वस्तुओं का अंतर्जाल: कैसे इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स से हमारी दुनिया बदल रही है

- साहिल गुप्ता

ड्यूक विश्वविद्यालय में बेचलर के छात्र। कंप्यूटर साइंस में बैचलर्स ऑफ़ साइंस के दूसरे साल में। राष्ट्रीय स्तर के बॉलीवुड नर्तक और फाइनेंस क्लब के प्रधान। पढ़ाई के साथ एक आई. ओ. टी. (IoT) कंपनी में कार्यरत।


ड्यूक विश्वविद्यालय में मैं बैचलर्स ऑफ़ साइंस के दूसरे साल में हूँ। मैंने पहले बहुत सोचा कि मैं क्या पढ़ना चाहता हूँ। क्योंकि ड्यूक के पास बहुत सारे अच्छे विकल्प थे और  मेरे लिए यह निर्णय मुश्किल था। उसी समय मैंने इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT = आईओटी) की कंपनी में काम करना शुरू किया। इसी दौरान मुझे आईओटी में दिलचस्पी पैदा हुई। .

जब मैं लोगों को बताता हूँ कि मैं आईओटी कंपनी के लिए काम करता हूँ,तो लोग मुझसे इसके बारे में बहुत से सवाल पूछते हैं। इसके लिए लोगों को समझना पड़ेगा कि आईओटी क्या है और इसमें किस तरह के बदलाव आ रहे हैं।

आईओटी क्या है

जब हम किसी वस्तु को इंटरनेट से जोड़ते हैं, तो वह आईओटी बन जाती है। जब यह वस्तु इंटरनेट से जुड़ी हुई होती है, तो हम कोई भी जानकारी कहीं भी भेज सकते हैं और प्राप्त कर सकते हैं. हाँ, आईओटी का उद्देश्य यह है कि हम कुछ भी इंटरनेट से जोड़ सकते हैं। मैं आपको एक जूते के उदाहरण से समझाता हूँ। अगर आप अपना जूता इंटरनेट से जोड़ते हैं तो आपको सब जानकारी मिल जाएगी कि आप कहाँ गये, कितना चले। यहाँ तक कि यह भी जानकारी आपको मिल सकती है कि आप इस जूते से कितना चलेंगे।

आईओटी का एक और उदाहरण एक स्प्रिंकलर सिस्टम है। अगर आपके पास एक बड़ा घास का मैदान है और उसमें स्प्रिंकलर सिस्टम है, तो आप यह चाहेंगे कि जब मैदान सूख जाये तो स्प्रिंकलर सिस्टम अपने आप चलने लगे। आपको मौसम का तापमान जानना होगा और आपको बाहर जाकर मिट्टी की जाँच करनी पड़ेगी। अगर बारिश होने वाली है या अगर घास पहले से ही काफी गीली है, तो आप पानी बर्बाद नहीं करना चाहेंगे। आईओटी का एक बड़ा लक्ष्य है कि चीज़ों का इस्तेमाल कैसे होशियारी से किया जाए। यह कहा जा सकता है कि यह चीज़ों को होशियार बनाता है। स्प्रिंकलर सिस्टम इंटरनेट के साथ जुड़कर सूखे घास को पानी देगा। लेकिन अगर घास गीली है या बारिश होने वाली है, तो यह स्प्रिंकलर सिस्टम नहीं चलेगा।

लोकप्रिय डिवाइसेज़ जैसे अमेज़न एलेक्सा और गूगल होम वौइस् असिस्टेंट्स हैं जो इंटरनेट से जुड़े हैं। यह स्मार्ट डिवाइस सिर्फ वॉयस कमांड सुनकर बहुत सारे काम कर सकते हैं। आप उनसे अपॉइंटमेंट भी ले और दे सकते हैं, पिज़्ज़ा मंगवा सकते हैं, गाना बजवा सकते हैं, और यहाँ तक कि लाइट भी बदलवा सकते हैं।

लेकिन यह कैसे काम करते हैं?

