साक्षात्कार: प्रेमचंदजी से बातचीत - बनारसीदास चतुर्वेदी

आप आ रहे हैं, बड़ी खुशी हुई। अवश्य आइये। आपसे न जाने कितनी बातें करनी हैं। मेरे मकान का पता है - बेनिया बाग में तालाब के किनारे लाल मकान। किसी इक्केवाले से कहिये, वह आपको बेनिया पार्क पहुँचा देगा। पार्क में एक तालाब है जो अब सूख रहा है। उसी के किनारे मेरा मकान है। लाल रंग का, छज्जा लगा हुआ, द्वार पर लोहे की फेंसिंग है, अवश्य आइये।
- धनपतराय

प्रश्न - हिंदी कहानी लेखन की वर्तमान प्रगति कैसी है? क्या वह स्वस्थ तथा उन्नतिशील मार्ग पर है?

उत्तर - प्रगति बहुत अच्छी है। यह सवाल ऐसा नहीं कि इसका जवाब आफहैंड दिया जा सके।

प्रश्न - नवयुवक कहानी लेखकों में सबसे अधिक होनहार कौन है?

उत्तर - जैनेंद्र तो हैं ही और उनके विषय में पूछना ही क्या है? इधर श्री वीरेश्वर सिंह ने कई अच्छी कहानियाँ लिखी हैं। बहुत उँचे दर्जे की कला तो उनमें अभी विकसित नहीं हो पाई, पर तब भी अच्छा लिख लेते हैं। बाज-बाज कहानियाँ तो बहुत अच्छी हैं। हिंदू विश्वविद्यालय के ललित किशोर सिंह भी अच्छा लिखते हैं। श्री जनार्दन झा द्विज में भी प्रतिभा है।

प्रश्न - विदेशी कहानियों का हमारे लेखकों पर कहाँ तक प्रभाव पड़ा है?

उत्तर - हम लोगों ने जितनी कहानियाँ पढ़ी हैं, उनमें रसियन कहानियों का ही सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। अभी तक हमारे यहाँ 'एडवेंचर' (साहसिकता) की कहानियाँ हैं ही नहीं और जासूसी कहानियाँ भी बहुत कम हैं। जो हैं भी, वे मौलिक नहीं हैं, कानन डायल की अथवा अन्य कहानी लेखकों की छायामात्र है। क्राइम डिटैक्शन की साइंस का हमारे यहाँ विकास ही नहीं हुआ है।

प्रश्न - संसार का सर्वश्रेष्ठ कहानी लेखक कौन है?

उत्तर - चेखव।

प्रश्न - आपको सर्वोत्तम कहानी कौन जँची?

उत्तर - यह बतलाना बहुत मुश्किल है। मुझे याद नहीं रहता। मैं भूल जाता हूँ। टाल्सटॉय की वह कहानी, जिसमें दो यात्री तीर्थयात्रा पर जा रहे हैं, मुझे बहुत पसंद आई। नाम उसका याद नहीं रहा। चेखव की वह कहानी भी जिसमें एक स्त्री बड़े मनोयोगपूर्वक - अपनी लड़की के लिए - जिसका विवाह होने वाला है, कपड़े सी रही है, मुझे बहुत अच्छी जँची। वह स्त्री आगे चलकर उतने ही मनोयोग पूर्वक अपनी मृत पुत्री के कफन के लिए कपड़ा सीती हुई दिखलाई गई है। कवींद्र रवींद्रनाथ की 'दृष्टिदान' नामक कहानी भी इतनी अच्छी है कि वह संसार की अच्छी से अच्छी कहानियों से टक्कर ले सकती है।

प्रश्न - 'काबुलीवाला' के विषय में आपकी क्या राय है?

उत्तर - निस्संदेह वह अत्युत्तम कहानी है। उसकी अपील यूनिवर्सल है, पर भारतीय स्त्री का भाव जैसे उत्तम ढंग से 'दृष्टिदान' में दिखलाया गया है, वैसा अन्यत्र शायद ही कहीं मिले। मोपासां की कोई-कोई कहानी बहुत अच्छी है, पर मुश्किल यह है कि वह 'सैक्स' से ग्रस्त है।'

प्रेमचंदजी टाल्सटॉय के उतने ही बड़े भक्त हैं जितना मैं तुर्गनेव का। उन्होंने सिफारिश की कि टाल्सटॉय के अन्ना कैरेनिना और 'वार एंड पीस' शीर्षक पढ़ो। पर प्रेमचंदजी की एक बात से मेरे हृदय को एक बड़ा धक्का लगा। जब उन्होंने कहा - टाल्सटॉय के मुकाबले में तुर्गनेव अत्यंत क्षुद्र हैं तो मेरे मन में यह भावना उत्पन्न हुए बिना न रही कि प्रेमचंदजी उच्चकोटि के आलोचक नहीं। संसार के श्रेष्ठ आलोचकों की सम्मति में कला की दृष्टि से तुर्गनेव उन्नीसवीं शताब्दी का सर्वोत्तम कलाकार था। मैंने प्रेमचंदजी से यही निवेदन किया कि तुर्गनेव को एक बार फिर पढ़िए।
धरोहर

कहानी लेखकों तथा कहानी लेखन कला के विषय में प्रेमचंदजी से बहुत देर तक बातचीत हुई। उनसे पूछने के लिए मैं कुछ सवाल लिखकर ले गया था। पहला सवाल यह था, ''कहानी लेखन कला के विषय में क्या बतलाऊँ? हम कहानी लिखते हैं, दूसरे लोग पढ़ते। दूसरे लिखते हैं, हम पढ़ते हैं और क्या कहूँ?'' इतना कहकर खिलखिलाकर हँस पड़े और मेरा प्रश्न धारा-प्रवाह अट्टहास में विलीन हो गया। दरअसल बात यह थी कि प्रेमचंदजी की सम्मति में वे सवाल ऐसे थे, जिन पर अलग-अलग निबंध लिखे जा सकते हैं।
 - बनारसीदास चतुर्वेदी

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