व्यंग्य: वे ब्यूटीफुल थीं

धर्मपाल महेंद्र जैन

बिंदास: धर्मपाल महेंद्र जैन

वे सुंदर दिखने के लिए कई शल्य-क्रियाएँ करवा चुके हैं। अब उनका मुँह चाँद जैसा हो गया है, टेढ़ा। पहले मुझे लगता था वे राजनेता हैं, इसलिए सीधे मुँह बात नहीं करते। पिछले चुनाव में उनकी जमानत ज़ब्त हो गई पर मुँह टेढ़ा ही रहा, तब लगा यह नीतिगत मामला है। वे मुझे आज सौंदर्य क्लिनिक में मिल गए। मैंने पूछा, 'आप अब उद्घाटन करने आए हैं?' सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि राजनेता के पास उद्घाटन करने का समय नहीं हो तो जनता ख़ुद उद्घाटन कर ले। इसलिए क्लिनिक का उद्घाटन पाँच महीने पहले ही हो गया। वे कहने लगे, 'शर्मिंदा न करें, चेहरे की सर्जरी के लिए कंसल्टेशन है। सर्जरी कराने में बड़ा जोखिम है। पर क्या करूँ, टिकट पाना है, युवा वोटरों को रिझाना है।'  दिमाग़ भले सठिया जाए, चेहरा युवा दिखना चाहिए।

राजनेता कॉस्मेटिक सर्जन से उलझ रहे थे तो डॉक्टर उन्हें समझाने लगा 'सर, हम सुंदर लोगों को और सुंदर बना सकते हैं सर। हम बंदर के चेहरे को आदमी का थोड़े ही बना सकते हैं। हमारे प्रोफेसर को माइकल जैक्सन की नाक बराबर करने में दस सर्जरी करना पड़ी थीं, आपके तो पूरे मुँह का मामला है। हम आपको दुनिया का सबसे हैंडसम राजनेता बना सकते हैं, कनाडा के प्रधानमंत्री जैसा। हमें अलग-अलग एंगल से कई बार ट्राय करना पड़ेगा। आप फीस जमा करा दें, और एक-दो तारीख एडवांस में ले लें।’

वे रिसेप्शनिस्ट के पास पहुँच गए। काउंटर पर इतनी सुंदर युवती को देख कर हर कोई डॉक्टर का मुरीद हो जाये। वह जिस भी एंगल से आँख उठा कर देखती है, आगंतुक को घायल कर देती है। जिस शालीनता से उसके होंठ खुलते हैं और वह सर्जरी की कार्यपद्धति समझाती है, 'डेट' बुक करने का आपका मन बन जाता है। वह एक अधेड़ पुरुष को बता रही थी कि डॉक्टर के दादाजी ने देवानंद के चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी कर उन्हें सदाबहार हीरो बना दिया था। अब वह बुजुर्ग अपनी नाक पतली कराने के लिए 'डेट' बुक कर रहा है।

सौंदर्य क्लिनिक पर बहुत भीड़ है, कार पार्किंग के लिए जगह बिल्कुल नहीं है। सुंदर लोग अधिक  सुंदर दिखने को उतावले हैं। वे देश की आर्थिक स्थिति और अपनी सुंदरता की वर्तमान स्थिति से असंतुष्ट हैं। जब भी अपने से अधिक सुंदर व्यक्ति को देखते हैं, वे आत्म ग्लानि से भर जाते हैं। मन मसोस कर रह जाते हैं कि काश वे स्विट्ज़रलैंड में जन्मे होते, काश इंटरनेट पर पढ़-पढ़ कर वे भी 'सिक्स-पैक' बना पाते। काश, ऐसी कचौड़ी या चाट बनती जो उनके पेट को रामदेव जी जैसा अवतल बना देती। काश, फेयर एंड लवली के बारे में उनकी मम्मी को पता होता।

