ओपेनहाइमर सोवियत यूनियन का एजेंट है

मेहेर वान

- मेहेर वान


ओपेनहाइमर अमेरिकी परमाणविक कार्यक्रम के मास्टरमाइंड थे और उन्हें दुनिया भर में “फादर ऑफ एटोमिक बॉम्ब” कहा जाता है। सन 1945 के हिरोशिमा और नागासाकी के बाद उनका मन काफी उद्वेलित हो उठा था। इसके बाद उन्हें खुद से नफरत होने लगी थी कि उनके दिशानिर्देशन में इतने विनाशकारक हथियार का निर्माण हुआ। एक इंटरव्यू में उन्होने गीता को उद्धृत करते हुये कहा था कि मैं मृत्यु का मसीहा हो गया हूँ ...! आत्मघृणा में उन्होंने सभी परमाणविक कार्यक्रम बंद करने की सलाहें आला अधिकारियों को दी थी।

इसके बाद उन्हें घेरने का दौर शुरू हुआ और लोग उनके खिलाफ खड़े होते गए। यह घेरना इस हद तक पहुँच गया कि उन्हे देशद्रोही कहा गया और उन्हे रूस का एजेंट तक कह दिया गया। देश के लिये सब कुछ लुटा चुका वैज्ञानिक एक अजीब दौर से गुज़र रहा था तभी उसके एक और सहकर्मी ने उनके बारे में एफबीआई के अधिकारी को पत्र लिखा।

नवंबर 1953 मे जे. एडगर हूवर को ओपेनहाइमर के बारे में एक पत्र लिखकर भेजा गया जिसे कि विलियम बोर्डन ने लिखा था। विलियम बोर्डन कॉङ्ग्रेस की संयुक्त परमाणु ऊर्जा कमेटी के एक्ज़ीक्यूटिव निदेशक हुआ करते थे। बोर्डन ने इस पत्र को कई साल के अनुसंधान का परिणाम बताया। इसमें ओपेनहाइमर को रूस का गुप्तचर एजेंट कहा गया था। हालांकि इस पत्र में कोई आरोप ऐसा नहीं था कि जो बहुत नया हो। ओपेनहाइमर के बारे में काफी समय से ऐसी बातें हो रही थीं मगर इस पत्र के बाद, कोई ठोस सबूत न होने के बावजूद ओपेनहाइमर और देश की महत्वपूर्ण फाइलों के बीच आइजेनहवार के निर्देशानुसार एक “ब्लेङ्क वाल” यानि दीवार खड़ी कर दी गई थी...
   
इसके बाद की कहानी काफी लंबी है....

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नवम्बर 7, 1953
श्री जे. एडगर हूवर
निदेशक, फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन
वाशिंगटन, डी. सी.

प्रिय श्री हूवर:

यह पत्र जे. रॉबर्ट ओपेन्हाईमर के बारे में है।

जैसाकि आप जानते हैं, उन्होंने कुछ वर्षों तक राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद्, राज्य विभाग, रक्षा विभाग, थलसेना, नौसेना, वायुसेना, शोध एवं विकास बोर्ड, परमाणु ऊर्जा कमीशन, केन्द्रीय अन्वेषण एजेंसी, राष्ट्रीय सुरक्षा संसाधन बोर्ड और राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन के अत्यंत संवेदनशील क्रियाकलापोंकी पहुँच का आनंद लिया है। उनकी पहुँच के अन्दर सेनाओं द्वारा विकसित किये गए अत्याधुनिक एवं नए हथियारों, सामरिक योजनाओं की कम से कम संक्षिप्त रूपरेखा, तथा परमाण्विक और हाइड्रोजन बमों की और इकठ्ठा किये गए डेटा की विस्तृत जानकारी है, कुछ ख़ास सबूत जिनके आधार पर सीआईए अपने प्रमुख अंदाज़ लगाती है, अमेरिका संयुक्त राष्ट्र और नाटो में अपनी भागीदारी तय करता है और राष्ट्रीय सुरक्षा से सम्बंधित अन्य तमाम जानकारियाँ हैं।

