शतरंज से जीवन प्रबंधन

अंजली खेर

चलभाष: +91 942 581 0540; पता: सी-206, जीवन विहार अन्‍नपूर्णा बिल्डिंग के पास पी एंड टी चौराहा, कोटरा रोड भोपाल- 462 003 मध्य प्रदेश


वर्तमान समय में चांद को भी मुट्ठी में थाम लेने की उत्‍कट इच्‍छा मन में थाम सतत् गतिमान बने युवाओं की इच्‍छाशक्ति देखते ही बनती हैं, पर यदा-कदा ये सारा का सारा उत्‍साह, ऊर्जा क्षणभर में समाप्‍तप्राय हो जाती हैं यदि उन्‍हें उनके प्रयासों में असफलता या हार का सामना करना पड़ता हैं। विडंबना का विषय हैं कि आज दुनियादारी की जवाबदेही और जिम्‍मेदारियों से कोसों दूर रहने वाले नन्‍हे नन्‍हे बच्‍चों का भी छोटी-छोटी सी बातों को लेकर व्‍यग्रता, अवसाद और उद्विग्‍नता से दो-चार होना एक अत्‍यंत सामान्‍य सी बात हो चली हैं।

नि:संदेह आज के प्रतिस्‍पर्धात्‍मक युग में पुराने समय की तुलनात्‍मक दृष्टि में पढ़ाई  कहीं अधिक उच्‍चस्‍तरीय हैं, और दूसरा एक के बढ़कर एक धुरंधरों के बीच स्‍वयं को श्रेष्‍ठ साबित करने और भीड़ में स्‍वयं की विलग पहचान बनाने के लिए विद्यार्थी को इस महायज्ञ में स्‍वयं की इच्‍छाओं की आहुति देनी ही पड़ती हैं।

विचारणीय तथ्‍य हैं कि पढ़लिखकर मात्र जीविकोपार्जन करना और अपने पारिवारिक दायित्‍वों का समुचित निर्वहन करना प्रत्‍येक व्‍यक्ति की प्राथमिकता होती हैं पर आज के वैज्ञानिक युग में जहाँ हमारे देश को युवाशक्ति का ईश्‍वरीय वरदान हैं, वहीं दूसरी ओर आज के परिवेश देश के चहुँमुखी विकास हेतु इन माणिकों को मूलभूत संस्‍कार, संस्‍कृति और आरोग्‍य जैसे जीवनोपयोगी मूल्‍यों रूपी धागें में पिरोकर एक ऐसी माला का सृजन करना होगा जो कि संपूर्ण ब्रह्माण्ड के लिए आकर्षण का केंद्र बना सके।

बेशक कोई भी मनुष्‍य अपने आप में परिपूर्ण नहीं होता, गलतियाँ मानव से होती हैं और एक ही परिस्थिति पर प्रत्‍येक मनुष्‍य का अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ व्‍यक्‍त करना एक सामान्‍य सी बात हैं। इसके बावजूद जनसामान्‍य के बीच विशिष्‍ट पहचान बनाने, समाज में सम्‍मानीय ओहदा प्राप्‍त करने की आकांक्षा हम सबके लिए कॉमन सी बात होती हैं, जिसे पूरा करने के लिए अक्‍सर अभिभावक अपने नौनिहालों को बेहतर से बेहतरीन उच्‍च शिक्षा के लिए नामी स्‍कूल कॉलेज और अपने बजट से बाहर की महंगी कोचिंग में पढ़ाने में पीछे नहीं हटते।

इतनी मशक्‍कत के बावजूद भी कई बार स्‍कूली पढ़ाई में बच्‍चे को सफलता हाथ नहीं आती क्‍योंकि अधिकांशत: बच्‍चे पुस्‍तक खोलकर पढ़ने तो बैठ जाते हैं, पर अस्थिर चित्‍त के कारण वे एक ही स्‍थान पर ना तो ज्‍यादा देर ना तो पढ़ने बैठ पाते हैं और मानसिक बिखराव के कारण पढ़ा हुआ ढंग से याद भी नहीं रख पाते। साथ ही परीक्षा के लिए दूरदर्शितापरक विषयवस्‍तु अध्‍ययन का विभाजन कर पूरे साल भर अनुशासित रहकर नियमित अध्‍ययन करना विद्यार्थी के लिए बड़ी चुनौती भरा काम होता है। किंतु ज्ञातव्‍य हो कि बड़ी उपलब्धि प्राप्‍त करने के लिए स्‍वयं की इंद्रियों को नियंत्रण में कर एक अनुशासित जीवन जीना कोई जटिल या असंभव कार्य नहीं, यदि इस नई पौध को शतरंज खेल के गुर सिखाये जायें।  उक्‍त खेल बच्‍चे को आत्‍मविश्‍वास से लबरेज कर अपनी मंजिल की प्राप्‍त करने की शक्तियाँ पल्‍लवित करता हैं, भविष्‍य में रिश्‍तों को संजोते हुए खुद की पहचान निर्मित करने योग्‍य बनाता हैं तथा कालांतर में सेवानिवृत्ति पश्‍चात भी स्‍वयं को रचनात्‍मकता में निर्लिप्‍त कर एकाकीपन के दंश को सालने नहीं देता क्‍योंकि शतरंज खेल ऑनलाइन या मोबाइल पर भी डाउनलोड कर अकेले भी आसानी से खेला जा सकता हैं, ऑनलाइन साइट्स पर न केवल खेल की बारीकियाँ सिखाई जाती हैं वरन् रोज़ाना खेलने वाले खिलाड़ी की बढ़ती-घटती रेंकिंग भी बताता हैं।