ये उदाहरण काफ़ी कामयाब हैं और इसकी क़ीमत भी ठीक-ठाक है और सबसे बड़ी बात यह है कि ये पर्यावरण के लिए बेहतर हैं, लेकिन वास्तव में इंटरनेट से स्प्रिंकलर सिस्टम को कैसे जोड़ा जाता है? समझने के लिए दो जरूरी आईओटी अवधारणाएँ हैं: पहला है सेंसर जो वातावरण में होने वाले बदलावों को पहचान लेता है और इंटरनेट को जानकारी भेजता है। दूसरा एक्चुएटर  है जो एक  इंटरनेट के संकेत के साथ बाहरी रूप से मशीन को चालू करता है।

अगर मिट्टी में नमी होगी तो सेंसर बता देगा। सेंसर इंटरनेट को डाटा भेजेगा। इसमें एक कंप्यूटर प्रोग्राम है जो मौसम और नमी के स्तर का विश्लेषण करता है। यह प्रोग्राम अल्गोरिथम का उपयोग करता है और फ़ैसला लेता है कि घास को पानी की जरूरत है या नहीं। प्रोग्राम पानी की ज़रूरत को एक्चुएटर को भेज देगा। स्प्रिंकलर सिस्टम में एक्चुएटर एक वाल्व की तरह होता है। एक्चुएटर वाल्व को चलाएगा ताकि पाइप में पानी आ जाए।

इस तरह आप देख सकते हैं कि एक्चुएटर और सेंसर दोनों इंटरनेट से जुड़े हुए हैं।

आईओटी संसार को कैसे बदल रहा है

एक उदाहरण कृषि और गाय है। गायों पर कॉलर की तरह सेंसर लगाया जा सकता है। यह जानकारी किसान के लिए बहुत उपयोगी है। यह किसान को बता सकता है जब गायें बीमार हो जाती हैं। यह बहुत उपयोगी है क्योंकि इससे गायों की मदद की जा सकती है।

स्मार्ट गाड़ियाँ भी आईओटी इस्तेमाल करती हैं। नई गाड़ियाँ आज कल आपने आप ही शुरू होती है और आप को काम पर ले जा सकती हैं। गाड़ी अपने आप पार्क भी हो सकती है। इंटरनेट से जुड़कर गाड़ी को दूसरी गाड़ियों का पता चल जाता है और वे उसे महसूस या सेंस कर सकती हैं। स्मार्ट गाड़ियाँ आपको दुर्घटना से बचा सकती हैं।

आईओटी की समस्याएँ\

 आईओटी के बहुत सारे लाभ हैं लेकिन इसके साथ कुछ समस्याएँ भी हैं। सुरक्षा एक बड़ी समस्या है। सभी जानते हैं कि कंप्यूटर हैक हो सकता है क्योंकि इंटरनेट से जुड़े उपकरणों को हैक किया जा सकता है और डाटा चोरी हो सकता है। आईओटी हजारों चीज़ें इंटरनेट से जोड़ सकता है लेकिन इन चीजों को हैक करने से कैसे रोका जाए?

एक और समस्या यह है अगर हम सब कुछ इंटरनेट से जोड़ना शुरू कर देंगे तो लोगों के बारे में अधिक जानकारी इंटरनेट में एकत्र हो जाएगी। यह लोगों के निजी जीवन की जानकारी सार्वजनिक कर सकता है।

निष्कर्ष

आईओटी दुनिया की बेहतरी के लिए बदल रहा है। इसमें कुछ लाभ हैं तो कुछ हानियाँ भी हैं। अपने अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूँ कि इसमें लाभ अधिक हैं। क्या आपने अभी तक आईओटी का इस्तेमाल किया है?

सन्दर्भ 
  • बर्गेस, मैट। “व्हाट इस द इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स? वायर्ड एक्सप्लाइन्स.” वायर्ड, वायर्ड यूके, 16, फरवरी, 2018, www.wired.co.uk/article/internet-of-things-what-is-explained-iot.
  • रईस, होप। “आईओटी फॉर काव्स: फोर वेज़ फार्मर्स आर कलेक्टिंग एँड एनालाईज़िंग डाटा फ्रॉम कैटल, 3, नवम्बर, 2016 । ” टेकरिपब्लिक, https://www.techrepublic.com/article/iot-for-cows-4-ways-farmers-are-collecting-and-analyzing-data-from-cattle/

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