आइन्स्टाइन: सबसे मौलिक चिंतकों में एक

मेहेर वान

मेहेर वान

नवम्बर 1911 में दुनियाँ के दो सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिकों हेनरी पोइनकेयर और मेरी क्यूरी को एक नवयुवक वैज्ञानिक के बारे में अनुशंसा पत्र लिखने के लिए कहा गया, जिनके आधार पर स्विस फ़ेडरल इंस्टीटयूट ऑफ़ टेक्नोलोजी को उस नवयुवक की प्रोफ़ेसर के पद पर नियुक्ति का निर्णय लेना था। इस नवयुवक ने 6 साल पहले कुछ महत्वपूर्ण शोधपत्र प्रकाशित करके विज्ञान की दुनिया में तहलका मचाया था। यह नवयुवक अलबर्ट आइन्स्टीन थे, जो स्विस फ़ेडरल इंस्टीटयूट ऑफ़ टेक्नोलोजी में पढ़ाने के लिए वहां प्रोफ़ेसर के पद पर नियुक्ति चाह रहे थे। लेकिन स्विस फ़ेडरल इंस्टीटयूट ऑफ़ टेक्नोलोजी के तमाम बड़े विद्वान आइन्स्टाइन की योग्यताओं को लेकर शक की स्थिति में होने की वजह से उनकी नियुक्ति के विरोध में थे। इन सिफारिशी पत्रों के बाद आइन्स्टीन की स्विस फ़ेडरल इंस्टीटयूट ऑफ़ टेक्नोलोजी में प्रोफ़ेसर के पद पर नियुक्ति संभव हो सकी थी।

हेनरी पोइनकेअर की और से

नवम्बर, 1911

मेरे प्रिय सहकर्मी,

श्री आइन्स्टीन सबसे मौलिक चिन्तकों में से एक हैं, जिनसे मैं मिला हूँ। उनकी उम्र कम होने के बावजूद, उन्होंने अपने समय के अगुआ वैज्ञानिकों में अपना स्थान बनाया है। उनकी जिस बात की सबसे अधिक प्रशंसा करनी पड़ेगी वह उनकी सुगमता है, जिसके साथ वह नए सिद्धांतों के साथ खुद को अनुकूल बना लेते हैं और यह समझते हैं कि उन सिद्धांतो से कोई संभव निष्कर्ष कैसे निकालना है। वह सिर्फ पुराने सिद्धांतों तक ही सीमित नहीं हैं, और जब भौतिकी की कोई समस्या उनके समक्ष आती है तो वह सभी संभावनाओं के साथ उसका सामना करने को तैयार होते हैं। एक समस्या जब उनके दिमाग में प्रवेश करती है तो वह स्वयं नए सिद्धांत की सम्भावनाओं में प्रकट होने लगती है जो कि किसी दिन प्रयोगों द्वारा सिद्ध हो सकती है। मेरे कहने का आशय यह नहीं है कि ये सभी संभावनाएँ प्रयोगों के परीक्षण में सफल होंगी यदि उनका परीक्षण संभव हो सकेगा। चूँकि वे उन सभी दिशाओं में संभावनाओं की तलाश करते हैं जिनमें कि किसी को प्रयास करना चाहिए और इसके विपरीत जो रास्ते वह चुनते हैं उनमें से अधिक अँधेरे रास्ते ही होते हैं। लेकिन ठीक उसी समय यह आशा भी की जानी चाहिए कि जो रास्ते वह चुनते हैं वह सही रास्ते हों, यही पर्याप्त है। वास्तव में इसी तरह से आगे बढ़ना चाहिए। गणितीय भौतिकी का काम सही प्रश्न पूछना है और प्रायोगिक भौतिकी का काम उन्हें सुलझाना। 

भविष्य श्री आइन्स्टीन की महत्ता को अधिकाधिक साबित करेगा, और इस विश्वविद्यालय के विद्वान इस नवयुवक विशेषज्ञ को अपनी और आकृष्ट करके निश्चित रूप से एक दिन महान सम्मान अर्जित करेंगे।

आपका सर्वाधिक समर्पित सहकर्मी,
पोइनकेयर
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मेरी क्यूरी की और से

पेरिस, 17 नवम्बर 19111

प्रिय श्रीमान,

मुझे अभी आपका पत्र मिला, जिसमे आपने श्री आइन्स्टीन के बारे में मेरे व्यक्तिगत विचार मांगे हैं जिनसे मिलने का मुझे हाल ही में अवसर मिला था।  आप यह भी कह रहे हैं कि श्री आइन्स्टीन की वापस ज्यूरिक लौटने की बहुत अधिक इच्छा है और जल्दी ही उन्हें यह अवसर मिल भी सकता है।
  
मैं अक्सर श्री आइन्स्टीन के द्वारा आधुनिक सैद्धांतिक भौतिकी पर प्रकाशित शोध-पत्रों की प्रशंसा करती रही हूँ। इससे भी अधिक मुझे विश्वास है कि सैद्धांतिक भौतिकविद इस बात से सहमत हैं कि यह शोध-पत्र सर्वोच्च स्तर के हैं। ब्रसेल्स में, जिस वैज्ञानिक कोंफेरेन्स में मैं शामिल होने गई थी उसमें आइन्स्टीन भी शामिल हुए थे, मैं उनके दिमाग की स्पष्टता, विषय-ज्ञान के विस्तार और ज्ञान की गहराई की सराहना कर पाई थी। यदि हम यह ध्यान दें कि श्री आइन्स्टीन अभी नवयुवक हैं, उनपर हमारा आशान्वित होना और उनमें भविष्य का एक अगुवा भौतिकविद देखना सही है। मेरे विचार है कि वैज्ञानिक संस्थान उनकी इच्छानुसार काम देकर, चाहे वह किसी पूर्व रूप से विद्यमान चेयर पर उनकी नियुक्ति अथवा उनके लिए उपयुक्त किसी चेयर को स्थापित करने का निर्णय लेकर, गौरवान्वित हो सकता है और इस तरह निश्चित रूप से विज्ञान की महान सेवा भी होगी।

श्री आइन्स्टीन की इच्छा के समाधान में, अपनी सम्मति देकर थोड़ी सी सहभागिता करके मुझे बहुत ख़ुशी होगी।  

उन्हें स्वीकार कीजिये, मेरी आपसे विनती है, मेरी शुभकामनाओं के आश्वासन के साथ,
मेरी क्यूरी
विज्ञान संकाय, पेरिस
(जनरल फिजिक्स लेबोरेटरी)

(Sources: Poincare's translated letter via Solvay Conferences on Physics:Aspects of the Development of Physics Since 1911, Curie's translated and supplied by Jeremy Harding)

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