ऑनलाइन साहित्य की वैचारिकी

दिव्या एम पी

दिव्या एम पी

हिंदी विभाग, पांडिच्चेरी विश्वविद्यालय, पुदुच्चेरी – 605014

डिजिटल युग के विकास के साथ-साथ विश्व भी बदलने लगा है। धीरे-धीरे समाज ने इस नई क्रांति को अपनाना शुरु कर दिया। साहित्य भी इससे कैसे अछूता रह सकता है ? फलतः जिस साहित्य ने तकनीकी से जुड़कर अपना निर्माण किया उसे ऑनलाइन साहित्य के नाम से जाना जाता है। यहाँ ऑनलाइन साहित्य से तात्पर्य है – ऑनलाइन में उपलब्ध समूचा साहित्य।

सामान्य रूप से एक कंप्यूटर का दूसरे कंप्यूटर या इंटरनेट के माध्यम से परस्पर जुड़े रहने की स्थिति को ऑनलाइन कहते हैं। अंग्रेजी शब्दकोश के अनुसार - “[ Connected by computer to one or more other computers or networks, as through a commercial electronic information services or the internet.]1। यह सामान्यतः एक दूसरे के साथ जुड़े रहने की स्थिति को दर्शाता है।
       इक्कीसवीं सदी का साहित्य जो मुद्रित माध्यम से भिन्न अपने एक अलग परिवेश का इंटरनेट के माध्यम से निर्माण कर रहा है, उसे ऑनलाइन साहित्य की संज्ञा दे सकते हैं। जिसके कई रूप हैं कई दिशाएं हैं। कंप्यूटर ने जिस आभासी दुनिया [Virtual World] का निर्माण किया है, उसमें उपलब्ध साहित्य के कई नाम भी प्रचलित हैं। जैसे – इलेक्ट्रॉनिक साहित्य अथवा ई-साहित्य, डिजिटल साहित्य, साइबर साहित्य, हाइपर टेक्स्ट साहित्य, न्यू मीडिया राइटिंग इत्यादि। सरल रूप में ऑनलाइन साहित्य को कंप्यूटर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या इंटरनेट के माध्यम से बना हुआ साहित्य कह सकते हैं।
ऑनलाइन साहित्य का स्वरूप अत्यंत विस्तृत है। तकनीकी के साथ-साथ इसके भी रूप, ढंग, भाव, शैली आदि बदलते रहते हैं। इसलिए ऑनलाइन साहित्य को एक निश्चित परिभाषा में बाँधना कठिन कार्य है। मुद्रित साहित्य अथवा परंपरागत साहित्य ने जब ऑनलाइन माध्यम में प्रवेश किया तो उसके स्वरूप में काफी बदलाव आ गया तथा साहित्य दृश्य, श्रव्य (चित्र, शब्द, एनिमेशन) रूप में हमारे समक्ष प्रस्तुत होने लगा। ऑनलाइन साहित्य की साज-सजावट, भाषा, शैली, रूप सभी पर कंप्यूटर या इंटरनेट की विशेषताएँ परिलक्षित होने लगीं। इंटरनेट पर वेबसाइट, ब्लॉग, ई-पत्रिकाएँ, विभिन्न सोशल नेटवर्किंग साइटें आदि में ऑनलाइन साहित्य उपलब्ध है।
सामान्य रूप से कहें तो कंप्यूटर अथवा इंटरनेट पर उपलब्ध सभी साहित्यिक रूप को ऑनलाइन साहित्य की संज्ञा दी जाती है। परंतु इलेक्ट्रॉनिक साहित्य की परिभाषा के अनुसार कंप्यूटर या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (मोबाइल, टैबलेट आदि) में इंटरनेट के माध्यम से प्रकाशित साहित्य को ई-साहित्य कहते हैं। इस प्रकार के साहित्य का प्रकाशन, प्रचार-प्रसार इंटरनेट पर ही संभव है। एच. कैथरीन के अनुसार- “Electronic literature, generally considered to exclude print literature that has been digitalized, is by contrast ‘digital born’ and (usually) meant to be read on a computer.”2। अतः यहाँ ई-साहित्य शब्द का प्रयोग न करके ऑनलाइन साहित्य शब्द का प्रयोग करना उचित होगा। ऑनलाइन साहित्य के अंतर्गत इंटरनेट पर उपलब्ध साहित्य को निम्न प्रकार से बाँटा जा सकता है –

