आधुनिक संस्कृत साहित्य और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम

अरुण कुमार निषाद

अरुण कुमार निषाद

असिस्टेण्ट प्रोफेसर (संस्कृत विभाग), मदर टेरेसा महिला महाविद्यालय, द्वारिकागंज, कटकाखानपुर, सुल्तानपुर, उ.प्र.

राम तुम्हारा चरित स्वयं ही    काव्य है।
कोई कवि न बन जाय सहज संभाव्य है।| (मैथिलीशरणगुप्त)

आदिकवि महर्षि वाल्मीकि से लेकर आधुनिक युग तक न जाने कितने रचनाकारों ने भगवान श्रीराम को अपनी रचना का नायक बनाया बनाया है। ये रचनाएँ श्रव्यकाव्य और दृश्यकाव्य दोनों रूपों में प्राप्त होती हैं। केवल संस्कृत भाषा के ही नहीं प्रत्युत अन्य भाषाओं के रचनाकारों ने भी राम को अपनी रचना का आधार बनाया है। प्रस्तुत शोधपत्र में आधुनिक युग के संस्कृत रचनाकारों और उनके द्वारा प्रणीत राम चरित्रपरक कृतियों पर चर्चा की गयी है।

रामपाणिवाद- इनका जन्म 1707 ई. को केरल में हुआ था। इनकी मृत्यु 1781 ई. में हुई। इन्होंने ‘राघवीयम्’ नामक महाकाव्य की रचना की। इसमें बीस सर्ग हैं। इसमें राम के जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक की घटनाओं का वर्णन है।[1]         

रूपनाथ झा- इनका जन्म म.प्र. के माडला (महिष्मती) नामक स्थान पर 1760 ई. में हुआ था। इनके पिता बिहार के मूल निवासी थे बिहार में आकर बस गये थे। इनकी रचना है –‘श्रीरामविजय’ (महाकाव्य)। इसमें 9 सर्ग हैं। इसमें दशरथ के शिकार खेलने, श्रवण कुमार के मरने, रावण वध, राम के राज्याभिषेक आदि का वर्णन है।[2]   

गोदवर्म युवराज-   आपका जन्म 1800 ई. में कोटिलिंगपुर (कोटुङ्ग्ल्लूर) केरल में हुआ था। इनकी मृत्यु 1851 ई. में हुई। इनकी रचना है- श्रीरामचरितम्। इस महाकाव्य के 13वें सर्ग के 31वें श्लोक तक ही ये इसे लिख पाए थे की इनका देहान्त हो गया। इसके बाद इनके ही परिवार के कवि सार्वभौम रामवर्म ने (40 सर्ग में) इसे पूर्ण किया। इसमें संयोग श्रृंगार की अधिकता है।3

चण्डीदास-   इनका जन्म 1804 ई. में हरियाणा के पुण्डरीकपुर या पुण्डरी में हुआ था। इनकी रचनाहै-श्री रघुनाथ गुणोदय महाकाव्य।इसका प्रकाशन डॉ.गंगादत्त शर्मा विनोद के सम्पादन में श्रीरणवीर केन्द्रीय संस्कृत विद्यापीठ जम्मू 1979 ई. में हुआ। इस महाकाव्य में 13 सर्ग हैं।

अन्नदाचरण तर्कचूडामणि- इनका जन्म 1862 ई. में बंगाल में हुआ था। 1922 ई. में अंग्रेज सरकार ने इन्हें महामहोपाध्याय की पदवी से अलंकृत किया। इनकी रचना है – रामाभ्युदयम्। यह 1897 ई. में नोआखाली से प्रकाशित हुआ। यह 19 सर्गों में निबद्ध है। इसमें राम के बाल्यकाल से विवाह तक की घटनाएँ वर्णित हैं।               

पण्डित रामकुबेर मालवीय –पण्डित रामकुबेर मालवीय का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रयाग मण्डल के अन्तर्गत कड़ा नामक स्थान पर सन् 1906 ई. में 9 जनवरी को हुआ था। सन् 1974 ई. वर्ष में इनका स्वर्गवास हुआ।

आचार्य रमेशचन्द्र शुक्ल- आचार्य रमेशचन्द्र शुक्ल जी का जन्म राजस्थान प्रान्त के अन्तर्गत ‘धौलपुर’ नामक नगर में अक्टूबर मास की पन्द्रह तारीख सन् 1909 ई. में हुआ। इनके पिता का नाम पण्डित गुरुप्रसाद शुक्ल है।

