आपका जीवन ज्योतिर्मय हो!

सत्यमेव जयते के उद्घोष वाली भारतीय संस्कृति में जितना ज़ोर 'असतो मा सद्गमय' पर दिया गया है, उतना ही ज़ोर 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' पर भी है। कार्तिक अमावस्या की प्रकाशहीन रात्रि को दीपावली मनाना सूर्य-नमस्कार से अपना दिन शुरू करने वाले देश के लिये स्वाभाविक है। दीपावली के इस अंक में जहाँ डॉ मृदुल कीर्ति द्वारा आदि शंकर के कनकधारा स्तोत्र का हिंदी काव्यानुवाद प्रस्तुत है, वहीं आशुकवि दिनेश रविकर की कविताएँ भी दीपावली के विभिन्न पक्ष प्रस्तुत कर रही हैं। मॉरिशस से वत्सला राधाकिशन के अंग्रेज़ी काव्य का हिंदी रूपांतर डॉ श्रीश पाठक ने किया है। शशि पाधा का आलेख हमारे जीवन में भावनात्मक बुद्धिमता की आवश्यकता को रेखांकित करता है। महिम बरा की असमिया कहानी का अनुवाद शिव किशोर तिवारी ने किया है। अन्य स्थाई स्तम्भों के साथ इस अंक में 'नये हस्ताक्षर' स्तम्भ के अंतर्गत पहली बार चार रचनाएँ प्रस्तुत की जा रही हैं।  समीक्षा, शोध, निबंध, व्यंग्य, कहानी, लघुकथा, रसोई, जीवनी और साक्षात्कार के साथ यह अंक आपको प्रस्तुत करते समय दीपावली के उपलक्ष्य में दो शब्द अर्पित हैं:

साल की सबसे अंधेरी रात में
दीप इक जलता हुआ बस हाथ में
लेकर चलें करने धरा ज्योतिर्मयी

एक चंदा का ही तो अवकाश है
आकाश में तारों का भी तो वास है
और जगमग दीप हम रख दें कई

बन्द कर खाते बुरी बातों के हम
भूल कर के घाव उन घातों के हम
समझें सभी तकरार को बीती हुई

कड़वाहटों को छोड़ कर पीछे कहीं
अपना-पराया भूल कर झगड़े सभी
प्रेम की गढ़ लें इमारत इक नई।

(प्रज्ज्वलित दीपक का संलग्न चित्र काशी से देवेंद्र पाण्डेय जी के कैमरे से)

चलने से पहले आपको याद दिलाता चलूँ कि सेतु अंतरराष्ट्रीय लघुकथा प्रतियोगिता की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर 2017 है। आप भी यूनिकोड में लिखी अपनी एक अप्रकाशित रचना भेज सकते हैं। प्रतियोगिता में भाग लेते समय कृपया नियमों का अनुपालन करते हुए, उनसे सहमति अवश्य भेजिये।

शुभकामनाओं सहित,
अनुराग शर्मा


5 comments :

  1. संपादकीय संक्षिप्त - सुन्दर , दीपावली का मधुर गीत , साथ ही देवेन्द्र पांडेय जी के कैमरे से खींचा गया प्रज्ज्वलित दीपक की सुन्दर तस्वीर ।

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  2. सेतु का वर्तमान अंक बहुत ही उत्कृष्ट एवं अच्छी रचनाओं से परिपूर्ण है। संगीता गांधी की लघुकथाएं दिल को छू गई। अनुराग जी का साक्षात्कार आज ही देखा। कविता हिन्दी में ही उभरती है अनुराग जी की यह बात सुनकर हिन्दी की प्रतिष्ठा स्वयं सिद्ध हो गई।
    राजेंद्र ओझा जी की एक लघुकथा सेतु के आगामी अंक के लिए प्रेषित की गई है।
    हार्दिक शुभकामनाएँ।
    डॉ.मृणालिका ओझा
    7415017400

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  3. सेतु का हर अंक अद्भुत होता है । दीपावली पर सभी सामग्री सुंदर बधाई

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  4. बेहद शानदार सुलझी संपादकीय. सेतु सचमुच सेतु का कार्य बेहतरीन रीति कर रही है. अनुराग जी का श्रम पारस बन सर्वत्र को स्वर्णिम कर रहा. 🙏

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  5. बधाई अनुराग जी,
    हर बार की तरह संपादकीय पहले पढ़ा और दिल को छू लेने वाली कविता ने बधाई देने पर विवश किया। अभी पूरी पत्रिका पढ़ी नहीं, मगर विश्वास है, हर बार की तरह ही अपने समृद्ध स्वरूप में होगी।

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