मेरी प्यारी छोटी सी बिल्ली

मेहेर वान

- मेहेर वान

सन 1875 में आज के सर्बिया में जन्मी मिलवा मेरिक सन 1896 में पोलिटेक्निक की पढाई करने ज्यूरिक (स्विट्जरलैंड) चली आयीं जहाँ आइन्स्टीन से उनकी मुलाकात हुई। यहाँ आइन्स्टीन उनके सहपाठी थे और उनसे चार साल छोटे थे। वे पूरी कक्षा में अकेली लड़की थीं। मिलेवा एक तेज़-तर्रार छात्रा थीं। जल्दी ही उनकी और आइन्स्टीन की गहरी मित्रता हो गई जो कि जल्दी ही प्यार में बदल गई। भौतिकी में मिलेवा के अंक आइन्स्टीन के लगभग बराबर ही आते थे मगर वह अंतिम साल (सन 1900) में गणित में असफल हो गईं। इसके बाद सन 1901 में गर्भवती हो जाने के कारण मिलेवा की पढ़ाई में व्यवधान आया जिसका कारण भी आइन्स्टीन ही थे। जब वह डिप्लोमा की पुनःपरीक्षा में बैठीं तो वह तीन माह की गर्भ-वती थीं। इस परीक्षा में भी उनके अंकों में सुधार न हो सका और वह असफल रहीं। उन्होंने अपने डिप्लोमा सम्बन्धी शोधकार्य को भी बीच में ही छोड़ दिया जिसे वह डॉक्टरेट की डिग्री में तब्दील करना चाह रही थीं। यह शोधकार्य वह भौतिकी के जाने-माने प्रोफ़ेसर हेनरिक वेबर के दिशानिर्देशन में कर रही थीं। इससे प्रोफेसर हेनरिक वेबर नाराज हो गए थे।

यह प्रेम-पत्र आइन्स्टीन ने मिलवा को सन 1901 में इटली के मिलान शहर से लिखा था जहाँ वह अपने लिए एक असिस्टेंट की नौकरी खोज रहे थे। उस समय आइन्स्टीन के पास किसी भी देश की नागरिकता नहीं थीं क्योंकि उन्होंने सन 1896 में जर्मनी की नागरिकता त्याग दी थी तब से वह बिना नागरिकता के ही विभिन्न देशो में रह रहे थे।

कहने को तो यह एक प्रेम-पत्र है लेकिन चूँकि यह आइन्स्टीन का प्रेम-पत्र है इसलिए इसमें भौतिकी का होना स्वाभाविक और लाजिमी है।

इस पत्र में सापेक्ष-गति के काम का ज़िक्र करते हुए आइन्स्टीन ने “हमारे” शब्द का ज़िक्र किया है इस कारण से कुछ विज्ञान-इतिहासकारों ने यह कयास लगाया था कि आइन्स्टीन के सापेक्ष-वाद के काम में मिलेवा का भी कुछ योगदान रहा होगा, जिसे आइन्स्टीन ने कभी स्वीकार नहीं किया। हालांकि कई विज्ञान-इतिहासकार अन्य तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर ऐसा मानते हैं कि आइन्स्टीन के सापेक्ष-वाद के सिद्धांत में मिलेवा का कोई योगदान नहीं था।

सन 1903 में आइन्स्टीन और मिलेवा ने शादी कर ली थी।     

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मिलान, बुधवार (27 मार्च, 1901)

मेरी प्यारी छोटी सी बिल्ली,

तुम्हारे पत्रों और उनमें समाहित सम्पूर्ण सच्चे प्यार के लिए बहुत शुक्रिया। प्रिय, तुम्हारे सच्चे प्यार के लिए, मैं तुम्हें पूरे दिल से चुम्बन देता हूँ और तुम्हें गले से लगाता हूँ, ठीक उसी तरह जैसे तुम चाहती हो, और ठीक उसी तरह जिसके तुम लायक हो। (प्रोफ़ेसर) रिकी की अस्वीकृति ने मुझे चौंकाया नहीं, और मुझे पूरी तरह से यकीन है कि इसके लिए (प्रोफ़ेसर) वेबर दोषी है। उसके द्वारा क्षमा किया जाना बहुत ही असंभव है, और उसने कोई दूसरी स्थिति के बारे में एकदम ज़िक्र नहीं किया है। 