रचना-सुगमरामायणम्।

विद्यावाचस्पति रामचन्द्र मिश्र –इनका जन्म बिहार राज्य के सीतामढ़ी जनपद के पकड़ी गाँव में 19 सितम्बर 1911 ई. में हुआ था।

रचनाएँ-वैदेहीचरितम् (महाकाव्य)।

पं.टी.वी. परमेश्वर अय्यर- इनका जन्म 16 जुलाई सन् 1915 ई. को केरल राज्य के कालीकट नगर के निकट ‘कोज्झिक्कोट’ नामक स्थान पर एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम विश्वनाथ अय्यर और माता का नाम श्रीमती लक्ष्मी देवी था।

रचनाएँ –श्रीरामाष्टकम् ।       

श्रीरामकीर्तिमहाकाव्य- इसके रचयिता सत्यव्रत शास्त्री हैं। इसका प्रकाशन 1990 ई. में बैंकाक से हुआ। इसमें 25 सर्ग हैं।     

इसके अरितिक्त प्रो.रेवाप्रसाद द्विवेदी का उत्तरसीताचरितम् (महाकाव्य)। प्रो.अभिराज राजेन्द्र मिश्र का जानकीजीवनम् (महाकाव्य)। रामचन्द्र मिश्र का वैदेहीचरित (महाकाव्य), और राघवेन्द्रचरितम् (महाकाव्य)। गोपेन्दु भूषण का रामचरितमानस: (अनूदितकाव्य)। वेंकटमखी (17वीं शती) का चित्रबन्धरामायणम्। चक्रकवि (17 वीं शती) का जानकीपरिणय: (आठ सर्ग मुद्रित)। श्रीनिवास (वरदवल्लीवंशज। श्रीमुष्णग्रामवासी) (17वीं शती) का सीतादिव्यचरितम्। श्रीनिवासपुत्र वरदादेशिक का गद्यरामायणम्, रघुवीरविजयम्, और रामायणसंग्रह।  गोविन्दसुत रामेश्वर (17वीं शती) का रामकुतूहलम्। रघुनाथ कवि का रामचरितम्। शेषकवि का कल्याणरामायणम्। वीरराघव का भद्रादिरामायण् । श्रीशैलनिवास का रामकथासुधोदयम्,  रामरसायनम् (भक्तिकाव्य)। लक्ष्मणसिंह अग्रवाल, बल्लभगढ़, संस्करण 1989 ई.। रामराज्यम् (रूपक), वि.वि.श्री., उद्यानपत्रिका, संस्करण 1966 ई.। रामलीलाप्रहसनम्, कृष्णलालनादान, संस्कृतरत्नाकर, (अंक-अक्टूबर-दिसम्बर), 1974 ई.। रामवनगमनम् (नृत्यनाटिका), वनमालाभवालकर, संस्कृत परिषद्, सागर विश्वविद्यालय, सागर, म.प्र., संस्करण 1965 ई.। रामविजयम्, (खण्डकाव्य), एस.व्ही. रघुनाथाचार्य, पद्मश्री मुद्रण, तिरुपति, संस्करण 1976 ई.। रामविजयमहाकाव्यम्, रूपनाथ उपाध्याय, संपादक गणपतिलाल झा, सरस्वती भवन, वाराणसी, संस्करण 1932 ई.। रामसंगीतिका (काव्य), श्रीभास्कर वर्णेकर, संस्कृत प्रचार परिषद्,  जयपुर, संस्करण संवत् 2037। रामस्तव:, (स्तोत्र), रघुनाथ शर्मा, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी, संस्करण 2011 ई.। रामानन्दम्, (नाटक), श्रीनिवास भट्ट, उडपी, संस्करण 1955 ई.। रामाभ्युदयम् (महाकाव्य) अन्नदाचरण, रामेन्द्र मुद्रणालय, नोआखाली, संस्करण 1896 ई.। रामामरचरितामृतम् (महाकाव्य), त्रिपुरारिशरण पाण्डेय, समीक्षा प्रकाशन, बस्ती, 1995 ई.। रामामृतरंगिणी, (काव्यसंग्रह), टी.एस.सुन्दरेश शर्मा, दी जनरल स्टोर्स, अयंकदाय स्ट्रीट, तंजौर, 1938 ई.। रामायणसोपानम्, रामचन्द्र शास्त्री, वाराणसी, 2033 वि.