ईंटा प्रसाद - हास्य-व्यंग्य

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
भाग्यशाली है ईंटा प्रसाद जो ईंट उठाते-उठाते परचूनी की दूकान के मालिक बन गये, वर्ना कितने ईंट पाथने वाले हैं जो भरी दोपहरी में रायबरेली से लेकर इटावा के ईंट भट्टों पर बंधुआ मजदूर बने खर्च हो रहे हैं! ईंटा प्रसाद की किस्मत सुनहरी कलम से लिखी गयी जो काली मिर्च में पपीते के बीज मिलाने के कारण कोठरी के दर्शन देने मे कामयाब हो गई। जज साहिब को ईंटाप्रसाद ने कई तर्क और विर्तक के माध्यम से बताने की कोशिश की, कि शुद्ध चीज हजम करने का हाजमा आज नहीं किसी के पास तो फिर उन्हें शुद्ध चीज़ें देकर बीमार कैसे कर सकते हैं?

जज साहब ने उनके तर्क खारिज करके उनके जीवन में समृद्धि का नया द्वार खोला है। इस यात्रा में उन्हें जीव और जगत का इतना ज्ञान हुआ कि लोग उन्हें श्रीश्रीज्ञानीजी महाराज के नये नाम से पुकारने लगे। समाज में शोहरत और मोहरत के माया जाल में मलाई के मारे मासाराम साई से लेकर शिच्छाधारी तक सभी वहाँ मौजूद थे, जो धर्म का मर्म जानकर पूजा और नमाज में अल्लाह या भगवान के प्रति अपना विश्वास को आस-पास के लोगों को ज्ञान कराकर सर्व धर्म समभाव का धाम बनाने की दिशा में अग्रसर हो गये। कल्लू हज्जाम जन्मजात कबाड़ी जो ठहरा, घर और बाहर का कबाड़ा करने के अलावा करा कुछ नहीं, पर नियति को कुछ और ही मंजूर था। ईंटा प्रसाद वैसे तो स्वयं भी गाहे बगाहे लोगों को अपने पत्रकार होने का एहसास देते रहते थे। लेकिन उन्हें अपनी यात्रा के दौरान मिले महाशयों से प्राप्त ज्ञान से श्रीश्रीज्ञानीजी कहलाने का जो रोग लगा उसे चमत्कारिक ढंग से प्रस्तुत करने के लिए एक दिन उन्होंने टीवी वालों को बुलावा भेज दिया।

टीवी वालों के सामने ईंटा प्रसाद ने नहर वाले पीर से लेकर तालाब के किनारे खड़ी शमशीर की शोहरत सुना दी। अब किस्से तो किस्से ही होते हैं। कहने लगे, "कल की ही बात है, जब मै नहर के पास से निकला, तो मैंने न जाने क्यों सजदा जैसा कुछ आचरण कर लिया। बस्स, मेरा तो जीवन ही बदल गया। कल तक मेरी किराने की जिस दुकान पर ग्राहकों का टोटा रहता था, वहाँ दन दना दन भीड़ की भीड़ चली आ रही है बरसों का पुराना स्टाक मिनटों में सफाचट होने लगा है। खामदेव जी तो ईंटा प्रसाद से कई कदम आगे निकल गये बोले, "हमने जब जूते मांगे फूलों का हार मिला, जब जेब खाली थी भरपूर उधार मिला।"

उधार की बात आते ही ईंटा प्रसाद की आँखों मे चमक उतर आयी उन्होंने खामदेव को भक्तों की लिस्ट बनाने का आदेश दिया। कुछ ही समय में धूर्त ईंटा प्रसाद ने अपने लाभ के लिए भक्तों के बीच एक कान से दूसरे कान होते हुए, सब जगह धर्म का ढिढोरा पीट दिया। जिस गली में जायें सब ईंटा प्रसाद की बात करने लगे। कुछ लोगों ने अंटी से पैसा लगाकर कहीं गद्दन पीर के नाम पर तो कहीं नहर के फकीर के नाम पर, कहीं जार के नाम पर तो कहीं मजार के नाम पर, बड़े-बड़े बैनर लगाकर, त्रिपाल और दरी बिछाकर, उनके सम्मान में समारोह किये।

ईंटा प्रसाद ने अपने उन सब मुरीदों में से थोड़े चतुर को चुनकर चौकड़ी बना डाली। कल्लू हज्जाम, बैरम खाँ, लटकू प्रसाद और चपटे यादव को मिलाकर कमेटी का ऐलान कर दिया। इन चार लोगों को रामलीला कंपनी से फकीरी की ड्रेस मंगाकर 300 ₹ दिहाड़ी पर लगा लिया।
नहर वाले पीर भरते है सबके दुखों के तीर
जुम्मे के जुम्मे चढ़ानी होगी बस सूखी खीर

इतना सस्ता उपाय देखकर लोग चक्कर में पड़ गये और घनचक्कर बनकर नहर वाले पीर के यहाँ सूखी खीर चढ़ाने लगे, सूखी खीर के कारण ईंटा प्रसाद की बरसों से बन्द होने के कगार पर पहुँची परचूनी की दूकान फिर से हरी भरी होने लगी। हरियाली को देखकर बैरम खाँ और कल्लू हज्जाम का हाजमा बिगड़ गया और आनन फानन में पीर की सदारत में एक बड़ी सी लकीर खींच दी लकीर खिंचते ही ईंटा प्रसाद ने चप्टे यादव की तलाब वाली जमीन पर नये चमत्कार होने का प्रचार करा दिया। फिर क्या था, नहर वाले पीर की भीड़ भौंचक्की होकर तालाब की ओर प्रस्थान कर गयी। थोड़े ही दिनों में ईंटा प्रसाद की लोकप्रियता को चार चाँद लग गये।
तेरह तेरह कार हैं, ग्यारह-ग्यारह गाँव
वीर जी के प्रताप से नीर बहे हर गाँव।

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।