रश्मि प्रणय वागले

आत्म-कथ्य

मैं इंदौर निवासी गृहणी हूँ। मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और संगीत में अध्ययन पूर्ण किया है। दर्शन एवं आध्यात्म में विशेष रुचि के साथ मराठी एवं हिंदी साहित्य पढने का शौक हैं। मानव मन की भावनाएँ पढ़ने, उन्हें जानने-समझने की ललक और उत्सुकता को धीरे धीरे शब्दों में उतारने का प्रयास करती हूँ।

मन के सुख दुःख व जीवन के अलग अलग रंग, लोक व्यवहार एवं अनुभव तथा आसपास घटित होने वाली घटनाओं को देखते-सुनते, विचार, शब्दों में उतर कर लेखन विशेषत: लघुकथा का रूप लेने लगे। हालांकि अभी भी लघुकथा इस विधा में मैं विद्यार्थी ही हूँ।

नई दुनिया, जागरण, दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों एवं नायिका,आहा ज़िन्दगी कई ई-पत्रिकाओं में समसामयिक, सामाजिक, संवेदनशील  विषयों पर लेख, लघुकथा आदि के माध्यम से समय समय पर अपने विचार व्यक्त करती रहती हूँ।

मराठी नाट्य रंगमंच पर सहभागिता एवं मराठी, हिंदी मंच संचालन, सांस्कृतिक सामाजिक कार्यों में सहभागिता दर्ज करती हूँ।

मानसिक रूप से अविकसित बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का स्वप्न लिए पिछले 14 वर्षों से उनसे जुड़ी हुई हूँ। लगभग दो सौ से अधिक लघुकथाएँ लिख चुकी हूँ।

अनेक लघुकथा संकलनों में प्रकाशित होने के साथ साथ स्वयं का एक लघुकथा संग्रह 'एक सेल्फी रिश्तों की' भी प्रकाशित हुआ है। जिसके विक्रय से प्राप्त सम्पूर्ण राशि इन्हीं विशेष बच्चों के उत्थान हेतु समर्पित करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।  मानवसेवा-ईशसेवा को जीवन का ध्येय-वाक्य मानकर स्वयं के मनुष्य से इंसान बनने का प्रयत्न प्रारम्भ हैं।

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