सं.। रामावतार: (गीतिकाव्य), सुब्रह्मण्यसूरि, तमिलनाडु, 1850 ई.।          सीतारामभट्ट पर्वणीकर का रामचरित।[3] वीरराघव का रामराज्याभिषेक।[4]  गोपीनाथ का रामसौभाग्यशतक।[5] रघुनाथतार्किकशिरोमणि का वसन्त त्र्यम्बक शेवडे।[6] रामप्रिया, (खण्डकाव्य), पं.सत्यनारायण शास्त्री, आदर्श नगर, भिवानी, राजस्थान, संस्करण संवत् 2052। अनर्घराघव(नाटक), मुरारी, टीका श्रीरामचन्द्र मिश्र, चौखम्बा विद्याभवन, वाराणसी, 1960 ई.| उदारराघवम्(नाटक), मल्लाचार्य, श्रीकृष्णदास अकादमी, वाराणसी, 1982 ई.। प्रशान्तराघवम् (नाटक), अभिराज राजेन्द्र मिश्र, वैजन्त प्रकाशन, इलाहबाद, 2008 ई.। प्रसन्नराघव सोपानम् (नाटक), चौखम्बा, सुरभारती प्रकाशन, वाराणसी 1987 ई.| प्रसन्न राघवम् (नाटक), जयदेव, चौखम्बा अमर भारती प्रकाशन, वाराणसी, 1977 ई.। प्रसन्नराघवम्, विजयदेव, मोतीलाल बनारसीदास प्रकाशन, नई दिल्ली, 1970 ई.। राघवनैषधीयम्, रामकुबेर मालवीय, चौखम्बा संस्कृत सीरीज, वाराणसी, 1969 ई.। राघवपाण्डवीय (काव्य), दामोदर झा, चौखम्बा प्रकाशन, वाराणसी, 1965 ई.। राघवाभ्युदयम् (नाटक), रामभद्राचार्य, तुलसी सेवापीठ न्यास, चित्रकूटधाम, सतना, संवत् 2053। रामं वन्दे जगत प्रभु, द्वारका प्रसाद शास्त्री। रामचरितमानसम् (नाटक), रमा चौधरी। राम रसायनम् (महाकाव्य), हजारी लाल शास्त्री,इंदौर,। रामराघवस्तवन (खण्डकाव्य), कृष्णदत्त शर्मा शास्त्री। रामराज्यम्, पूर्ण प्रसाद ब्राह्मण। रामशतकम् (स्तोत्रकाव्य), केशवभट्ट। रामाभिरामीयम्(खण्डकाव्य), के.एस.कृष्णमूर्ति शास्त्री। रामायण मञ्जरी, मधु गर्ग। रामायण संग्रह (उपन्यास), लक्ष्मण सूरि। श्रीरामकाव्यम्, कुञ्ज बिहारी जोशी। श्रीरामचरितम् (काव्य), रामरञ्जन, पश्चिम बंगाल। श्रीरामचरितम्, पण्डित रामविशाल तिवारी। श्रीरामचरिताब्धिरत्नम् (महाचित्रकाव्यम्), श्रीनित्यानन्द शास्त्री। श्रीरामजातकम् ए.आर. राजराज वर्मा। श्रीरामनाट्यसृष्टि (गद्यम्), सम्पादक श्री.भि.वेलणकर। यादवराघवीयम (द्वयर्थी काव्य), नरहरि। रघुवीरवर्यचरितम्, तिरुमल कोणाचार्य। दशाननवधम्, योगीन्द्रनाथ। रघुवीरचरितम्, सुकुमार। सीतारामविहार:, लक्ष्मणसोमयामी (ओरगंटी शंकरसुत)। रामगुणाकर:, रामदेव। रामखेटकाव्यम्, पद्मनाभ, 19वीं शती। रामविलास:, रामचन्द्र। रामविलास:, हरिनाथ। रामचन्द्रकाव्यम्, शम्भुकालिदास। प्रसन्नरामायण, श्रीपादपुत्र देवररक्षित। रामचन्द्रोदयम्, कविवल्लभ। रामचरितम्, विश्वक्सेन। राघवोल्लास:, पूज्यपाद देवानन्द। राघवोल्लास:, अद्वैतरामभिक्षु। बालराघवीयम्, शठगोपाचार्य। रमणीयराघवम्, ब्रह्मदत्त। अभिरामकाव्यम्, रामनाथ। रामकुतूहलम्, गोविन्दसुत रामेश्वर, 17वीं शती । रामकौतुकम्, रामकृष्णसुत कमलाकर। रामकथामृतम्, गिरिधरदास। राम गुणाकर:, रामदेव न्यायालंकार। रामविलासकाव्यम्, रामचन्द्र तर्कवागीश (साहित्यदर्पण वृत्तिकार)। रामविलासकाव्यम्, हरिनाथ। रामचरितम्, काशीनाथ। रामचरितम्, मोहनस्वामी। रामलीलाद्योत:, बाणेश्वरसुत रामनाथ। रामाभिषेक, केशव। रामकाव्यम्, रामानन्दतीर्थ। रामाभ्युदयम्, वेंकटेश। शितिकण्ठ रामयण, शितिकण्ठ।  