गैलीलियो का मुक़दमा

मेहेर वान

मेहेर वान

15 फरवरी 1564 को जन्मे गैलिलियो गैलिली को उस समय का केन्द्रीय व्यक्तित्व माना जाता है जब वैज्ञानिक क्रान्ति और पुनर्जागरण के ज़रिये मानवीय ज्ञान दर्शन की सीमाएं लांघकर आधुनिक विज्ञान के रूप में विकसित हो रहा था। गैलिलियो ने अपने जीवनकाल में तमाम महत्वपूर्ण खोज कीं। उनके द्वारा की गई खगोलीय गणनाये आज भी महत्वपूर्ण हैं। गैलिलियो ने पहला दूरदर्शी यन्त्र बनाया था, जिससे उन्होंने तमाम तारों और ग्रहों की गति की गणना की थी। उन्होंने पहली बार सूर्य के धब्बों को अपने दूरदर्शी से नंगी आँखों से देखा था और बार-बार देखने से उन्होंने अपनी आँखे ख़राब कर लीं थी।  गैलिलियो ने अपने अध्धयन के आधार पर यह सिद्ध करने की कोशिश की थी कि सूर्य स्थिर है और दुनिया के केंद्र में स्थित है और पृथ्वी उसके चक्कर लगा रही है। मगर यह सिद्ध करना उनके लिए एक बड़ी मुसीबत बनकर सामने खड़ा हो गया था। उस समय धार्मिक मान्यताएं कठोर और शक्तिशाली थीं। सूर्यकेद्रित सौरमंडल की वकालत के लिए रोमन कैथोलिक चर्च ने गैलिलियो के खिलाफ मुकदमा चलाया था और उन्हें मौत की सजा देना तय कर लिया था। एक पादरी थे जो कि गैलिलियो के दोस्त थे उन्होंने गैलिलियो को समझाया था कि अगर वह माफ़ी मांग लेंगे तो वह न्यायाधिकारियों से गैलिलियो की सज़ा कम करवाकर आजीवन कारावास करने की वकालत कर सकते हैं। न्यायालय में गैलिलियो ने सामाजिक रूप से माफ़ी मांग ली थी, वे असमय नहीं मरना चाहते थे और उनकी इच्छा थी कि वह अपना वैज्ञानिक शोध जारी रखें। बाद में गैलिलियो की सजा को और कम करके उन्हें अपने ही घर में आजीवन नजरबन्द कर दिया गया। अपने घर में नजरबंद होते हुए उन्होंने खगोलीय गणनाओं की दिशा में शोध करना तो बंद कर दिया था, मगर उन्होंने मरने तक यांत्रिकी पर काफी महत्वपूर्ण काम किया। सन 1642 में उनकी मौत हो गई। गैलिलियो पर किये गए मुक़दमे में सुनाये गए निर्णय का दंड-पत्र और गैलिलियो का ऐतिहासिक माफीनामा यहाँ प्रस्तुत है। कहते हैं कि अपना यह ऐतिहासिक माफीनामा पढ़ने के बाद (जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि धरती स्थिर है और सौर मंडल के केंद्र में है) गैलिलियो कुटिलता से मन ही मन मुस्कुराते हुए पृथ्वी के लिये बुदबुदाए थे, “इसके बावजूद वह घूमती है...”   

गैलीलियो के खिलाफ सुनाया गया निर्णय (२२ जून 1633)

