संस्मरण: निस्वार्थ सहायता

नीलू गुप्ता
- नीलू गुप्ता 

कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका

जीवन में जीवन पर्यन्त घटनायें घटती ही रहती हैं कभी छोटी कभी बड़ी। बड़ी-बड़ी घटनाएँ  भुलाये नहीं भूलतीं। परन्तु कभी कभी कुछ छोटी  घटनाएँ  भी हृदय-पटल पर अंकित हो जाती हैं। एक घटना का वर्णन मैं यहाँ करना चाहूंगी जिसके प्यार स्नेह और अपनत्व ने मेरे हृदय को झकझोर दिया।

जाति, धर्म, समाज सब कुछ भूलकर जब किसी के हाथ आपकी सहायता के लिए उठते  हैं तो अनायास ही 'वसुधैवकुटुम्बकम' सारा कुटुंब ही आपका अपना है कि भावना मूर्तरूप लेती है। आज के इस भयावह माहौल में जब यह घटना घटी या कहिये कि मेरी सहायता की गई तो मैंने मन ही मन उस व्यक्ति को नमन किया। मेरी आँखों में आँसू आ गए, मैंने इस घटना को जीवन की अहम घटना मानते हुए उद्धृत करने का निश्चय किया।

मैं  अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया प्रान्त में रहती हूँ। प्रायः मैं एक टैक्सी से आया जाया करती हूँ। टैक्सी वाला अफगान है। मेरे पति अस्वस्थ थे, अतः मुझे घर पहुँचने की जल्दी थी। परन्तु मुझे सवेरे के लिए ब्रैड भी चाहिए थी। मैं नहीं चाहती थी कि मुझे घर पहुँचने में देर हो अतः मैंने उसे ब्रेड लेकर, दे  जाने को कहा। उसने पूछा कि आपको सवेरे कितने बजे ब्रेड चाहिए। मैंने कहा कि  सवेरे 8 बजे। 'अच्छा' कहकर वो चला गया, मैंने  सोचा कि सवेरे उसे फ़ोन करके बुला लूंगी और जाकर ब्रेड ले आऊँगी।

सवेरे ठीक 8 बजे दरवाजे पर घंटी बजी। मैंने दरवाजा खोला तो  देखा कि वही ड्राइवर ब्रेड लेकर आया है। इससे पहले कि मैं उससे कुछ कहूँ, वह बैग मेरे हाथ में देकर बिना पैसे लिए चला गया। मैं उसे बुलाती रह गई पर वह नहीं लौटा।

बात बहुत छोटी सी है पर एक अन्य जाति-धर्म के व्यक्ति का इतना सुंदर भाव देख कर मेरी आँखों से आँसू बहने लगे। मैं मन ही मन सोचने लगी कि यह एक सच्ची सेवा है। आज के इस विषैले वातावरण में जब आदमी आदमी का दुश्मन बना हुआ है यदि हम एक दूसरे की सहायता करते हैं तो संभवतः इससे बढ़कर भाईचारा और क्या हो सकता है।

काश कि हम सभी इसी तरह एक दूसरे की सहायता करें, एक दूसरे के दुःख दर्द को अपना समझें तो धरती पर ही स्वर्ग उतर आएगा। मेरे हृदय पटल पर अंकित कभी न भूलने वाली यह घटना है। 

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