नाभिकीय हथियारों के विकास सम्बन्धी सभी कदमों का एकरुप से अन्त कर दिया जाये: रॉबर्ट ओपेनहेमर

मेहेर वान
- मेहेर वान

ओपेनहेमर द्वितीय विश्व युद्ध के समय प्रसिद्ध अमेरिकी “लॉस अलामॉस प्रयोगशाला” के प्रमुख थे और मनहाटन प्रोजेक्ट में काम करने वाले उन लोगों में से एक थे जिन्हें “परमाणु बम के पिता” कहा जाता है। मनहाटन प्रोजेक्ट के तहत ही दुनिया का पहला परमाणु बम बना था जिसका परीक्षण ‘न्यू मेक्सिको’ में ट्रिनिटी टेस्ट के नाम से 16 जुलाई 1945 को किया गया था। हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराये गये परमाणु बम ओपेनहेमर के निर्देशन में बनाये गये थे। रॉबर्ट ओपेनहेमर द्वितीय विश्व युद्ध के पहले राष्ट्रवादी व्यक्ति थे वह चाहते थे कि अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बने, परन्तु द्वितीय विश्व युद्ध में नाभिकीय बमों के कारण हुये विध्वंश ने उनकी विचार दृष्टि बदल दी। वह दुखी रहने लगे थे। एक बार उन्होंने एक साक्षात्कार में भगवद-गीता को उदधृत करते हुये कहा था कि “मैं मौत बन चुका हूँ, दुनिया का विध्वंश करने वाला”। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वह “अमेरिकी परमाणविक ऊर्जा कमीशन” के चेयरमेन बने। इस पद का इस्तेमाल उन्होंने नाभिकीय हथियारों की विकास-प्रक्रिया को खत्म करने लिये अंतर्राष्टीय स्तर वैज्ञानिकों और राजनैतिज्ञों को लामबंद करने के लिये किया। वह चाहते थे कि दुनिया के तमाम देश नाभिकीय हथियार बनाने की होड़ में न शामिल हों और इस प्रक्रिया के तहत अमेरिका भी नाभिकीय हथियार बनाने संबंधी अपने सारे कार्यक्रम बन्द करे और अन्य देशों का विश्वास हासिल करे। वह लम्बे समय तक भौतिकी में कार्य करते रहे। जनता के बीच उन्होंने भाषण देना और अखबारों में लेख लिखना जारी रखा। नाभिकीय हथियारों के विरोध में मुखर होने कारण उन्हें तमाम राजनीतिक मुसीबतें भी झेलनी पड़ीं मगर उन्होंने अपना विचार नहीं बदला। यह पत्र उन्होंने हिरोशिमा और नागासाकी में बम गिराये जाने के बाद अमेरिका में युद्ध मामलों के सचिव को लिखा था।  

भवदीय: रॉबर्ट जे. ओपेनहेमर
सेवा में: हेनरी स्टिमसन, युद्ध मामलों के सचिव
दिनांक: 17 अगस्त, 1945

प्रिय सचिव महोदय,
आँतरिक समिति ने हमें परमाणविक ऊर्जा के क्षेत्र के भविष्य और इससे जुड़े कार्यक्रम के बारे में एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है। इस कार्य का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र आयुध हथियारों का निर्माण करना है, चूँकि यही एक समस्या है जो हमारे युद्धकालीन क्रिया-कलापों पर हावी रही है, इसीलिये प्राकृतिक रूप से इस दिशा में हमारे विचार सबसे अधिक साफ़ और सुनिश्चित होने चाहिए; और यह कि हमें इस सम्बन्ध में (आंतरिक) समिति के द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के ठीक तौर पर जवाब देने के लिये आत्मविश्वास से सर्वाधिक लबरेज़ होना चाहिये। हालाँकि, (हमारे) समक्ष उपस्थित इन प्रश्नों की पड़ताल करते हुये हम कुछ विशेष रूप से सामान्य निष्कर्षों तक पहुँचते हैं, राष्ट्रीय योजना के लिये जिनके परिणाम, बाद में दिये जाने वाली विस्तृत तकनीकी सिफ़ारिशों की तुलना में अधिक तात्कालिक और गहरे दोनों प्रतीत होते हैं, अतः हमारा मानना है कि इन सिफ़ारिशों को आपके समक्ष इसी समय प्रस्तुत करना बेहतर होगा। 
1. हम आश्वस्त हैं कि ये (अमेरिका द्वारा बनाये गये नाभिकीय) हथियार गुणात्मक और परिमाणात्मक रूप से वर्तमान में उपलब्ध अन्य हथियारों की तुलना में बहुत अधिक प्रभावशाली हैं और इस दिशा में और शोध करने से बेहतर परिणाम मिलेंगे। इस दृढ़ विश्वास की प्रेरणा भूतकालीन (तकनीकी) विकास की अनुरूपता के कारण नहीं है, बल्कि (हमारे द्वारा शुरु किये गये) तत्कालीन हथियारों के विकास और क्षमतावर्द्धन सम्बन्धी विशेष कार्यक्रमों के कारण है और यह (विश्वास) सुपर-बम के निर्माण को साकार करने सम्बन्धी सभी अनुकूल तकनीकी संभावनाओं के द्वारा प्राप्त हुआ है।

