भारत और भारतीय संस्कृति

विक्रम राठौर

अभियांत्रिकी और तकनीक संकाय; IASE गांधी विद्या मंदिर, सरदारशहर, राजस्थान
ईमेल: dr.vikramrathore36@yahoo.co.in


संस्कृति जीवन की विधि है। हमारे जीने और सोचने की विधि में हमारी अंत:स्थ प्रकृति  की अभिव्यक्ति ‘संस्कृति’ है। सभ्यता और संस्कृति को समानार्थी समझ लिया जाता है, जबकि ये दोनों  अवधारणाएँ अलग-अलग हैं। संसार के सभी विद्वानों ने 'संस्कृति' शब्द की विभिन्न परिभाषाएँ, व्याख्याएँ की हैं। कोई  सर्वमान्य परिभाषा नहीं मिल पाती फिर भी इतना तो स्पष्ट ही है कि 'संस्कृति' उन भूषणरूपी  सम्यक् चेष्टाओं का नाम है जिनके द्वारा मानव समूह अपने आंतरिक और बाह्य जीवन को,  अपनी शारीरिक मानसिक शक्तियों को संस्कारवान, विकसित और दृढ़ बनाता है। संक्षेप में संस्कृति मानव समुदाय के जीवन-यापन की वह परंपरागत किंतु निरंतर विकासोन्मुखी शैली है  जिसका प्रशिक्षण पाकर मनुष्य संस्कारित, सुघड़, प्रौढ़ और विकसित बनता है।

'संस्कृति' शब्द संस्कृत भाषा की धातु 'कृ' (करना) से बना है। इस धातु से 3 शब्द बनते हैं-  'प्रकृति' (मूल स्थिति), 'संस्कृति' (परिष्कृत स्थिति) और 'विकृति' (अवनति स्थिति)। 'संस्कृति'  का शब्दार्थ है- उत्तम या सुधरी हुई स्थिति यानी कि किसी वस्तु को यहाँ तक संस्कारित और  परिष्कृत करना कि इसका अंतिम उत्पाद हमारी प्रशंसा और सम्मान प्राप्त कर सके।

संस्कृति के दो पक्ष हैं-
(1) आधिभौतिक संस्कृति और (2) भौतिक संस्कृति।

सामान्य अर्थ में आधिभौतिक संस्कृति को संस्कृति और भौतिक संस्कृति को सभ्यता के नाम से अभिहित किया जाता है। संस्कृति के ये दोनों पक्ष एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। संस्कृति  आभ्यंतर है, इसमें परंपरागत चिंतन, कलात्मक अनुभूति, विस्तृत ज्ञान एवं धार्मिक आस्था का  समावेश होता है।

विभिन्न ऐतिहासिक परंपराओं से गुजरकर और विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में रहकर संसार  के विभिन्न समुदायों ने उस महान मानवीय संस्कृति के भिन्न-भिन्न पक्षों से साक्षात किया  है। नाना प्रकार की धार्मिक साधनाओं, कलात्मक प्रयत्नों और सेवाभक्ति तथा योगमूलक  अनुभूतियों के भीतर से मनुष्य उस महान सत्य के व्यापक और परिपूर्ण रूप को क्रमश: प्राप्त  करता है जिसे हम 'संस्कृति' शब्द द्वारा व्यापक करते हैं।

सभ्यता से किसी संस्कृति की बाहरी चरम अवस्था का बोध होता है। संस्कृति विस्तार है तो  सभ्यता कठोर स्थिरता। सभ्यता में भौतिक पक्ष प्रधान है, जबकि संस्कृति में वैचारिक पक्ष  प्रबल होता है। यदि सभ्यता शरीर है तो संस्कृति उसकी आत्मा। सभ्यता बताती है कि 'हमारे  पास क्या है' और संस्कृति यह बताती है कि 'हम क्या हैं'। एक संस्कृति तब ही सभ्यता बनती  है, जबकि उसके पास एक लिखित भाषा, दर्शन, विशेषीकरणयुक्त श्रम विभाजन, एक जटिल  विधि और राजनीतिक प्रणाली हो। गिलिन व गिलिन के अनुसार, 'सभ्यता संस्कृति का अधिक जटिल तथा विकसित रूप है।'  संस्कृति और सभ्यता में घनिष्ठ संबंध है। जिस जाति की संस्कृति उच्च होती है, वह 'सभ्य'  कहलाती है और मनुष्य 'सुसंस्कृत' कहलाते हैं। जो सुसंस्कृत है, वह सभ्य है; जो सभ्य है, वही  सुसंस्कृत है। अगर इस पर विचार करें तो सूक्ष्म-सा अंतर दृष्टिगोचर होता है।