रघुवीरविलासम्, दामोदरसुत लक्ष्मण। रघुपतिविजयम्, गोपीनाथ। रामचन्द्रमहोदय, रामदास। रामचन्द्रमहोदय, पुरुषोत्तमदास मिश्र। रामचन्द्रमहोदय, सच्चीदानन्द। रामकाव्यम्, बालकृष्ण। रामरत्नाकर:, मधुव्रत रामरसामृतम्, श्रीधर। रामचन्द्रोदय, कविवल्लभ। रघुनन्दनविलासम्, पात्राचार्य विक्रमराघवीय, नूतनकालिदास। पौलस्त्यराघवीयम्, रामचन्द्र (पुल्लेलवंशीय)। श्रीरामविजयम्, अरुणाचलनाथ-शिष्य। बालरामरसायनम्, कृष्ण शास्त्री। रामायणसारसंग्रह:, ईश्वर दीक्षित। ललितराघवम्, श्रीनिवास रथ। जानक्यानन्दबोध:, श्रीपति गोविन्द। सीतारामभ्युदयम्, गोपाल शास्त्री (विजगापट्टण)। सुन्दररामायण, श्रीसुन्देश्वर। इत्यादि विद्वानों की रचनाएँ प्राप्त होती हैं हमें विभिन्न पुस्तकालयों में प्राप्त होती हैं। विषय विस्तार के डर से केवल इन पुस्तकों और रचनाकारों का नामोल्लेख किया गया है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि आज भी समाज में भगवान श्रीराम के द्वारा निर्मित मार्ग का लोग अनुकरण कर रहे हैं। उन्होंने जो आदर्श स्थापित कर दिया, लोग उसी पथ पर चल रहे हैं। जब भी कभी सुशासन की बात होती है तो लोगों के मुख से स्वत: ही रामराज्य का नाम निकल पड़ता है। प्राचीनकाल से लेकर आज तक राम काव्य लिखने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी छोड़ न्यूनता नहीं आई है।         


[1]आधुनिक संस्कृत साहित्य का इतिहास, संपादक डॉ. जगन्नाथ पाठक, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ, संस्करण 2000 ई., पृष्ठ 10
[2] आधुनिक संस्कृत साहित्य का इतिहास, संपादक डॉ. जगन्नाथ पाठक, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ, संस्करण 2000 ई., पृष्ठ संख्या 12-13
[3]आधुनिक संस्कृत साहित्य का इतिहास, संपादक डॉ. जगन्नाथ पाठक, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ, संस्करण 2000 ई., पृष्ठ संख्या 250
[4]आधुनिक संस्कृत साहित्य का इतिहास, संपादक डॉ. जगन्नाथ पाठक, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ, संस्करण 2000 ई., पृष्ठ संख्या 253
[5]आधुनिक संस्कृत साहित्य का इतिहास, संपादक डॉ. जगन्नाथ पाठक, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ, संस्करण 2000 ई., पृष्ठ संख्या 254
[6] आधुनिक संस्कृत साहित्य का इतिहास, संपादक डॉ. जगन्नाथ पाठक, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ, संस्करण 2000 ई., पृष्ठ संख्या 235

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।