जैसेकि तुम, यानि गैलीलियो, विनसेंजो गैलिली-फ्लोरेंटाइन के पुत्र, उम्र सत्तर साल, पर सन 1615 में पवित्र कार्यालय में दोषारोपण किया गया था; किसी के पढ़ाये हुए गलत सिद्धांतों को सच मानने के लिए; सूरज स्थिर है और दुनिया के केंद्र में है और यह कि पृथ्वी घूमती है, वह भी दैनिक गति के साथ; शिष्य बनाने और वही सिद्धांत अपने शिष्यों को पढाने के लिए; उसी तरह के मत रखने वाले कुछ खास जर्मन गणितज्ञों से पत्राचार करने के लिए; “सूरज के धब्बों के सम्बन्ध में” विषय पर कुछ खास शोध-पत्र प्रकाशित करने के लिए, जिनमें आपने इस मत की सत्यता स्थापित की है; अपने अनुसार अर्थ निकाल कर और उनकी व्याख्या करके, पवित्र धर्म-ग्रन्थ में इसके विपरीत की गई आपत्तियों के उत्तर देने के लिए, वे आपत्तियां जो समय-समय पर इन मतों के खिलाफ प्रेरित करती हैं; और हमें पत्र के रूप में एक सबूत प्रस्तुत किया गया है जिसे आपने तथाकथित रूप से अपने पुराने शिष्य को लिखा था, इस पत्र में कॉपरनिकस की स्थिति का अनुसरण करते हुए विभिन्न प्रस्ताव स्थापित किये गए हैं, जो कि सच्चे अर्थों में पवित्र धर्मग्रन्थ के खिलाफ हैं:

इस प्रकार यह पवित्र न्यायाधिकरण इस इरादे पर पहूँचा है, कि उस अव्यवस्था और अपकार के खिलाफ कार्यवाही की जाए, जिसके परिणामस्वरूप पवित्र आस्था के प्रति यह पूर्वाग्रह के स्तर तक विकसित होता रहा, इस सर्वोच्च और सार्वभौमिक न्यायिक जांच में परमपावन पोप और सर्व-प्रतिष्ठित लार्ड कार्डिनल्स के द्वारा दिए गए आदेशों के द्वारा, सूर्य की स्थिरता और पृथ्वी की गति वाले दो प्रस्तावों को धार्मिक विद्वानों द्वारा इस प्रकार समझा जाए:

यह प्रस्ताव, कि सूर्य दुनिया के केंद्र में है और अपने स्थान से नहीं खिसकता, मूर्खतापूर्ण, दार्शनिक रूप से गलत और औपचारिक रूप से धर्मविरोधी है, क्योंकि यह स्पष्ट रूप से पवित्र धर्म-ग्रन्थ के विपरीत है।

यह प्रस्ताव, कि पृथ्वी न ही स्थिर है और न ही दुनिया के केंद्र में है, बल्कि घूमती है और वह भी दैनिक गति से, उतना ही मूर्खतापूर्ण, दार्शनिक रूप से गलत और धार्मिक आस्था के हिसाब से त्रुटिपूर्ण है।

