भारत जब चाहे परमाणु हथियार बना सकता है

मेहेर वान

- मेहेर वान

भारतीय परमाणु ऊर्जा कमीशन की स्थापना सन 1948 में हुई थी। भाभा और उनके सहयोगी वैज्ञानिकों के प्रयासों के कारण सन 1964 तक भारत परमाणु ऊर्जा क्षेत्र का एक मज़बूत खिलाड़ी माना जाने लगा था। देश-दुनियाँ के तमाम हलकों में ऐसी चर्चायें बार-बार हो रहीं थीं कि भारत परमाणु बम बनाने में सक्षम है और वह जब चाहे तब परमाणु हथियार बना सकता है। उन्ही दिनों टेलीग्राफ अखबार के रविवारी संस्करण में एक लेख छपा था जिसमें लेखक ने बड़ी मजबूती से दावा किया था कि भारत जब चाहे परमाणु बम बना सकता है उसके पास परमाणु बम बनाने के सभी संसाधन और तकनीक मौजूद हैं। 

यह लेख पढ़कर होमी भाभा ने तत्कालीन मंत्री और परमाणु ऊर्जा कमीशन की देखरेख कर रहे लाल बहादुर शास्त्री को पत्र लिखकर यह पूछा था कि क्या इन अफवाहों को शांत करने के लिए भारत सरकार की तरफ से कोई बयान दिया दिया जाना चाहिए या भारत सरकार को इस मुद्दे पर शांत रहना चाहिए। यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील था क्योंकि भारत संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल पर आगे आकर पहल कर रहा था। ऐसी परिस्थितियों में अखबारों और अंतर्राष्ट्रीय अन्य कार्यक्रमों में बार-बार यह मुद्दा उछालना कि भारत जब चाहे तब परमाणु बम बना सकता है और उसके पास संसाधन और तकनीक मौजूद है, भारत की शांति पहल में रुकावट बन सकता था। इससे यह साबित होता कि भारत का व्यक्तित्व दोहरा है। दूसरी और ऐसी अफवाहें एशिया के राजनैतिक और सैन्य माहौल में भारत की मजबूती बढ़ा रहीं थीं। चीन के समक्ष सामरिक स्तर पर भारत की मजबूती महत्वपूर्ण थी। ऐसे में वैज्ञानिक और परमाणु ऊर्जा कमीशन के सचिव होमी भाभा ने तत्कालीन मंत्री और परमाणु ऊर्जा कमीशन की ज़िम्मेदारी सम्हाल रहे लालबहादुर शास्त्री जी के यह पत्र लिखा था।
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भारत सरकार
परमाणु ऊर्जा कमीशन
गोपनीय
REF: C-94-64
April 13, 1964.
प्रिय लालबहादुर जी,
       मैं यहाँ पर U.K.Press No. 425 की ओर से निर्गत की गई संक्षेप रूपरेखा संलग्न कर रहा हूँ, जिसे दिल्ली में 2 अप्रैल, 1964 को “भारत (परमाणु) बम निर्माण करने में सक्षम है” के शीर्षक के साथ निर्गत किया गया है। हम अगर चाहते तो बम बना सकते थे, काफी समय से खुले तौर पर कहा जा रहा है, राष्ट्रपति महोदय ने कुछ साल यह पहले संसद के संबोधन में भी कहा था। चूँकि, यह पूर्णतया गलत है कि ऐसा करने के लिए हम सरकार का निर्णय अपने पक्ष में पाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। जैसा कि यह आपके संज्ञान में है, आप परमाणु ऊर्जा मामलों को सम्हालते हैं, आपको और न ही प्रधानमन्त्री को कोई भी कागज़ यह सलाह देते हुए नहीं भेजा गया कि हम परमाण्विक हथियार के निर्माण को शुरू कर रहे है, और यहाँ तक कि परमाण्विक ऊर्जा कमीशन के पास भी अब तक ऐसा कोई कागज़ हाथ लगा है। Sunday Telegraph में प्रकाशित लेख गलत सूचनाओं से भरा हुआ प्रतीत होता है, और मैं नहीं जानता कि हमें इसके विरोध में बोलना चाहिए या साधारण रूप से शांत रहना चाहिए।    
 सादर,
आपका भवदीय
होमी भाभा
To,
Shri Lal Bahadur Shastri,
Minister Without Portfolio,
NEW DELHI.
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