चूँकि उनकी पहुँच का विस्तार बहुत ही अद्वितीय हो सकता है, क्योंकि उनके पास सेना, गुप्तचर विभाग और राजनैतिक और साथ ही परमाण्विक ऊर्जा मामले के दस्तावेजों का बड़ा संकलन देखरेख में रहा है, और चूँकि उनके पास वैज्ञानिक समझ है जो कि उन्हें तकनीकी प्रकार के गुप्त डेटा के महत्व को समझने की क्षमता प्रदान करती है, यह अंदाजा लगाना तार्किक प्रतीत होता है कि वह अभी और कई सालों से इस स्थिति में रहे हैं कि वह अमेरिका में किसी और की अपेक्षा अधिक राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा को प्रभावित करने वाली अधिक महत्वपूर्ण और विस्तृत जानकारी के साथ समझौता करने की स्थिति में रहे हैं।

हालांकि रॉबर्ट जे. ओपेन्हाईमर ने विज्ञान के क्षेत्र के विकास में कोई खास योगदान नहीं दिया है, इसके बाद भी वे अमेरिका के द्वितीय रैंक के बड़े भौतिकविदों में सम्माननीय स्थान रखते हैं। सरकारी मामलों में उनकी निपुणता, उच्चाधिकारियों से उनकी नजदीकी मोलभाव / जोड़-तोड़, और उच्च स्तर के वैचारको को प्रभावित करने की उनकी क्षमता के कारण वह न सिर्फ वैज्ञानिकों में बल्कि उन सभी में जिन्होंने युद्ध के बाद सेना, परमाणु ऊर्जा, गुप्तचर, और राजनैतिक निर्णयों को एक आकार दिया, निश्चित ही पहली रैंक के लोगों में आते हैं। निदेशक अथवा कार्यालयी अथवा गैर-कार्यालयी सदस्य के तौर पर 35 से भी अधिक महत्वपूर्ण कमेटियों, पैनलों, स्टडी समूह, और प्रोजेक्ट में उन्होंने एएफबीआइ को छोड़कर सभी उच्चतम अमेरिकी सुरक्षा विभागों और एजेंसियों की केन्द्रीय योजनाओं को प्रभावित किया है या दिशा दी है।

इस पत्र का उद्देश्य मेरे व्यक्तिगत और काफी विस्तृत रूप से सोचा गया विचार, वर्षों की पढाई के बाद, उपलब्ध गुप्त सबूतों के आधार पर निकाला गया राय / मत को बताना है कि बहुत संभव है, रोबर्ट जे. ओपेन्हाईमर सोवियत यूनियन के एजेंट हैं।

यह मत अन्य के आलावा इन निम्नलिखित तथ्यों को शामिल करता है-

1. सबूत दर्शाते हैं कि अब यानि अप्रैल 1942 तक -

  • वे कम्युनिस्ट पार्टी को हर महीने पर्याप्त धन दान कर रहे थे;
  • उनके कम्युनिज़्म से सम्बन्ध नाज़ी – सोवियत समझौता और फिनलैंड पर सोवियत आक्रमण में भी बचे रह गए;
  • उनकी पत्नी और छोटे भाई भी कम्युनिस्ट हैं;
  • कम्युनिस्ट दोस्तों के अलावा उनका कोई घनिष्ठ मित्र नहीं हैं;
  • उनके पास कम से कम एक कामवाली ऐसी है जो कम्युनिस्ट है;
  • व्यावसायिक संबंधों के बाहर, उनके सम्बंध केवल कम्युनिस्ट संस्थानों के साथ ही हैं;
  • युद्ध की शुरुआत में बर्कले परमाण्विक प्रोजेक्ट में इन्होंने जिन लोगों को नौकरियाँ दीं वे सब स्पष्ट तौर पर कम्युनिस्ट थे;
  • वे कम्युनिस्ट पार्टी के लिए काम करने वालों को खोजने में काफी माहिर हैं;
  • वे सोवियत ख़ुफ़िया एजेंटों के साथ नियमित संपर्क में थे;