लेकिन जैसी कि उस समय यह आशा की गई थी, कि आपके साथ उदारता की जाये, परमपावन की उपस्थिति में पवित्र मंडली ने पच्चीस फरवरी, 1616 को यह निर्णय लिया, कि सर्व-प्रतिष्ठित लार्ड कार्डिनल बेलार्माइन द्वारा आपको तथाकथित गलत सिद्धांत का पूर्ण रूप से परित्याग करने का आदेश दिया जाना चाहिए, और आपके इनकार की स्थिति में, पवित्र कार्यालय के प्रतिनिधि के द्वारा आपके ऊपर इस तथाकथित सिद्धांत को त्यागने, किसी और को इसकी शिक्षा न देने, इसका सैद्धांतिक बचाव न करने, यहाँ तक कि इसके बारे में चर्चा तक न करने की निषेधाज्ञा थोपी जानी चाहिए; और आपके द्वारा इस निषेधाज्ञा की बिना शर्त, चुपचाप स्वीकृति कर पाने में असफल होने की दशा में आपको जेल में डाल दिया जाना चाहिए। इस आज्ञा के क्रियान्वयन में, उसके अगले दिन कार्डिनल बेलार्माइन की उपस्थिति में, उन्हीं महल में कथित लार्ड कार्डिनल के द्वारा नरम चेतावनी दिए जाने के बाद पवित्र कार्यालय के तत्कालीन ‘पादरी प्रतिनिधि’ के द्वारा लेखाधिकारी और गवाह की उपस्थिति में आप पर यह आज्ञा आरोपित की गई थी, कि आपको इस झूठे मत को पूरी तरह से त्यागना है और इसे भविष्य में न तो इस मत से कोई वास्ता रखना है न इसे किसी अन्य को किसी भी तरह से मौखिक या प्रकाशित करके पढ़ाना है; और यह आज्ञा मानने के आपके वादे पर, आपको वापस भेज दिया गया था। और इस आज्ञा में, कथित सिद्धांत का विश्लेषण करने वाली और खुद इस सिद्धांत को झूठा तथा पवित्र और दिव्य धर्म-ग्रन्थ के विपरीत घोषित करने वाली, किताबों को प्रतिबंधित करने सम्बन्धी सूचकांक वाली “पवित्र मंडली” के द्वारा भी यह आदेश दिया था, कि एक इतना हानिकारक सिद्धांत पूरी तरह से ख़त्म हो जाये और यह कैथोलिक सच्चाई के गंभीर पूर्वाग्रह की और इशारा नहीं करे। और जैसाकि एक किताब यहाँ हाल ही में दिखाई दी है, जिसे पिछले वर्ष फ्लोरेंस में प्रकाशित किया गया है, जिसका शीर्षक दर्शाता है कि आप इसके लेखक है, इसका शीर्षक है: “महान वैश्विक प्रणाली पर गैलिलियो गैलिली का संवाद”; और जैसाकि पवित्र मंडली को इसके बाद सूचित किया गया कि कथित पुस्तक के ज़रिये धरती के गतिमान और सूर्य के स्थिर होने सम्बन्धी झूठे विचार को चर्चित किया गया है, और इसमें आप पर आरोपित की गई पूर्वकथित निषेधाज्ञा का एक सर्वविदित उल्लंघन पाया गया है, इसमें आपने कथित विचार की सत्यता का बचाव किया है जिस सिद्धांत की पूर्व में आपके सामने ही निंदा की गई थी और आपके सामने ही जिसे झूठा साबित किया गया था, हालांकि इस कथित पुस्तक में आपने विभिन्न विधियों से यह साबित करने की कोशिश की है कि आपने