मुझे यकीन है कि इस परिस्थिति में किन्हीं अन्य प्रोफेसर्स को (पीएचडी के लिए) लिखने का कोई मतलब नहीं है। क्योंकि वे निश्चित रूप से किसी न किसी बिंदु पर मेरे बारे में जानकारी के लिए प्रोफ़ेसर वेबर से पूछताछ करेंगे, और वह बस मेरे बारे में एक बार फिर खराब सिफारिश ही देगा। मैं म्यूनिख और अराऊ में पुराने प्रोफेसरों की और रुख करूँगा, लेकिन सबसे पहले मैं इटली में असिस्टेंट का पद हासिल करने की कोशिश करूँगा। शुरुआती स्तर पर एक बाधा यहाँ अनुपस्थित है जो कि सभी बड़ी बाधाओं में एक है, और वह है यहूदी होना यानि सामिवाद, यह जर्मन भाषा वाले देशों में उतनी ही अप्रिय है जैसे कि वह एक बड़ी रुकावट हो। दूसरी बात यह है कि यहाँ मेरी बहुत अच्छी जान-पहचान है। उदाहरण के तौर पर, स्थानीय पोलिटेक्निक में रसायनशास्त्र के प्रोफ़ेसर का एक बहुत अच्छा दोस्त हेर एन्शबाषर है, मिशेल के चाचा भी यहीं गणित के प्रोफ़ेसर हैं। यह सच है कि मिशेल एक बहुत ही भद्दा बेवक़ूफ़ और अजूबा इंसान है, लेकिन मैं उसकी कॉलर पकड़कर घसीटता हुआ उसके चाचा के पास ले जाऊँगा, और वहाँ मैं खुद उनसे बातचीत करूँगा। मिशेल इस समय अपनी पत्नी और बच्चे के साथ ट्रीस्ट (इटली) वाले अपने पैतृक घर में है, और वह अभी लगभग दस दिन तक और वापस नहीं आएगा। तुम्हें उसे मेरे बारे में अथवा अपने बारे में भी कुछ मत कहने और मेरी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। तुम मेरे लिए एक तीर्थस्थान/दरगाह हो और हमेशा रहोगी जिसकी पहुँच किसी और के पास नहीं है; मैं यह भी जानता हूँ कि अन्य सभी लोगों की तुलना में तुम मुझसे सर्वाधिक प्रेम करती हो, और सबसे बेहतर तरीके से मुझे समझती हो। मैं तुम्हें भरोसा दिलाता हूँ कि यहाँ तुम्हारे बारे में बुरा-भला कहने की न तो किसी की हिम्मत होगी और यहाँ तक कि न ही कोई ऐसा करना चाहेगा। मुझे कितनी अधिक खुशी और गर्व महसूस होगा, जब हम यहाँ साथ होंगे और सापेक्ष-गति वाले अपने काम को सफलतापूर्वक एक निर्णायक स्थिति में ला सकेंगे। दूसरे लोगों के सामने, मैं सच में इस बात का महिमामंडन कर पाऊंगा कि तुम कितनी विशेष हो!

