तन्वी गौरव श्रीवास्तव (प्रतिनिधि कवयित्रियाँ 2020)

लेखिका तन्वी गौरव श्रीवास्तव, यह पेशे से शिक्षिका हैं; मूलतः अपने कविताओं और स्केचेज़ के लिए जानी जाती हैं। वह कविताएँ हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओँ में लिखती हैं। इनकी लिखी कविताएँ समय-समय पर राष्ट्रीय -अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक संकलनों और ब्लॉग्स पर प्रकाशित होती रही है। उनमे से कुछ हैं जैसे ;'Voice Of Humanity VOL4 ', 'The World Anthology Of Poetry, Tainan ', 'Healing The Planet Through Sublime Arts ' ‘She THE Shakti’…
वे अपनी अधबुने कविताओं और परिवार के साथ वडोदरा में रहती हैं।

तन्वी गौरव श्रीवास्तव
मुड़ के नहीं देखे…!

बेतुकी तालीम रही
जो ज़िन्दगी के हिज़्ज़ों को दुरुस्त करते भी थे
पर जो अब के सबक सीखे, तो फिर
मुड़ के नहीं देखे।

पुरखों की दौलत रही
वो चुभते गहने दुआओं वाले भी थे
पर अब के जो इन साजिशों से निकले, तो फिर
मुड़ के नहीं देखे।

ख्वाहिशों के मरीज भी थे
फरमाइशों के गुलाम भी थे
पर जो अब के इन रंजिशों से उबरे, तो फिर
मुड़ के नहीं देखे।

दुआओं की ढहती इमारत रही
मन्नतों पर घिसती सीढ़ियाँ भी थी
पर जो अब के हम खुदा हुए तो फिर
मुड़ के नहीं देखे।

हर दौड़ में हारा किये
वो नाम शाखों से बेमन उतारे भी गए
पर जो अब के उड़ते परिंदे हुए, तो फिर
मुड़ के नहीं देखे।


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