2. सबूत यह दर्शाते हैं कि-

  • मई 1942 में या तो उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी को चंदा देना बंद कर दिया था या फिर उन्होंने चंदा देने के नए मार्ग खोज लिए थे जिनका पता अभी तक नहीं चल पाया है;
  • अप्रैल 1942 में उनका नाम सुरक्षा जाँच के लिए औपचारिक तरीके से भेजा गया था;
  • उन्हें खुद भी इस बारे में जानकारी थी कि उनका नाम इस तरह भेजा जा रहा है;
  • इसके बाद उन्होंने जनरल ग्रोव्स और एफबीआई को सन 1939 से अप्रैल 1942 तक के समयांतर के बारे में बार-बार गलत जानकारी दी;


3. सबूत दर्शाते हैं-

  • वे युद्धकाल में लॉस अलामोस में असंख्य कम्युनिस्टों को नौकरी देने के लिए ज़िम्मेदार हैं, जिनमें से कुछ गैर तकनीकी हैं;
  • उन्होंने एक ऐसे ही आदमी को लॉस अलामोस का इतिहास लिखने का काम सौंपा;
  • वे 6 अगस्त 1945 (हिरोशिमा) तक हाइड्रोजन बम के कट्टर समर्थक थे, इसी दिन उन्होंने अपने हर एक आला अधिकारी को हाइड्रोजन बम बनाने पर रोक लगा देने की अपील की थी; और
  • युद्ध चलने तक वे परमाणु बम कार्यक्रम के अत्यधिक उत्साही प्रायोजक थे जबकि युद्ध खत्म होते ही उन्होंने लॉस अलामोस प्रयोगशाला को आकस्मिक रूपसे बंद कर देने की जोरदार तरीके से वकालत की थी।


4. सबूत दर्शा रहे हैं कि-

  • वे 1946 के उत्तरार्द्ध से जनवरी 31, 1950 तक हाइड्रोजन बम के निर्माण को बंद करने के लिए सेना और परमाण्विक ऊर्जा कमीशन के अधिकारियों को प्रभावित करने में स्पष्ट रूप से काबिल थे;
  • जनवरी 1950 के बाद से अमेरिका के हाइड्रोजन बम निर्माण कार्यक्रम को ठप कराने के लिए उन्होंने अथक प्रयास किये;
  • युद्ध के बाद परमाण्विक बम की सामग्री के उत्पादन के लिए क्षमताओं के विस्तार के प्रयासों के खिलाफ अपने समर्थ प्रभावों का इस्तेमाल किया;
  • अपने समर्थ प्रभाव को उन्होंने युद्ध के बाद यूरेनियम की अधिक सप्लाई के खिलाफ इस्तेमाल किया;
  • उन्होंने अपने प्रभावों का इस्तेमाल सभी युद्ध के बाद वाले वृहत प्रयासों के खिलाफ किया जो परमाण्विक शक्ति के विकास के लिए किये जा रहे थे, इसमें नाभिकीय क्षमता वाली पनडुब्बियों और वायुयानों का विकास शामिल है।


5. इन सभी सबूतों पर विस्तार से मंथन करने के बाद, यह निष्कर्ष न्यायसंगत होते हैं-

6. सन 1929 से आधी 1942 तक, रॉबर्ट जे. ओपेन्हाईमर निश्चित रूप से एक पर्याप्त दृढ़ कम्युनिस्ट थे, कि उन्होंने या तो सोवियत को गुप्त सूचनाएँ भिजवाने में स्वयंसेवा की या फिर ऐसी किसी सूचना पाने की प्रार्थनाओं को पूरा किया। (इसमें इसकी संभावना भी शामिल है कि जब उन्होंने अपने व्यक्तिगत विशेषज्ञता के आधार पर परमाण्विक विकास के हथियारों वाले पहलू को नकार दिया था, तब वह सोवियत रूस के इशारों पर नाच रहे थे।);