संस्कृति और धर्म में बहुत अंतर है। धर्म व्यक्तिगत होता है। धर्म आत्मा-परमात्मा के संबंध की वस्तु है। संस्कृति समाज की वस्तु होने के कारण आपस में व्यवहार की वस्तु है। संस्कृति धर्म  से प्रेरणा लेती है और उसे प्रभावित करती है। धर्म को यदि 'सरोवर' तथा संस्कृति को 'कमल'  की उपमा दें तो यह गलत न होगा। संस्कृति ही किसी राष्ट्र या समाज की अमूल्य संपत्ति होती है। युग-युगांतर के अनवरत अध्यवसाय, प्रयोग, अनुभवों का खजाना है संस्कृति।

भारतीय सभ्यता 
सभ्यता और संस्कृति को लोगों की जीवन शैली के रूप में परिभाषित किया गया है जिसमें वस्त्राभूषण, वार्ता, भोजन, पूजा-पद्धति, और विभिन्न प्रकार की कलाएँ सम्मिलित हैं।

भारतीय संस्कृति, भारतीयों की जीवन शैली है। जनसंख्या और क्षेत्र के विस्तार के साथ-साथ, भारतीय संस्कृति में बहुत विविधता भी है। भारतीय संस्कृति में अनेक धर्मों, जातियों, क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न संस्कृतियों का मिश्रण है। भारतीय संस्कृति दुनिया की सबसे पुरानी संस्कृतियों में से एक है।

कांस्य युग के दौरान भी भारत की नगरी सभ्यता विद्यमान थी। घाटी सभ्यताएँ जैसे हड़प्पा सभ्यता 3300 ईसा पूर्व से 1300 ईसा पूर्व तक अस्तित्व में रहे थे। एक ही देश में अलग-अलग संस्कृतियाँ एक-दूसरे को एकजुट करती हैं। इस प्रकार, भारत में विशाल सांस्कृतिक विविधता के बीच एकता है। जिस तरह से लोग भारत में रहते हैं, उनकी प्रकार देश की संस्कृति परिलक्षित होती है।

भारत विविधता में एकता का देश है जहाँ विभिन्न संप्रदायों, जाति और धर्म के लोग एक साथ रहते हैं। भारतीय समाज में विविध समूह एक-दूसरे के साथ मिलकर रहते हैं। विविधता में एकता भारत की शक्ति है।
भारत की सभ्यता और संस्कृति संसार की प्राचीनतम जीवित संस्कृति है। जब यूनान, मिस्र और रोम की सभ्यताएँ मिट रही थी तब भारत की सभ्यता और संस्कृति फल-फूल रही थी। भारत, भारतीयता, भारतीय संस्कृति और सभ्यता के बारे में कुछ रोचक तथ्य निम्नलिखित हैं।

भारत बारे में रोचक तथ्य
5,000 साल पहले जब कई क्षेत्रों के निवासी घुमंतू वनवासी थे, तब भारतीयों ने सिंधु घाटी (सिंधु घाटी सभ्यता) में हड़प्पा संस्कृति की स्थापना की। भारत का अंग्रेजी में नाम 'इंडिया' भी सिंधु (इं‍डस) नदी से बना है, जिसके आस-पास की घाटी में आरंभिक सभ्‍यताएँ निवास करती थी। मान्यता है कि ईरान की पारसी भाषा में सिंधु को हिंदु कहा गया। 'हिंदुस्तान' नाम सिंधु और हिंदू का संयोजन है, जो कि हिंदुओं की भूमि के संदर्भ में प्रयुक्त होता है।

