बाल कविता: अनुज चतुर्वेदी 'अनुभव'

बाप तो बाप होता है


बाप तो बाप होता है।
जब पहली बार मुँह देखता है संतान का
शुक्रिया अदा करता है भगवान का।
संतति को देख-देख प्रसन्न होता है।
भाई साहब! बाप तो बाप होता है।
रात- रात भर जाग, रोते हुए बच्चे को चुप कराता है।
सीने से लगा बेटे को, सुलाता है। 
गलियों में, छत पर घुमाता है।
इसके बाद भी बच्चे की आँख में आँसू देख, स्वयं रोता है।
भाई साहब! बाप तो बाप होता है।

बच्चे को बाहों के पलने में झुलाता है। 
पेट पर सुलाता है। 
एक नन्ही किलकारी की खातिर घोड़ा बन जाता है।
इस तरह बच्चे में खुशी के बीज बोता है।
भाई साहब! बाप तो बाप होता है। 

जिस दिन घर में नया मेहमान आता है।
उसी दिन से बाप सपनों की दुनिया सजाता है।
दिन हो या रात, संतान के भविष्य के सपने संजोता है। 
भाई साहब! बाप तो बाप होता है।

बच्चा उसके जीवन में यूँ बस जाता है,
कि बच्चे की खातिरपेट भर खाना ना खाता है।
बढ़ा देता है अपना परिश्रम, अपनी जिंदगी को दुहता है।
भाई साहब! बाप तो बाप होता है।

अपने हाथ से खिलाता है। 
उंगली पकड़कर चलाता है। 
खेलता है, बच्चे के साथ, उसको पढ़ाता है।
बच्चा ही उसका संसार होता है 
भाई साहब! बाप तो बाप होता है। 

बड़ा होता है बेटा, तो बाप को आँखें दिखाता है।
बाप सबके सामने उसे समझाता है, तन्हाई में रोता है। 
भाई साहब! बाप तो बाप होता है।

फिर भी तो काम वही बाप आता है।
झेल कर मुसीबत भी बच्चों को बचाता है। 
जीते जी उसका क्यों सम्मान नहीं होता है?
भाई साहब! बाप तो बाप होता है। बाप तो बाप होता है!

संक्षिप्त परिचय
अनुज चतुर्वेदी 'अनुभव'
माता- श्रीमती पूनम चतुर्वेदी
पिता- आचार्य नीरज शास्त्री
जन्म तिथि- 17 मार्च 2007
शिक्षा-कक्षा आठ में अध्ययनरत
प्रकाशित कृति- 'ऊँच नीच का फाफड़ा' (बाल कविता संग्रह)
बाल सदस्य- तुलसी साहित्य संस्कृति अकादमी, मथुरा
पुरस्कार/ सम्मान-1- डॉ रमन दास पंड्या स्मृति साहित्य पुरस्कार-2015
2- स्वरचित काव्य पाठ पुरस्कार (उत्तर प्रदेश सरकार)
3- रामायण प्रतियोगिता पुरस्कार- सांस्कृतिक प्रज्ञा संस्थान, बीकानेर
4-शहीद कैप्टन राकेश गायन प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार
पता- 34/2, लाजपत नगर, एन. एच-2, मथुरा-281004 (उत्तर प्रदेश)
संपर्क सूत्र- +91 925 9146669
मेल- anujchaturvedianubhav8888@gmail.com

सेतु, अक्टूबर 2020

6 comments :

  1. सुंदर कविता हेतु हार्दिक बधाई। आज के परिवेश में बाप को बाप समझने वाले लोग दुर्लभ हैं। बाप पर कविता लिखना आसान है किंतु बाप को समझना अत्यंत कठिन। बहुत बहुत बधाई।

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  2. अनुज चतुर्वेदी की बाल कविता बहुत ही उत्तम रचना है। इतनी कम उम्र में जबकि बहुत से बच्चे यह भी नहीं समझते कि कविता क्या होती है। अनुज की कविता सोचने पर विवश करती है।
    मेरी ओर से अनुज को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
    सादर
    डाॅ.दिनेश पाठक‘शशि’
    28, सारंग विहार, मथुरा-281006
    मोबाइल-9870631805
    ईमेल-drdinesh57@gmail.com

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  3. प्रिय अनुज अनुभव बहुत मार्मिक रचना प्रस्तुत की है पिता का बहुत हृदयग्राही चित्रण किया है बहुत बहुत धन्यवाद सहृदय अभिवादन करते हैं।

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  4. बेटा अगर 'अनुज' जैसा हो,
    तो बाप का मस्तक ऊँचा हो जाता है,
    वो समाज में बेटे की प्रशंसा सुन इतराता है,
    भाई साहब! बाप तो बाप होता है।

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  5. बहुत सुंदर कविता है। चिंतन भी। बहुत बहुत बधाइयां। शाबाश।

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  6. सटिक यथार्थ, सुंदर अभिव्यक्ति बहुत बहुत शुभकामनाएं

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