1. इंटरनेट पर उपलब्ध परंपरागत साहित्य का डिजिटलीकृत रूप।

2. व्यक्तिगत ब्लॉग, ई-पत्रिकाएँ, वेबसाइट, सोशल नेटवर्किंग साइट आदि पर उपलब्ध मैलिक साहित्य।

3. हाइपर टेक्स्ट साहित्य।

उपरोक्त प्रथम श्रेणी का साहित्य मुद्रित पुस्तकों का ही डिजिटल रूप है। जैसे हिंदी या अन्य किसी भी भाषा के प्राचीन साहित्य से लेकर आधुनिक साहित्य तक जिसका मुद्रित माध्यम में प्रकाशन हो चुका है अथवा हो रहा है, उन किताबों को पी.डी.एफ. के रूप में या किसी अन्य रूप में विविध वेबसाइटों पर उपलब्ध कराना। हिंदी समय, भारतकोश, गद्यकोश, कविताकोश, काव्यालय आदि वेब पृष्ठों पर इस प्रकार के साहित्य सुरक्षित हैं। इसी के फलस्वरूप देश-विदेश में कहीं भी पाठक अपने पसंदीदा लेखक को या पुस्तकों को पढ़ सकते हैं। इस प्रकार के साहित्यिक पाठ को इलेक्ट्रानिक साहित्य की संज्ञा से अभिहित इसलिए नहीं किया जा सकता है कि इसमें वो सारी विशेषताएँ दृष्टव्य नहीं हैं जो ई साहित्य में होती हैं।
उपरोक्त दूसरे और तीसरे प्रकार का साहित्य ऑनलाइन साहित्य की विशेषताओं से युक्त होता है। डिजिटल वातावरण में लिखे जाने के कारण इस प्रकार के साहित्यिक पाठ में शब्द, दृश्य, एनीमेशन, वीडियो, ऑडियो आदि मल्टीमीडिया तकनीकी का सामंजस्यपूर्ण प्रयोग होता है। ई- साहित्य की सर्वथा सम्पूर्ण विशेषताओं से युक्त साहित्य तो केवल हाइपर टेक्स्ट साहित्य ही है।
विशेषताएँ
अंतःक्रियात्मकता [Interactivity] ऑनलाइन साहित्य की एक खास विशेषता है। यहाँ परंपरागत साहित्य से भिन्न लेखक-पाठक के बीच की दूरी मिट जाती है। तथा दोनों के बीच वैचारिक रूप से संबंध बना रहता है। जैसे- चाहे व्यक्तिगत ब्लॉग हो या सोशल नेटवर्किंग साइटें हों, पाठक किसी साहित्यिक पाठ को पढ़ने के तुरंत बाद उसकी प्रतिक्रिया पोस्ट के नीचे दे सकता है। उत्तम, मध्यम, अधम रचनाओं की पहचान पाठक की प्रतिक्रिया-आलोचना से ही होती है। इन प्रतिक्रियाओं और आलोचनाओं के कारण लेखक अपने अगले पोस्ट में भूल को सुधार लेता है। यदि प्रतिक्रियाओं के परिणाम स्वरूप रचना उत्तम कोटि की प्रसिद्धि पाती है तो लेखक का मनोबल ऊँचा होता है और वह अपने अगले पोस्ट में पिछले पोस्ट की अपेक्षा अधिक उत्तम लेखन के लिए प्रेरित होता है।
स्वच्छंद प्रकाशन [Freedom of Publishing] के कारण ऑनलाइन में व्यक्ति अकेले या व्यक्तियों के समूह मिलकर साथ लेखन कार्य कर सकते हैं। संपादक या प्रकाशक जैसे मध्यवर्ती लोगों का अस्तित्व यहाँ खत्म हो जाता है। लेखक अपने विचार-विमर्श, साहित्यिक पाठ आदि खुल कर प्रकाशित कर सकते हैं। यहाँ लेखक ही प्रकाशक बन जाता है।
अरेखीय रचना [Non-linear writing] ऑनलाइन साहित्य की विशेषताओं में से एक है। इसकी वजह से पाठ को पढ़ने या समझने की दृष्टि में भी बदलाव नज़र आता है। हाइपर टेक्स्ट साहित्य में इस प्रकार की रचनाएँ ज्यादा नज़र आती हैं।
जैसा कि पहले कहा गया है उक्त प्रकार के साहित्य का डिजिटली जन्म [Digital Born] होता है। इसका तात्पर्य है इंटरनेट से जुड़ा हुआ कंप्यूटर अथवा उसी प्रकार के अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण से बना हुआ साहित्य। जिसका प्रकाशन प्रचार-प्रसार आदि इंटरनेट के ज़रिए संभव है। हाइपर टेक्स्ट साहित्य की दृष्टि से देखेंगे तो डिजिटल से बाहर इसका कोई पूर्ण अस्तित्व नहीं होता है।