इस युग में तन, तनतनाट होना चाहिए। मन कितना भी मैला हो कौन देखता है। अधिकांश सफल पत्रिकाएँ सुविचार वाले कॉलम में त्वचा निखारने के दस घरेलू नुस्खे छाप रही हैं। आपने शिशु-गधे को देखा होगा, चमकदार, श्वेत, रेशमी-मुलायमी। वह जैसे-जैसे बड़ा होता है, गधा बनता जाता है। वह सुंदर-असुंदर के फेर में नहीं पड़ता, गधा ही रहता है। आदमी और गधे में यही मूल अंतर है। आदमी, आदमी बने या न बने, वह सुंदर बनना चाहता है, शिशु-गधा बनना चाहता है। यहाँ आदमी शब्द में पुरुष और महिलाएँ दोनों व्यक्त हैं। हालांकि सौंदर्य-चेतना के मामले में पुरुष, महिलाओं के अनुचर हैं, पर वे महिलाओं से बहुत पीछे हैं, वे जन्म-जात 'स्लो' जो ठहरे। बाहर जाते समय महिलाओं को वस्त्र बोझिल लगते हैं इसलिए वह उन्हें कम से कम धारण करती हैं, पर दर्पण और टच-अप सामग्री उन्हें कभी बोझिल नहीं लगतीं। पुरुष है कि उसे ख़ुद का थोबड़ा समझ ही नहीं आता, वह हमेशा दूसरों को ताड़ता रहता है और लाइन मारने की भूमिका घड़ता रहता है।

क्लिनिक के हॉल में एक अभिनेत्री का नाम गूंजा तो कई लोग रिसेप्शनिस्ट को देखने लगे। लगा अब कोई नया सत्य उद्घाटित होने वाला है। अभिनेत्रियों के वेटिंग रूम से लगा कर बेडरूम की हर हलचल लोगों के लिए 'ब्रेकिंग-न्यूज़' होती हैं। खरबों रुपयों के घपलों की खबर सुन कर हमारे कानों पर जूं नहीं रेंगती। अभिनेत्री को ज़ुकाम होने का ट्विट देख कर हम उदास हो जाते हैं। शूटिंग के दौरान अभिनेत्री की चप्पल टूट जाए तो डॉक्टर दौड़ पड़ते हैं,  लेकिन ब्रिज टूटने पर बस नदी में कूद जाए तो लोग सेल्फी ले कर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझते हैं। सरकार को कोई कोसे तो  भी सरकार 'सरकाज्म' को लोरी समझती है तथा अधिक गहरी नींद में सो जाती है। ऐसे में चुलबुली अभिनेत्री की नाक या होंठ 'फिक्स’ कराने की बात उठी तो हमारे कान खड़े हो गए। रिसेप्शनिस्ट ने देवीजी को दाना डाल दिया था। उसने रिसेप्शनिस्ट से सकुचाते हुए पूछा -'आप जैसा दिखने के लिए मुझे कितनी बार सर्जरी कराना पड़ेगी? रिसेप्शनिस्ट ने कंधे उचकाते हुए कहा - मुझे क्या मालूम, आई डोंट नो।

देवी ने रिसेप्शनिस्ट से सही प्रश्न किया था, जो कई सुंदरियाँ नहीं करती। बहुत सर्जरियाँ कराने के बाद भी उन्हें तृप्ति नहीं हुई कि वे पर्याप्त सुंदर हैं! हर कॉस्मेटिक सर्जरी के बाद उन्होंने खुद से कहा होगा, बस एकदम लास्ट! सर्जरी का यह मायाजाल एक दिन इतना फैला कि उनसे बड़ा हो गया। मेरी आँखों में सौंदर्य परी घूमने लगीं। एक सर्जरी गलत हो गई तो वे परलोक चली गईं। वे ब्यूटीफुल थीं, कॉस्मेटिक सर्जरी ने उन्हें अंग्रेज़ी में 'फूल' बना दिया।
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1 comment :

  1. व्यंग्य चुटीला है।बधाई।

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