जी हाँ, अविश्‍वसनीय किंतु सोलह आने सच हैं कि शतरंज एक ऐसा खेल हैं जिसको खेलने वाला खिलाड़ी धैर्य, संयम, अनुशासन, समय प्रबधन, दूरदर्शिता, निर्णयन क्षमता, एकाग्रता और अद्भुत स्‍मरण क्षमता के साथ और भी अनेक गुणों को संजोकर व्‍यक्ति के चुंबकीय आकर्षण उत्‍पन्‍न करने के साथ ही लक्ष्‍यप्राप्ति के मार्ग को सहजसाध्‍य बनाता हैं।

शतरंज खेल की विशिष्‍टताओं के मद्देनज़र हमारे भारतदेश ही नहीं वरन् यूरोपियन देशों ने भी इसकी महत्‍ता को स्‍वीकार करते हुए बच्‍चों को यह खेल सीखने की आवश्‍यकता पर बल दिया हैं।

मेडिटेशन, योग और साधना शतरंज के खिलाडि़यों की दिनचर्या का महत्‍वपूर्ण अंग होते हैं। शतरंज की एक बाजी में कम से कम तीन घंटे एक ही स्‍थान पर बैठे रहना, स्‍वयं की बाज़ी के साथ प्रतिद्वंदियों की चालों पर भी दृष्टि बनाएँ रखना, अपनी मोहरें सोच-समझकर आगे बढ़ाने के साथ ही प्रतिद्वंदी की रणनीति का आंकलन करना खिलाड़ी में उक्‍त गुणों का सृजन करता हैं, साथ ही शतरंज खेल में मोहरें एक-दूसरे को सपोर्ट करती हैं, यानि आगे बढ़ने वाली मोहरों को बचाने के लिए पीछे वाली मोहरें सपोर्ट कर उन्‍हें मरने से बचाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती हैं,  इस तरह खिलाड़ी बाज़ी अपने हक में करने के लिए अपनी सारी मोहरों का ऐसा ताना-बाना बुनता हैं जिसमें अपनी मोहरों के बचाव के साथ ही प्रतिद्वंदी की मोहरें फँसाने की रणनीति तैयार होती हैं, इस प्रकार खिलाड़ी संगठन की शक्ति को समझने का सामर्थ्य विकसित करता हैं।

सबसे विशिष्‍ट बात यह कि वह बचपन से ही रोज़ाना शतरंज की कई बाजियाँ खेलता और अनेक बार हार का सामना भी करता हैं। पर कई बार लगातार बाजियों में हारने के बाद भी अगली बार खेलने का हौसला कम होने के बजाय बढ़ता ही जाता क्‍योंकि उसे अपनी हार, अपनी गलती का इल्‍म हो जाया करता हैं व अगली बार उससे बचते हुए प्रतिस्‍पर्धी को मात देने का जज्‍़बा उसे फिर खेलने को उकसाता हैं। शायद इसी वजह से शतरंज के खिलाड़ी कभी भी अवसाद का शिकार होकर आत्‍महत्‍या जैसे हीन कार्य करने को तत्‍पर नहीं होते। इस तथ्‍य को एक सर्वेक्षण के द्वारा ज्ञात किया गया है और निष्‍कर्षत: सरकार द्वारा आगामी वर्षो में बच्‍चों की प्राथमिक शिक्षा में शतरंज को अनिवार्य विषय के रूप में सम्मिलित करना विचाराधीन हैं।

वर्तमान में छोटी-छोटी कक्षाओं में भी पढ़ाई का सिलेबस अधिक होने के कारण उनके पास अतिरिक्‍त समय बिल्‍कुल नही होता, फिर भी बच्‍चे सप्‍ताह में थोड़ा सा समय निकालकर केवल एक बाजी खेले तो भी स्‍कूल की पढ़ाई के साथ अन्‍य गतिविधियों में भी उनके प्रदर्शन में हुए सकारात्‍मक परिवर्तन को जांचा जा सकता हैं, क्‍योंकि शतरंज बच्‍चों के मस्तिष्‍क के दोनों हिस्‍सों (दाएँ और बाएँ) को चैतन्‍य करने की विशिष्‍ट क्षमता रखता हैं।इस प्रकार बच्‍चे का चहुँमुखी विकास होता हैं।

शतरंज खेल न केवल बच्‍चों के व्‍यक्तित्‍व को मूल्‍यवान गुणों से ओतप्रोत कर उसके यशस्‍वी भवितव्‍य की सशक्‍त नींव तैयार करता हैं, वरन् खिलाड़ी को ब्रेन हेमरेज, एल्‍जाइमर्स, अवसाद आदि भयावह बीमारियों से कोसों दूर रखता हैं।

स्‍वस्‍थ, सशक्‍त, समर्थ और सफल युवाओं से ही किसी भी देश की समृद्धि के मार्ग प्रशस्‍त होते हैं, तो क्‍यों न हम सब मिलकर अपने देश की उन्‍नति में हाथ बटायें, हर नन्‍हे बच्‍चे को शतरंज खेल सिखाये।

4 comments :

  1. Valuable article....for each parents to nourish the brain nd increase the brain power for healthy Nd happy life...thks....

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  2. बहुत ही उत्कृष्ट रचना है👌👌👌👌👌
    मणिमाला खरे

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  3. शतरंज खेल की महत्ता और अधिक स्पष्ट हुई दीदी और अब इसे पुनः खेलना प्रारंभ करेंगे। प्रकाशित रचना हेतु बधाई प्रिय दीदी��

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