संभवतः शब्द का इस्तेमाल करते हुए यह विचार अनिश्चितता की दशा में छोड़ दिया है: जो कि तथापि सबसे गंभीर त्रुटि है, दैवीय धर्म-ग्रन्थ के विपरीत ऐसी बुद्धिमानी से न तो ऐसा कोई भी सिद्धांत संभव है और न ही परिभाषित किया जा सकता है। अतएव, हमारे आदेशानुसार आपकी बात इस पवित्र कार्यालय के समक्ष रखी गई, जहाँ प्रतिज्ञा लेने के बाद की गई जांच में, आपने स्वीकार किया कि इस पुस्तक को आपने ही लिखा और प्रकाशित किया है। आपने कबूल किया कि आपने कथित पुस्तक दस या बारह वर्ष पहले लिखना शुरू की थी, तब तक आप पर उपरोक्त निषेधाज्ञा थोपी जा चुकी थी; कि आपने उन्हें बिना सूचित किये इसे प्रकाशित करने के लिए जरूरी लाइसेंस की माँगा था जिन्होंने आपको यह आज्ञा दी थी कि आप किसी भी प्रकार से प्रश्नास्पद सिद्धांत से न तो कोई वास्ता रखेंगे, न इसका बचाव करेंगे, न इसे किसी को पढ़ाएंगे। इसी तरह आपने कबूल किया कि कथित पुस्तक की लिखावट तमाम स्थानों पर इस सांचे में है कि पाठक को ऐसा लगेगा, जैसे झूठी तरफ लाये गए तर्कों की गणना आस्था के दबाव में किये गए यकीन के द्वारा की गई है, बजाय इसके जिन्हें अस्वीकार करना आसान हो, इस तरह आपने खुद को एक त्रुटि के झांसे में आने से बचा लिया, आपने जैसे आरोप लगाये है, वह इस तथ्य के अनुसार आपके इरादों के बहुत विपरीत हैं, संवाद में लिखा गया इस प्रकार है जैसे प्राकृतिक शालीनता के द्वारा, इन्सान अपने अन्दर की बारीकियों का आदर करता हुआ और खुद को उपाय निकालने वाले साधारण इंसानों से बहुत अधिक चालाक दिखाता हुआ महसूस करता है, यहाँ तक कि वह झूठे प्रस्तावों, सरल और सत्याभासी तर्कों की तरफ से ही क्यों न हो! और आपको अपना प्रत्युत्तर तैयार करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, प्रत्युत्तर में आपने सर्व-प्रतिष्ठित लार्ड कार्डिनल बेलार्माइन का हस्तलिखित एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था, जैसा कि आपने दावा किया है कि यह (प्रमाणपत्र) आपने अपने दुश्मनों द्वारा किये गए झूठे अभियोग से खुद को बचाने के लिए खुद प्राप्त किया था, जिन्होंने आरोप लगाया था कि आपको पवित्र कार्यालय ने परेशान किया और आपको दण्डित किया, उस प्रमाणपत्र में यह ऐलान किया गया है कि पवित्र कार्यालय द्वारा आपको न तो परेशान किया गया है न ही आपको दण्डित किया गया है, लेकिन परमपावन पोप द्वारा जारी किये गये और सूचकांक वाली पवित्र मंडली द्वारा प्रकाशित ऐलान में तो केवल इतना ही (वर्णित) है कि पृथ्वी की गति और सूर्य की स्थिरता का सिद्धांत पवित्र धर्म-ग्रन्थ के विरुद्ध ही है और इसीलिए इसका बचाव नहीं किया जा सकता न ही इससे सहमत हुआ जा सकता है।  