शतरंज अर्थात चतुरंग के खेल की खोज भारत में हुई थी। 'स्‍थान मूल्‍य प्रणाली' और 'दशमलव प्रणाली' का विकास भारत में हुआ था। विश्‍व का प्रथम ग्रेनाइट मंदिर तमिलनाडु के तंजौर में बृहदेश्‍वर मंदिर है। इस मंदिर के शिखर ग्रेनाइट के 80 टन के टुकड़ों से बने हैं। यह भव्‍य मंदिर राजाराज चोल के राज्‍य के दौरान केवल 5 वर्ष की अवधि में, 1004 से 1009 ईस्वी के बीच निर्मित हुआ था।

भारत विश्‍व का सबसे बड़ा लोकतंत्र और विश्‍व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है। साँप-सीढ़ी का खेल तेरहवीं शताब्‍दी में कवि संत ज्ञानदेव द्वारा तैयार किया गया था इसे मूल रूप से मोक्षपट कहते थे। इस खेल में सीढियाँ वरदानों का प्रतिनिधित्‍व करती थीं जबकि साँप अवगुण दर्शाते थे। इस खेल को कौडियों तथा पासे के साथ खेला जाता था। आगे चल कर इस खेल में कई बदलाव हुए, परन्‍तु इसका अर्थ वहीं रहा अर्थात अच्‍छे काम लोगों को स्‍वर्ग की ओर ले जाते हैं जबकि बुरे काम दोबारा जन्‍म के चक्र में डालते हैं।

दुनिया का सबसे ऊँचा क्रिकेट का मैदान हिमाचल प्रदेश के चायल नामक स्‍थान पर है जिसे समुद्रतल से 2,444 मीटर की ऊँचाई पर भूमि को समतल बना कर 1893 में तैयार किया गया था। भारत में संसार के सबसे अधिक डाकखाने हैं। भारतीय रेल संसार का सबसे बड़ा नियोक्ता है जो दस लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है। विश्‍व का सबसे प्रथम विश्‍वविद्यालय 700 ईसा पूर्व में तक्षशिला में स्‍थापित किया गया था जिसमें 60 से अधिक विषयों में 10,500 से अधिक छात्र दुनियाभर से आकर अध्‍ययन करते थे। नालंदा विश्‍वविद्यालय चौथी शताब्‍दी में स्‍थापित किया गया था जो शिक्षा के क्षेत्र में प्राचीन भारत की महानतम उपलब्धियों में से एक है। आयुर्वेद मानव जाति के लिए ज्ञात सबसे आरंभिक चिकित्‍सा शाखा है। शाखा विज्ञान के जनक माने जाने वाले चरक में 2,500 वर्ष पहले आयुर्वेद का समेकन किया था। 17वीं शताब्‍दी के आरंभ तक, ब्रिटिश राज्‍य आने से पहले भारत संसार का सबसे सम्‍पन्‍न देश था। क्रिस्‍टोफर कोलम्‍बस भारत की सम्‍पन्‍नता से आकर्षित हो कर भारत आने का समुद्री मार्ग खोजने चला और उसने गलती से अमेरिका पहुँच गया।

नौवहन का जन्‍म 6,000 वर्ष पहले सिंध नदी में हुआ था। दुनिया का सबसे पहला नौवहन संस्‍कृ‍त शब्‍द नव गति से उत्‍पन्‍न हुआ है। शब्‍द नौसेना का मूल भी संस्‍कृत है। भास्‍कराचार्य ने खगोल शास्‍त्र के कई सौ साल पहले पृथ्‍वी द्वारा सूर्य के चारों ओर चक्‍कर लगाने में लगने वाले सही समय की गणना की थी। उनकी गणना के अनुसार सूर्य की परिक्रमा में पृथ्‍वी को 365.258756484 दिन का समय लगता है। भारतीय गणितज्ञ बुधायन द्वारा 'पाई' का मूल्‍य ज्ञात किया गया था और पाइथागोरस के प्रमेय की संकल्‍पना को उन्‍होंने ही सर्वप्रथम समझाया था। उन्‍होंने इसकी खोज छठी शताब्‍दी में, यूरोपीय गणितज्ञों से काफी पहले की गई थी। बीजगणित, त्रिकोण मिति और कलन का उद्भव भी भारत में हुआ था। चतुष्‍पद समीकरण का उपयोग 11वीं शताब्‍दी में श्रीधराचार्य द्वारा किया गया था। ग्रीक तथा रोमनों द्वारा उपयोग की गई की सबसे बड़ी संख्‍या 106 थी जबकि हिन्‍दुओं ने 10*53 जितने बड़े अंकों का उपयोग (अर्थात 10 की घात 53), के साथ विशिष्‍ट नाम ईसा से 5,000 वर्ष पूर्व ही कर दिया था।