7. इस बात की पूरी सम्भावना है कि वे गुप्तचर एजेंट की तरह काम कर रहे थे; और

8. इस बात की पूरी सम्भावना है कि वह तब से सोवियत के इशारों पर नाचते हुए अमेरिकी सेना, परमाणु ऊर्जा, गुप्तचर विभाग और राजनैतिक योजना विभाग को भी प्रभावित कर रहे थे।

ध्यान दिया जाये कि यह निष्कर्ष क्लाउस फुच्स के द्वारा प्रस्तुत की गई इस सूचना से मेल खाता है, और यह इशारा करता है कि सोवियत के पास बर्कले में एक एजेंट था जिसने विद्युत् चुम्बकीय अलगाव से सम्बंधित शोध के बारे में सन 1942 या उससे पहले उन्हें सूचित किया।

यह कहना बेकार है, मैं इन सबूतों के आधार पर निकली प्रयिक्त्ताओ की प्रशंशा करता हूँ, भविष्य में इकट्ठे किये जाने वाले सबूतों की समीक्षा के आधार पर यह संभावनाओं का रूप धारण करेंगी और संभव है कि वह निश्चितता की और बढ़ जाएँ। केन्द्रीय समस्या यह नहीं है कि क्या रॉबर्ट जे ओपेन्हाईमर कभी कम्युनिस्ट रहे हैं; जैसा कि प्राप्त सबूतो से यह बहुत ही साफ़ है कि वह ऐसे ही थे। यहाँ तक कि शुरुआती सन 1947 में परमाणु ऊर्जा कमीशन ने एक विश्लेषण के बाद यह निष्कर्ष निकाला था कि कुछ सबसे अधिक अपमानजनक सूचनाओं में से एक अब भी उपलब्ध होनी बाकी है। केन्द्रीय समस्या तार्किक रूप से यह गणना करना है कि उस निर्णायक समय 1939-1942 में बर्कले में होते हुए वास्तव में उन्होंने कम्युनिस्ट होते हुए उन परिस्थितियों में क्या क्या किया होगा—यानि कि, चाहे वह वास्तविक गुप्तचर बन गए हों या सोवियत के राजनैतिक मोहरे रहे हों! अतः, इस केन्द्रीय समस्या के सन्दर्भ में, मेरा यह विचार है कि सबसे अधिक बुरा होने की सर्वाधिक संभावना वास्तव में एक सच है।

मैं इन टिप्पणियों की घोर गम्भीर प्रकृति के बारे में बहुत अच्छी तरह से जागरूक हूँ। यह मामला मेरे लिए घृणात्मक है। ओपेनहाइमर मामले के साथ बहुत सालों तक रहने के कारण, उनके बारे में सारी जानकारियों और सूचनाओं, जो आपकी एजेंसी ने मई 1953 तक परमाणु ऊर्जा कमीशन के ज़रिये मुझ तक पहुंचाई थी, को पढने और बार-बार पढ़ने के कारण, और अन्य बहुत सारे स्रोतों द्वारा एकत्र की गई जानकारी और डेटा के साथ, और इस पूरे मामले को वापस किसी व्यक्तिगत जीवन के नज़रिए से देखने के बाद, मुझे सुरक्षा एजेंसी के प्रमुख को स्पष्ट रूप से यह प्रकट करना मेरा कर्तव्य महसूस होता है खास तौर पर वह निष्कर्ष जो मैंने बड़े ही दुःख के साथ ठोस रूप में निकाले हैं और जो कि मुझे विश्वास है कि साफ़ दिमाग वाला कोई भी इंसान इतने सबूतों के आधार पर निश्चित रूप से यह निष्कर्ष स्वीकार करने के लिए बाध्य होगा।

यह पत्र लिखना, मेरे लिए पूरी तरह से मेरे ही द्वारा उठाया गया कदम है और इसके लिए सिर्फ और सिर्फ मैं ही ज़िम्मेदार हूँ।
आपका सबसे सच्चा
विलियम एल.बोर्डन
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(Source: From In the matter of J. Oppenheimer (Pages 837-8))


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