पिछली एक शाम, मिशेल का निदेशक, जिससे हमारी अच्छी पहचान है, कुछ संगीत बजाने यहाँ आया था। उसने हमें बताया कि असाधारण रूप से विस्तृत ज्ञान के बावजूद, मिशेल कैसे पूरी तरह से बेकार और करीब-करीब असंतुलित है। यह छोटी सी कहानी बहुत ही रोचक है जिसे मैं अभी बताऊंगा, जिसकी सच्चाई का ज़िम्मा इस तथ्य से लिया जा सकता है कि जिसने मुझे यह बात बताई है वह यह जानता है कि मैं और मिशेल अच्छे दोस्त हैं, और वह यह भी समझता है कि इस बात का ज़िक्र मैं वापस मिशेल से कर सकता हूँ...। एक बार फिर, मिशेल के पास करने को कुछ भी नहीं है। उसके मैनेजर ने उसे कैसले पावर स्टेशन में बिछाई गई नयी पावर लाइनों के परीक्षण और जांच के लिए भेजा था। हमारे हीरो ने निर्णय लिया कि निश्चित रूप से वह अपना महत्वपूर्ण समय बचाने के लिए शाम की ट्रेन पकड़ेगा, लेकिन दुर्भाग्यवश उसकी ट्रेन छूट गई। अगले दिन उसे दिया गया यह काम देरी से याद आया। तीसरे दिन वह स्टेशन पर एकदम सटीक समय पर पहुँच गया, लेकिन डर की इन्तहा तो तब हो गई जब उसे महसूस हुआ कि उसे यह भी भूल गया है कि उसे वहाँ जाकर करना क्या है? उसने तुरंत अपने कार्यालय को एक तार भेजा कि उसे दिशा-निर्देश फैक्स कर दिए जाएँ। मुझे नहीं लगता कि यह लड़का सामान्य है। 

    विशिष्ट ऊष्मा के सवाल पर, जो कि परस्पर तापमान और विकिरण प्रक्रिया से सम्बंधित है, मैं अब बहुत आसान निष्कर्षों पर पहुँचा हूँ, जो कि शायद उन प्रयोगों द्वारा भी सत्यापित हो सकते हैं जो कि पहले से ही सफलतापूर्वक संपन्न किये जा चुके हैं। मान लो, कि कोई एक तरंग Ieax किसी एक निश्चित तरंगदैर्ध्य के साथ +x की दिशा में अग्रसर है, जहाँ I का मान एक निश्चित संख्या है। इसके बाद, मान लो कि एक इकाई आयतन में N संख्या वाले विकिरण अनुनादक (परमाणु) उपस्थित हैं। तब अल्फ़ा/N का मान पदार्थ के व्यवहार से स्वतन्त्र होगा और सिर्फ तापपान पर रैखिक रूप से निर्भर होगा। तब अल्फ़ा/N का मान घातु की प्रकृति से स्वतन्त्र फलन होकर इस प्रकार लिखा जा सकेगा...।

ऐसे स्थिति में किसी को सबसे पहले यह जाँचना होगा कि क्या अल्फ़ा का मान परावर्तित प्रकाश सम्बन्धी प्रयोगों के द्वारा ज्ञात किया जा सकता है और इस सम्बन्ध में पहले से ही किये गए प्रयोगों का इस प्रश्न का हल ज्ञात करने लिए किस हद तक इस्तेमाल में लाये जा सकते हैं। मैं इस दिशा में अपने तरीके से काम करने की इच्छा की आग में जल रहा हूँ, क्योंकि मुझे आशा है कि इस तरह से गुप्त ऊष्मा के व्यवहार को समझने की दिशा में आगे की ओर एक असाधारण कदम रखा जा सकता है। तुम यह जांचना मत भूलना कि कांच किस हद तक ड्युलोंग-पेटिट के नियम के अनुसार व्यवहार करता है।

तुम कुछ समय के लिए मेरा साथ दो। बाद में हम कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेंगे कि इसके साथ क्या किया जाये। यदि मुझे कोई नौकरी मिल जाती है तो हम जरूर गर्मियों में किसी छोटी सी यात्रा पर निकल पायेंगे। आओ हम बेहतर की आशा करें।

मेरी प्यारी छोटी सी उबली हुई पकौड़ी, 
तुम्हारे अलबर्ट को ओर से शुभकामनायें और गर्मजोशी भरे चुम्बन
तुम्हारे स्पे वाले अपार्टमेन्ट में सब कैसा चल रहा है?

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2 comments :

  1. गज़ब ... अगली किश्त का इंतज़ार रहेगा !

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