वर्ष 1896 तक भारत विश्‍व में हीरे का एकमात्र स्रोत था। हिमाचल पर्वत में द्रास और सुरु नदियों के बीच लद्दाख घाटी में स्थित बेलीपुल विश्‍व‍ का सबसे ऊँचा पुल है जिसका निर्माण अगस्‍त 1982 में भारतीय सेना द्वारा किया गया था। सुश्रुत को शल्‍य चिकित्‍सा का जनक माना जाता है। लगभग 2,600 वर्ष पहले सुश्रुत और उनके सहयोगियों ने मोतियाबिंद, कृत्रिम अंगों को लगना, शल्‍य क्रिया द्वारा प्रसव, अस्थिभंग जोड़ना, मूत्राशय की पथरी, प्‍लास्टिक सर्जरी और मस्तिष्‍क की सफल शल्‍य क्रियाएँ की थीं। निश्‍चेतक का उपयोग भारतीय प्राचीन चिकित्‍सा विज्ञान में भली भांति ज्ञात था। शारीरिकी, भ्रूण विज्ञान, पाचन, चयापचय, शरीर क्रिया विज्ञान, इटियोलॉजी, आनुवांशिकी और प्रतिरक्षा विज्ञान आदि विषय भी प्राचीन भारतीय ग्रंथों में पाए जाते हैं।

आज भारत से अनेक देशों को सॉफ्टवेयर का निर्यात किया जाता है। भारत में जन्मे हिन्दू, बौद्ध, जैन और सिक्‍ख पंथों का पालन दुनिया की आबादी का 25 प्रतिशत हिस्‍सा करता है। इस्‍लाम भारत का और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा धर्म है। भारत में 3,00,000 मस्जिदें हैं जो किसी अन्‍य देश से अधिक हैं, यहाँ तक कि मुस्लिम देशों से भी अधिक।

भारत में सबसे पुराना यूरोपियन चर्च और सिनागोग कोचीन शहर में है। इनका निर्माण क्रमश: 1503 और 1568 में किया गया था। यहूदी भारत में 200 ईसा पूर्व में आ गये थे जबकि ईसाई मत सन् 52 में भारत में आया। 10वीं शताब्‍दी में तिरुपति में बना विष्‍णु मंदिर विश्‍व का सबसे बड़ा धार्मिक गंतव्‍य है। रोम या मक्‍का धार्मिक स्‍थलों से भी बड़े इस स्‍थान पर प्रतिदिन औसतन 30 हजार श्रद्धालु आते हैं और लगभग 60 लाख अमेरिकी डॉलर प्रति दिन का चढ़ावा आता है। सिक्‍ख मत के प्रसिद्ध स्‍वर्ण मंदिर की स्‍थापना सन् 1577 में गई थी। वाराणसी संसार के प्राचीनतम नगरों में से एक है। भगवान बुद्ध ईसा से लगभग 500 वर्ष पूर्व में यहाँ आये थे।

भारत द्वारा श्रीलंका, तिब्‍बत, भूटान, अफगानिस्‍तान और बांग्‍लादेश के 3,00,000 से अधिक शरणार्थियों को सुरक्षा दी जाती है, जो धार्मिक और राजनैतिक अभियोजन के फलस्‍वरूप वहाँ से निकले हैं। माननीय दलाई लामा तिब्‍बती बौद्ध धर्म के निर्वासित धार्मिक नेता है, जो उत्तरी भारत के धर्मशाला में अपने निर्वासन में रह रहे हैं। युद्ध कलाओं का विकास सबसे पहले भारत में किया गया और भारतीय धर्म प्रचारकों द्वारा वे पूरे एशिया में विकसित हुईं। योग का उद्भव भारत में हुआ है और यह 5,000 वर्ष से अधिक समय से मौजूद हैI

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