न्यू-मीडिया के वर्तमान दौर में सम्पूर्ण विश्व आपस में जुड़ा हुआ है। सोशल नेटवर्किंग साइटों में तो बच्चे, बूढ़े, जवान आदि सभी पीढ़ियाँ सक्रिय भूमिका में हैं। ऐसी भूमिका में ऑनलाइन साहित्य को पढ़कर पाठक अपनी प्रतिक्रिया खुद लेखक तक सीधे पहुँचाता है। प्रत्येक पाठक अपने पसंदीदा लेखक से कहीं न कहीं जुड़ाव में रहता है। फलतः किसी भी रचना पर टीका टिप्पणी उस रचना के प्रकाश में आने के तुरंत बाद शुरु हो जाती है। साहित्य के क्षेत्र में यह एक नयी शुरुआत है। साहित्य के, लेखन के, अभिव्यक्ति के पूर्णतः सार्वजनिक होने का।
ऑनलाइन साहित्य की एक और विशेषता उसकी रचना शैली एवं अवतरण का ढंग है। मल्टीमीडिया तकनीक के इस्तेमाल की वजह से किसी भी रचना को पढ़ा, सुना व देखा जा सकता है। पाठक ऐसी रचनाओं पर ज्यादा आकर्षित भी होते हैं जो परंपरागत लेखन से भिन्न रचनात्मक शैली में नयापन लिए हुए हों।
इतिहास
ऑनलाइन साहित्य की शुरुआती दौर से संबंधित एक ऑडियो बुक, जिसे सन् 1934 में बनाया गया था, का जिक्र विकीपीडिया में है। यह अनेक लघु कथाएँ एवं किताबों के अध्यायों का संकलन था। मैकल हार्ट पहले ई लेखक हैं। विकिपीडिया के अनुसार - सर्वसम्मति से 1971 में मैकल हार्ट को पहले ई-बुक लेखक के रूप में मान्यता मिली जिन्होंने अमेरिका के एक दस्तावेज को इलेक्ट्रॉनिक रूप दिया। लगभग 1994 तक व्यक्तिगत डायरी के अनुसार लिखी जानेवाली ऑनलाइन डायरी (आज के ब्लॉग) की शुरुआत हुई।3 ऑनलाइन साहित्य के अंतर्गत हाइपर टेक्स्ट साहित्य की शुरुआत 1980 दशक के उत्तरार्ध तथा 1990 के दशक के पूर्वार्ध में हुआ। विभिन्न साहित्यिक पाठ को लिंकों द्वारा जोड़कर हाइपर टेक्स्ट बनाया गया। यह मुख्यतः पाठ पर आधारित है। पैरेट वीरेस कहती हैं - “[The hypertext literature created in the late 1980 and early 1990s was primarily text based and was characterized by linking various blocks of text together…]4। सन् 1991 से 2003 के समय तक वर्ल्ड वाइड वेब का प्रारंभिक रूप चलता रहा। 2000 तक यूनीकोड एनकोडिंग मानकों का विकास हुआ जिसकी वजह से लोग अपनी मातृभाषा में कंप्यूटर का प्रयोग करने लगे। यह इंटरनेट में साहित्य के विकास की पहली सीढ़ी थी। ई-साहित्य के विकास के दूसरे चरण के रूप में वेब 2.0 का आविर्भाव माना जा सकता है। 2004 तक आते-आते वेब 2.0 की शुरुआत हुई। तत्पश्चात् अंतःक्रियात्मकता [Interactivity] जैसी अनेक विशेषताएँ इंटरनेट में उपलब्ध होने लगी। फलस्वरूप ब्लॉगिंग, ई-पत्रिकाएँ, सोशल नेटवर्किंग साइट आदि का विकास हुआ। लोग अपनी-अपनी मातृभाषा में अपनी भावनाओं को व्यक्तिगत ब्लॉगों में या वेबसाइटों, ई-पत्रिकाओं में लिखने लगे। उत्तरोत्तर तकनीकी विकास के परिणाम स्वरूप साहित्य ने इंटरनेट की दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। 
साहित्यिक आधार
