के लिये अमेरिकी वायु सेना के 59वें कम्पोज़िट ग्रुप को तकनीकी तौर पर तैयार किया गया। इन परमाणु बमों को गिराने के लिये “बोइंग बी-29 सुपरफोट्रेस” जहाज का इस्तेमाल किया गया। जापान के शहरों पर परमाणु बम गिराने के आदेश 25 जुलाई को ही दे दिये गये थे। 6 अगस्त को अमेरिका ने हिरोशिमा पर लिटिल बॉय (यूरेनियम गन-टाइप) गिराया और अमेरिकी राष्ट्रपति हेरी ट्रुमेन ने जापान को आत्मसमर्पण करने के लिये कहा और यह चेतावनी दी कि यदि जापान ने आत्मसमर्पण नहीं किया तो जापान आसमान से बर्बादी की ऐसी वर्षा की उम्मीद करे, जैसी कि धरती पर कभी भी नहीं देखी गयी होगी। ठीक तीन दिनों के बाद नागासाकी पर “फ़ैट मैन” (प्लूटोनियम इम्प्लोज़न टाइप) परमाणु बम गिराया गया। इन बमबारियों में कुछ ही दिनों में लगभग डेढ़ लाख लोग हिरोशिमा में और नागासाकी में लगभग अस्सी हज़ार लोग मारे गये। इसके बाद विकिरण के कारण कई पीढ़ियाँ बरबाद हो गईं। जापान ने 15 अगस्त 1945  को आत्मसमर्पण किया था।

नागासाकी पर गिरे परमाणु बम फ़ैटमैन के विस्फोट का दृश्य (साभार)


  9 अगस्त 1945 की सुबह 11 बजे जब अमेरिकी बोइंग जहाज बी-29 यानि ”ग्रेट आर्टिस्ट” नागासाकी पर बम गिराने ही वाला था तो उसके कुछ एकाध मिनट पहले उसने आसमान से तीन कनस्तर गिराये थे। इन सभी तीनो कनस्तरों में “शॉकवेव गेज” नामक महत्वपूर्ण उपकरण भी थे। यह उपकरण अमेरिकी भौतिकविद लुइस अल्वारेज़ ने बनाये थे। उन्हीं लुइस अल्वारेज़ ने यह बिना हस्ताक्षर वाला पत्र अपने बहुत पुराने सहकर्मी “रियोकिचि सेगन” को लिखा था जो कि जापानी नागरिक थे। उन्होंने अमरिका के बर्कले में साथ में शोध किया था। बाद में रियोकिचि सैगन अपने देश जापान चले गये और वहीं अपना शोध कार्य में जुट गये। अमेरिकी वैज्ञानिक लुइस अल्वारेज का लिखा यह पत्र लगभग एक महीने बाद जापानी वैज्ञानिक रियोकिचि सेगन को मिला। अल्वारेज और सेगन लगभग चार साल बाद पुनः मिले और तभी अल्वारेज ने इस पत्र पर दस्तखत करते हुये यह स्वीकार किया कि यह पत्र उन्होंने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर रियोकिचि को भेजा था। यह पत्र वैज्ञानिक समभाव की मिसाल है। द्वितीय विश्व युद्ध के समय दुनियाँ दो भागों में बंट चुकी थी और उस बंटवारे में बहुत सारे वैज्ञानिक भी शामिल हो गये थे। इसके बावजूद तमाम वैज्ञानिक ऐसे थे जिनमें संवेदनशीलता और विश्व समभाव का जज़्बा कायम था। वैज्ञानिक अल्वारेज ने अपने देश के दुश्मन देश वाले वैज्ञानिक को यह पत्र बहुत हिम्मत के साथ लिखा होगा। अगर वह पकड़े जाते तो उन्हें बहुत ही गम्भीर सज़ा होती। इस के बावजूद उन्होंने अपने दोस्त और पूर्वसहकर्मी रियोकिचि को यह पत्र लिखा।
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अल्वारेज़ का पत्र
मुख्यालय
परमाणु बम कमांड
अगस्त 1945

सेवा में: प्रोफ़ेसर आर। सैगन
भवदीय: अमरीका प्रवास के दौरान आपके तीन वैज्ञानिक पूर्व-सहकर्मी

यह पत्र हम आपको व्यक्तिगत तौर पर यह आग्रह करते हुये भेज रहे हैं कि आप एक सम्माननीय नाभिकीय वैज्ञानिक के रूप में अपने प्रभाव का प्रयोग करते हुये जापानी सेनानायक और उनके सहयोगियों को समझायें कि अगर आप लोग यह युद्ध जारी रखेंगे तो आपकी जनता को इसके भयावह परिणाम भुगतने होंगे।

यह बात आपको बहुत वर्षों से ज्ञात है कि अगर कोई देश (परमाणु बम) निर्माण के लिये आवश्यक संसाधनों से जुड़ी बहुत बड़ी राशि का खर्च उठाने का इच्छुक है तो वह परमाणु बम बनाने में सफ़ल हो सकता है। जब कि आप यह देख चुके हैं कि हम (परमाणु बमों के) उत्पादक संयंत्र बना चुके हैं, इसके संबंध में भी आपके दिमाग में कोई संशय नहीं हो सकता है कि जिन कारखानों में हर दिन चौबीसों घंटे काम हो रहा है उसका परिणाम आपके देश पर फ़ोड़ा जा सकता है।

तीन सप्ताहों के अंदर, हमने अमेरिकी मरुभूमि पर नाभिकीय परीक्षण किया है, एक (परमाणु बम) हिरोशिमा पर फोड़ा है और तीसरा (परमाणु बम) आज सुबह फ़ोड़ा है।

हम आपसे यह प्रार्थना करते हैं कि आप अपने राजनेताओं को यह तथ्य बतायें और अपना अधिकतम प्रयास करते हुये इस विध्वंश और जीवन की बरबादी को रोकने का प्रयास करें जो कि अगर यूँ ही जारी रही तो अंततः आपके सभी शहरों के पूर्ण विनाश में ही तब्दील हो जायेगी। बतौर वैज्ञानिक, एक सुंदर खोज के ऐसे (विध्वंसक) प्रयोग पर हमें पछतावा है, लेकिन हम यह आपको सुनिश्चित करते हैं कि अगर जापान ने एकबार आत्मसमर्पण नहीं किया तो परमाणु बमों की इस बारिश का प्रकोप कई गुना और बढ़ जायेगा।

मेरे दोस्त सेगन के लिये।
सादर

लुइस डब्ल्यू अल्वरेज़
अंतत: दस्तखत किये गये
22 दिसम्बर 1949

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