प्रबोध गोविल को सृजन साहित्य सम्मान

श्रीगंगानगर।

वरिष्ठ साहित्यकार प्रबोध कुमार गोविल ने कहा है कि साहित्य में अनुवाद का काम बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें अनुवादक दोनों भाषाओं में रचना को जीता है, तभी उसका काम सार्थक हो पाता है।

वे रविवार को सृजन सेवा संस्थान के मासिक कार्यक्रम "लेखक से मिलिए" के अंतर्गत तनिष्क के सभागार में लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि कोई रचना आपको पसंद आए तो वह दूसरी जगह भी पसंद की जाए। जगह और स्थिति के साथ पाठक रचना के साथ कितना जुड़ पाया है, यह भी रचना की पसंद-नापसंद के लिए निर्भर करता है।

गोविल ने इस मौके पर अपनी कहानी "गोर्की देव का मुरब्बा" सुना कर श्रोताओं की वाह वाही लूटी। उन्होंने कुछ कविताएं और लघुकथाएँ भी सुनाई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मनोहर बाल मंदिर शिक्षण संस्थान के चेयरमैन छगनलाल शर्मा ने कहा कि क्षेत्र में साहित्यिक गतिविधियों से यहां अच्छा माहौल बन रहा है। विशिष्ट अतिथि श्री अतुलित बल धाम के अध्यक्ष मनमोहन गोयल ने गोविल की रचनाओं की प्रशंसा की। सृजन के सचिव कृष्ण कुमार आशु ने गोविल का परिचय दिया।

इस मौके पर गोविल को शाल ओढ़ा कर, सम्मान प्रतीक व साहित्य भेंट करके "सृजन साहित्य सम्मान" प्रदान किया गया। मंच संचालन कार्यक्रम संयोजक डा. संदेश त्यागी ने किया। इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार गोविंद शर्मा,  आरसी गुप्ता, दीनदयाल शर्मा, मदन अरोड़ा, भूपेंद्र सिंह, अरुण शहैरिया ताइर, सुरेंद्र सुंदरम, ऋतु सिंह, सुमन आहुजा, बन्नी गंगानगरी, सुरेश कनवाड़िया सहित अनेक साहित्यकार मौजूद थे।

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