और, जैसा कि इस प्रमाणपत्र में निषेधाज्ञा वाले उन दो बिन्दुओं का कोई ज़िक्र नहीं है जो कि “शिक्षा नहीं देना” और “किसी भी प्रकार से” हैं, आपने दिखावा किया है कि हमें इस बात पर ज़बरदस्ती विश्वास करना चाहिए कि पिछले चौदह से सोलह वर्षों के समय की आपने अपनी सारी स्मरणशक्ति खो दी है और यह कि इसीलिए जब आपने कथित पुस्तक के प्रकाशन की अनुमति मांगी थी तब आपने निषेधाज्ञा का कोई जिक्र नहीं किया था। और आपने यह अपनी गलती के लिए माफ़ी की तरह नहीं माँगी बल्कि इसे द्वेष के बजाय किसी घमंड से भरी महात्वाकांक्षाओं के निचले स्तर वाली हरकत ठहराया जा सकता है। अपने बचाव में आपके द्वारा प्रस्तुत किया गया उनका प्रमाणपत्र सिर्फ आपके अपराध की गंभीरता को बढाता ही है, यद्यपि यह यहाँ वर्णित है कि  कथित मत पवित्र धर्म-ग्रन्थ के विरुद्ध है, इसके बावजूद आपने इसके बारे में वाद-विवाद किया और इसका बचाव किया और इसके संभव होने के पक्ष में तर्क दिए; आपको दिए गए लाइसेंस को आपके द्वारा कितना भी कलात्मक रूप से और कुटिलता से ऐंठा जाए, इससे आपको कुछ नहीं प्राप्त हो सकता, क्योंकि आपने दिए गए आदेशों का पालन नहीं किया है। और जैसाकि हमें ऐसा प्रतीत हुआ है कि आपने अपने इरादों के सम्बन्ध में पूरे सत्य का वर्णन नहीं किया है, हमने आपकी एक कठोर परीक्षा लेना जरूरी समझा (बिना किसी पूर्वाग्रह के, हालांकि, जिन मुद्दों को अपने कबूल किया है और उन्हें अपने कथित इरादों के सम्बन्ध में आगे किया है) जिसमें आपने एक अच्छे कैथोलिक की तरह वर्ताव किया। इसलिए आपके अभियोग के गुणों को देखते हुए और परिपक्वता से संज्ञान में लेते हुए, आपके कबूलनामों और पहले उद्घृत माफियों के साथ और जो कुछ भी न्याय के साथ देखा-सुना जाना चाहिए, उसको संज्ञान में लेते हुए, हम आपके खिलाफ इस अंतिम निर्णय पर पहुंचे है जो कि निम्न-लिखित है: इसलिए, ईश्वर जीसस क्राइस्ट और उनकी महान माँ चिर-कुमारी मेरी के नाम का आह्वान करते हुए, इस अंतिम निर्णय को लेने वाले, पवित्र धर्म-शास्त्र के श्रद्धेय विद्वानों और दोनों कानूनों के ज्ञाताओं और हमारे मूल्यान्कंकर्त्ताओं की सलाह और परामर्श के साथ, अभियोग में और जो अभियोग हमारे सामने प्रस्तुत किया गया, एक पक्ष के महाप्रतापी कार्लो सिंसेरी, दोनों नियमों के विशेषज्ञ इस पवित्र कार्यालय के प्रोक्टर फिस्कल, और दूसरे पक्ष यानि तुम्हारे गैलिलियो गैलिली, बचावकर्त्ता, जिसकी परीक्षा ली गई, जिसे आजमाया गया और जिसने ऊपर उद्घृत बातें क़ुबूल कीं, की उपस्थिति में हम यह लिखित ऐलान