2. हम परमाणविक हथियारों के किसी भी प्रभावशाली सैन्य प्रतिरोधक-उपाय को ईजाद कर पाने में अक्षम रहे हैं। यद्यपि हमें एहसास है कि भविष्य में किये जाने वाले शोध नयी संभावनायें प्रस्तुत करेंगें जो हमारे लिये आज अस्पष्ट हैं; यह हमारी दृढ़-सम्मति है कि ऐसा कोई भी सैन्य प्रतिरोधक उपाय नहीं खोजा जायेगा जो कि परमाणविक हथियारों को गिराये जाने से रोकने में पर्याप्त रूप से सक्षम हो।
विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट में यह सभी निष्कर्ष हैं हालाँकि यह (रिपोर्ट) अभी निर्माणाधीन है, परन्तु शायद ही यह बदली जायेगी.

3. हम इस तरह के कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने में असफ़ल हुये हैं, जो कि इस राष्ट्र का अगले दशकों के लिये परमाणविक हथियारों से हमले की स्थिति में बचाव की दिशा में नायकत्व सुनिश्चित कर सके; हम यह भी सुनिश्चित करने में बराबर अक्षम हैं कि यदि हमारे द्वारा इस दिशा में कोई नेतृत्व स्थापित होता भी है तो क्या यह हमें किसी सर्वाधिक डरावने विनाश से बचा पाने में सक्षम होगा। 

4. आने वाले वर्षों में, सेना-बलों की महा-शक्ति को बनाये रखने के लिये अधिक प्रभावशाली परमाणु हथियारों का विकास हमारे देश की किसी भी राष्ट्रीय योजना का सबसे स्वाभाविक तत्व होगा; जब कि हमें गंभीर संदेह है कि यह विकास दुनिया में युद्ध को अस्थाय़ी या स्थाय़ी तौर पर खत्म करने की दिशा में अपना कुछ योगदान कर सकेगा। हमें विश्वास है कि इस देश की सुरक्षा- जो कि शत्रु-शक्ति को हानि पहुँचाकर दण्डित करने की क्षमता के विपरीत- पूर्ण रूप से या प्राथमिक रूप से इसकी वैज्ञानिक या तकनीकी शूरवीरता पर निर्भर नहीं हो सकती। यह तभी हो सकता है जब भविष्य में होने वाले युद्धों को असंभव बनाया जा सके। यह आपके लिये हमारी सर्वसम्मति से और अति-आवश्यक सिफ़ारिश है कि इस  क्षेत्र की वर्तमान तकनीकी संभावनाओं के अधूरे दोहन के बावजूद, इस दिशा में उठाये गये सभी कदम और सभी अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रबन्धों का एकरुप से अन्त कर दिया जाये। 

5. इन सभी मुद्दों को आपके और सरकार के अन्य सदस्यों के अथवा अमेरीकी नागरिकों के संज्ञान में लाने के लिये हमें अपार खुश होना चाहिये, आपको इस (सिफ़ारिश) पर अमल करना चाहिये। 

आपका भवदीय
आर. जे. ओपेनहेमर 
Source: Alice Kimball Smith and Charles Weiner, eds., Robet J. Oppenheimer. Letters and Recollections (Cambridge, Mass.: Harvard University Press, 1980).

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