इंटरनेट में साहित्य पर चर्चा करनेवाली वेबसाइटों की बात करें तो उन्हें कई प्रकारों में विभक्त करना होगा। वास्तव में इन्हीं साइटों में साहित्यिक गतिविधियाँ होती हैं। सुनील कुमार लवटे ने लिखा है - हिंदी साहित्य से संबंधित वेबसाइट के रूप की दृष्टि से अनेक प्रकार हैं। कुछ पर हर दिन नया साहित्य प्रकाशित होता है। कुछ व्यक्तिगत वेबसाइटें भी हैं जिन पर लोग अपना लिखा हुआ साहित्य प्रकाशित करते हैं।5 कुछेक संस्थाओं की भी वेबसाइटें इंटरनेट पर दृष्टव्य है। साहित्य की विविध विधाओं के लिए समर्पित वेबसाइटें भी यहाँ उपलब्ध है। ई-साहित्य के इतिहास में ब्लॉगिंग का योगदान महत्वपूर्ण है। ब्लॉग एक प्रकार की वेबसाइट है जिसमें व्यक्ति अपनी बातें, विचार, चिंतन आदि को एक डायरी के रूप में लिखता है। विषय वैविध्य की दृष्टि से यह अनेक प्रकार के हो सकते हैं। जैसे – राजनीतिक ब्लॉग, वाणिज्यिक ब्लॉग, साहित्यिक ब्लॉग आदि। विषय प्रतिपादन की दृष्टि से इसके टेक्स्ट ब्लॉग, वीडियो ब्लॉग, चित्र ब्लॉग आदि नाम प्रसिद्ध हैं। साहित्यिक दृष्टि से देखा जाय तो ब्लॉगिंग के माध्यम से किसी भी रचना में त्वरित लेखन, त्वरित प्रकाशन और त्वरित प्रतिक्रिया मिल सकती है। इसी श्रेणी में सोशल नेटवर्किंग साइटें भी आती हैं। सोशल नेटवर्किंग साइट एक ऐसी ऑनलाइन जगह है, जहाँ उपयोगकर्ता अपना संक्षिप्त परिचय के साथ व्यक्तिगत संबंध सृजन कर सकता है और उसके ज़रिए अन्य उपभोक्ताओं के साथ संबंध बना सकता है। अमांडा लेंहर्ट तथा मेरी मेडेन ने एक लेख में लिखा है - [A social networking site is an online place where a user can create a profile and build a personal network that connects him or her to other users.]6। इंटरनेट की दुनिया में फेसबुक, ट्विट्टर, लिंकडिन आदि अनेक सोशल नेटवर्किंग साइटें हैं जो केवल मनोरंजनार्थ नहीं बल्कि सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक शैक्षणिक आदि जीवन के प्रत्येक पहलू से संबंधित हैं। साहित्यिक दृष्टि से इस माध्यम को परखा जाए तो प्रतिदिन अनेक मौलिक रचनाएँ, चाहे वह कथा साहित्य हो, कविता हो या अन्य किसी भी विधा में हो, सोशल नेटवर्किंग साइटों में जन्म ले रही हैं। ई-पत्रिकाएँ भी इस मामले में पीछे नहीं है। दैनिक रूप से, साप्ताहिक रूप से, मासिक रूप से ई-पत्रिकाओं में साहित्यिक विधाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। सेतु, अभिव्यक्ति डॉट कॉम, समालोचन, जानकीपुल, अपनी माटी, साहित्य शिल्पी, स्वर्गविभा आदि देश विदेश से निकलने वाली कई ई पत्रिकाएँ ऑनलाइन में उपलब्ध हैं।
इस तकनीकी साहित्यिक क्रांति के कारण सुदूर बैठे व्यक्ति अपनी मनचाही भाषा में साहित्यिक पाठ का आस्वादन कर सकते हैं।
संदर्भ - संकेत
1.       Dictionary.references.com, accessed on 30.06.2015
2.       http://eliterature.org/pad/elp.html (Electronic literature: What is it?, Hayels Katherine) Accessed on 12.10.15
3.       http://wikipedia.org/literature/history, accessed on 15.10.2015
4.       www.folklore.ee/folklore/vol29/cyberlit.pdf(Piret Vires{date of issue-10.7592/EFJF 2005.29.cyberlit} Literature in cyberspace, accessed on 30.06.2015
5.       हिंदी वेब साहित्य, डॉ. सुनीलकुमार लवटे, पृ.सं. 42

6.       Amanda Lenhart and marry Madden, Social networking websites and teens – An overview

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