करते हैं- हम कहते हैं, मत व्यक्त करते हैं, निर्णय सुनाते हैं और यह ऐलान करते हैं कि तुम कथित गैलिलियो ने, मुक़दमे में प्रस्तुत किये गए मामलों और जो भी तुमने ऊपर क़ुबूल किया, के कारण इस पवित्र कार्यालय द्वारा दिए जाने वाले एक ऐसे सिद्धांत में विश्वास करने और उसका अनुगमन करने के अधर्म में दंड पाने के लिए खुद को सोंप दिया है- ऐसा सिद्धांत जो कि झूठा है और पवित्र, दैवीय धर्म-ग्रन्थ के खिलाफ है- कि सूर्य विश्व के केंद्र में है और पूरब से पश्चिम की और नहीं गति करता और धरती गतिमान है और विश्व का केंद्र नहीं है; और कि एक मत जिसे पवित्र धर्म-ग्रन्थ के खिलाफ करार दे दिये जाने के बाद भी पालन और बचाव किया गया। और कि उसके कारण आपने खुद पर आक्षेप और जुर्माना थोपना झेला और खुद को इस तरह के अपराधियों में सामान्य और विशेष, पवित्र कसौटियों और अन्य संविधानों के विरोधी में खुद को प्रसिद्ध कर लिया। हम इससे संतुष्ट हैं कि आप मुक्त हो जाओगे, बशर्ते, आप सबसे पहले निष्कपट हृदय और अडिग आस्था के साथ उपरोक्त गलतियों और अधर्मों को जीवन में लाने से पहले और अन्य सभी गलतियों और अधर्मों को, जो कि जिस किसी रूप में हमने तुम्हारे लिए निर्धारित किये हैं और  जो कैथोलिक और अपोस्तोलिक रोमन चर्च के खिलाफ हैं, उन्हें सशपथ त्यागो, उसने घृणा करो और उन्हें धिक्कारो। और यथाक्रम में कि आपकी यह गंभीर और घातक गलती और पाप पूर्णरूप से दण्डित किये बिना नहीं रहेगी और कि आपको भविष्य में और अधिक सावधान रहना चाहिए और आपको अन्य लोगों के लिए उदाहरण की तरह पेश आना चाहिए कि वे इस तरह के अपराध करने से परहेज करें, हमारा हुक्म है की “गैलीलियो गैलिली का संवाद” पुस्तक को राजाज्ञा के द्वारा निषिद्ध कर दिया जाये। हम आपको निंदा करते हुए इस पवित्र कार्यालय की जेल में भेजते हैं और उपयुक्त देह-दंड के द्वारा हम आज्ञा देते हैं कि तीन वर्षों के लिए आप हर सप्ताह सात पश्चाताप सूचक भजन गाने आयेंगे। उपरोक्त दंड और प्रायश्चित को पूरे या आंशिक रूप से नरमी देने, बदलने या ख़त्म कर देने की स्वतंत्रता हमारे पास सुरक्षित है। और इस प्रकार हम यह कहते हैं, अपना मत व्यक्त करते हैं, निर्णय देते हैं, घोषणा करते हैं, आज्ञा देते हैं और इस प्रकार और अन्य किसी भी बेहतर तरीके से, जिसके ज़रिये न्यायपूर्वक ढंग को नियोजित करने के अधिकार को अपने पास सुरक्षित करते हैं।   
हस्ताक्षर:
ऍफ़.कार्डिनल एस्कोली
बी.कार्डिनल गेस्सी
जी. कार्डिनल बेन्तिबोग्लियो
ऍफ़. कार्डिनल वेरोस्पी
फर.डी. कार्डिनल क्रेमोना
एम्. कार्डिनल गिनीटी
फर. आ. कार्डिनल एस. ओनोफ्रियो

