कविताएँ: बृजेश पाण्डेय 'बृजकिशोर'

बृजेश पाण्डेय 'बृजकिशोर'

कृषक धीर

ओ श्रमवीर! ओ श्रमवीर!
भारत देश के कृषक धीर!

आतप वर्षण शीत सह
गाते ऋतुओं के गीत छह
व्यक्त नहीं करते पीर।
ओ श्रमवीर! ओ श्रमवीर!
भारत देश के कृषक धीर!

कर जाते क्षेत्र हरा भरा
प्रस्वेद प्रवाह बहा बहा
आस रहती सदा नीर।
ओ श्रमवीर! ओ श्रमवीर!
भारत देश के कृषक धीर!

धूलों का संघर्षण सह
कीचड़ का अनुलेपन वह
नहीं हुए फिर भी अधीर।
ओ श्रमवीर! ओ श्रमवीर!
भारत देश के कृषक धीर!

तुषारापात या झंझावात
बहता हो लू का गर्मवात
डटे रखवाली में महावीर।
ओ श्रमवीर! ओ श्रमवीर!
भारत देश के कृषक धीर!

पड़ा बार कितनी अकाल
फिर भी हुए नहीं निराश
आशा में रहे सदा गम्भीर।
ओ श्रमवीर! ओ श्रमवीर!
भारत देश के कृषक धीर!

क्योंकि वह माँ होती है।

माँ ममतामयी कलश है, ममत्व भरा उसमें जल है।
उसकी ममता में गम्भीरता है वारिधि से गुरुता  है।
अभावों में भी कल्पवृक्ष है, मरुभूमि में वटवृक्ष  है।
वह हमारी सफलता के उत्कर्ष की पहली पायदान है।
वह शक्ति पुंज है, वह राग है, वह सर्वप्रथम ॐकार है।

क्योंकि वह माँ होती है।
माँ की बड़ी मजबूरी उसकी ममता होती है।
फूल हमारे लिए चुन खुद काँटों पर सोती है।
जिस बदौलत बेबस और लाचारी में रोती है।
खुद जगती रातों को पर बच्चों को नींद प्यारी देती है।
कितना भी अपमान मिले पर वो क्रोधित नहीं होती है।

क्योंकि वह माँ होती है।
वह मौन हो दुःख पीती है और भी रोती है।
जब जब धिक्कारित और झिड़की जाती है।
कामधेनु सी वह तुम्हारी इच्छा पूर्ति करती है।
पर अपनी हर इच्छा के लिए आज तरसती रहती है।
फिर भी कभी वह तुम्हारा बुरा नहीं  सोचा करती है।

2 comments :

  1. प्रतिष्ठित पत्रिका "सेतु हिन्दी" के सम्पादक मंडल को साभार हार्दिक धन्यवाद देता हूँ, इस पत्रिका में मेरी एक साथ दो रचनाएँ प्रकाशित होने पर अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ।
    हिन्दी साहित्य की सेवा हेतु सम्पादक मंडल को हार्दिक बधाई।
    ---बृजेश पाण्डेय 'बृजकिशोर'

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  2. बृजेश पाण्डेय 'बृजकिशोर'July 6, 2018 at 5:49 PM

    प्रतिष्ठित पत्रिका "सेतु हिन्दी" में मेरी दो रचनाएँ एक साथ प्रकआप्र हओहो पर मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ। मैं सम्पादक मंडल का आभार व्यक्त करता हूँ।
    हिन्दी की सेवा करने हेतु उन्हें हार्दिक बधाई।
    बृजेश पाण्डेय 'बृजकिशोर'

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