इस निर्णय में तीन जजों ने हस्ताक्षर नहीं किये थे, हस्ताक्षर न करने वाले जज थे – फ्रांसेस्को बर्बेरिनी, केसपर बोर्जिया और लौडिवियो जेकशिया।

(Source:  Giorgio de Santillana, The Crime of Galileo (University of Chicago Press 1955), pp. 306-310.)

गैलीलियो का माफीनामा (22 जून, 1633)
(गैलीलियो द्वारा किये गए अपने पूर्व-मत के परित्याग का अंतिम और उपसंहार भाग)
Concluding portion of Galileo's Recantation (or Abjuration) 


मैं, गैलिलियो, पुत्र स्व.विनसेंजो गैलिली और फ्लोरेंटाइन, उम्र सत्तर साल, खुद को इस न्याय-पीठ के समक्ष अपराधी घोषित करता हूँ और आप, सर्व-प्रतिष्ठित और श्रद्धेय लार्ड कार्डिनलों, ‘सम्पूर्ण क्रिश्चियन राष्ट्रमंडल वाले विधार्मिक दुष्टता के खिलाफ जिज्ञासु पर्यवेक्षकों’ के समक्ष अपने घुटने टेकता हूँ, और पवित्र धर्म-सिद्धांत को अपने हाथों में लेकर अपनी आँखों के सामने रखते हुए यह कसम खाता हूँ, कि पवित्र कैथोलिक और अपोस्टोलिक चर्च के द्वारा जो भी सिखाया गया है, प्रवचन दिए गए हैं, और माना गया है उसपर मैंने हमेशा विश्वास किया है, अभी भी विश्वास करता हूँ और ईश्वर की सहायता से भविष्य में भी विश्वास करता रहूँगा। लेकिन जैसाकि—इस पवित्र कार्यालय द्वारा एक निषेधाज्ञा मुझपर न्यायिक रूप से इस प्रभाव के साथ आरोपित की गई है कि मुझे जरूरी तौर पर सम्पूर्ण रूप से इस झूठे मत का परित्याग कर देना चाहिए कि सूर्य विश्व के केंद्र में है और स्थिर है, और कि पृथ्वी विश्व के केंद्र में नहीं है और गतिमान है, और जब कि मुझे यह बताये जाने के बाद भी कि यह सिद्धांत पवित्र धर्म-ग्रन्थ के विपरीत है, मुझे निश्चित रूप से यह न तो मानना चाहिए था न ही इसका बचाव करना चाहिए था और न ही मौखिक न लिखित, किसी भी रूप में इस झूठे सिद्धांत की शिक्षा देनी चाहिए थी– मैंने एक पुस्तक लिखी और प्रकाशित की थी जिसमें मैंने इस नए सिद्धांत की विवेचना की है, जिसकी पहले ही आलोचना की जा चुकी है, और इसके पक्ष में बिना किन्ही उत्तरों को पेश किये अत्यधिक यकीन वाले तर्क प्रस्तुत किये हैं, इस कारण से पवित्र कार्यालय के द्वारा मुझे अधर्म करने वाला उग्र संदिग्ध बताया गया है, यह मानने और विश्वास करने के लिए कि सूर्य स्थिर और विश्व के केंद्र में हैं और यह कि पृथ्वी विश्व के केंद्र में नहीं है और घूमती है, यह कहना है कि:
अभी मेरे खिलाफ ध्यान में आये इस उग्र संदेह को अपने निष्कपट ह्रदय और अडिग आस्था के साथ आप सर्व-प्रतिष्ठितों और सभी आस्थावान ईसाइयों के दिमागों से निकाल फेंकने की इच्छा करते हुए, मैं शपथ-पूर्वक इन गलतियों, अधर्मों और मत को त्यागता हूँ, धिक्कारता हूँ और इनसे घृणा करता हूँ जो भी कथित पवित्र चर्च के विपरीत हैं, और मैं कसम खाता हूँ कि भविष्य में मैं अपने बारे में इस प्रकार के किसी अन्य संदेह को तैयार करने वाली किसी भी बात को मौखिक या लिखित रूप से न ही कहूँगा न ही तर्क दूंगा; कि जैसे ही मुझे किसी अमुक अधर्म या अधर्म के संदेहास्पद व्यक्ति का पता चलेगा, मैं उसकी इस पवित्र कार्यालय में, या जिज्ञासुओं या साधारण लोगों के स्थान पर, जहाँ भी मैं होऊंगा, उनकी निंदा करूँगा। इसके आगे, मैं यह भी कसम खाता हूँ और वादा करता हूँ कि जो भी दंड मुझपर पवित्र कार्यालय द्वारा थोपे जायेंगे, मैं उन्हें पूरी ईमानदारी और अखंडता से पूरा करूँगा और स्वीकार करूँगा। और, इनमें से किसी भी कसम अथवा वादे की मेरे द्वारा अवहेलना करने की स्थिति में (ईश्वर माफ़ करे), मैं इस तरह के अपराधों के खिलाफ, पवित्र कसौटियों और अन्य संविधानों के द्वारा आरोपित और प्रवर्तित सभी दुखों और दंडों के लिए खुद को समर्पित करता हूँ। अतः हे ईश्वर और यह पवित्र धर्म-शास्त्र, जिन्हें मैंने अपने हाथों से छुआ है, मेरी सहायता कीजिए।
मैं, कथित गैलिलियो गैलिली, दृढ़ता से परित्याग करता हूँ, शपथ लेता हूँ, वादा करता हूँ और खुद को उपरोक्त से बाँधता हूँ; और सत्य की गवाही में मैंने अपने हाथ से अपने इस परित्याग सम्बन्धी वर्तमान दस्तावेज की को स्वीकारा है, और बाईस जून, 1633 को रोम के “मिनर्वा सम्मलेन” में शब्द-दर-शब्द इसे पढ़ रहा हूँ।
मैं, गैलिलियो गैलिली, स्वयं उपरोक्त को शपथ पूर्वक त्याग चुका हूँ।
  
 [गैलिलियो का परित्याग दो बिन्दुओं को शामिल नहीं करता जो कार्डिनल्स द्वारा उन्हें दिए गए परित्याग की वास्तविक विधि में शामिल थे. इन दो बिंदुओं का गैलिलियो ने यह कहते हुए विरोध किया था कि इन्हें स्वीकार करने से यह सिद्ध हो जायेगा कि वह एक अच्छा कैथोलिक नहीं था और यह कि उन्होंने उस पुस्तक को प्रकाशित करके दूसरों को धोखा दिया था।] 

Source:  Giorgio de Santillana, The Crime of Galileo (University of Chicago Press 1955), pp. 312-313.
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