जातिद्वेष से बचाव


अनुराग शर्मा
27 अक्टूबर, 2018 का दिन पिट्सबर्ग को गम्भीर घाव दे गया क्योंकि उस दिन प्रातः एक यहूदी मंदिर 'ट्री ऑफ़ लाइफ़' में शनिवासरीय सेवा के बीच में एक बंदूकधारी ने आकर अंधाधुंध गोलियाँ चलाईं और 11 व्यक्तियों की जान ले ली। आश्चर्य की बात नहीं कि पुलिस की गोली से घायल हुए हत्यारे की चिकित्सा कर उसे जीवित बचाने वाले आपात्कालीन कर्मियों में यहूदी भी थे

जातिगत द्वेष और हिंसा मानवता के सबसे बड़े शत्रुओं में से हैं। जातिगत हिंसा की घटनाएँ विश्वव्यापी हैं। कूपमण्डूकत्व, अल्पज्ञता, वैविध्य से भय, विशिष्ट मानसिक अवस्थाएँ आदि जैसे कारक तो हैं ही, घातक हथियारों का सुलभ होना ऐसी घटनाओं को अंज़ाम देना सरल कर देता है। शायद हमारे प्रयासों में भी कुछ कमी है, और कुछ कमी राजनैतिक इच्छाशक्ति की भी है। कारण जो भी हों, निर्दोषो के प्रति ऐसे नृशंसता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और इसे रोकना हमारी प्राथमिकताओं में होना चाहिये।  

दुखी मन से, आपका शुभाकांक्षी,
अनुराग शर्मा

5 comments :

  1. धर्मपाल महेंद्र जैनNovember 2, 2018 at 7:13 AM

    हृदय विदारक घटना पर सटीक सम्पादकीय

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  2. मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे ने बाँट दिया इंसान को
    धरती बाँटी अंबर बाँटा मत बाँटों इंसान को.
    दुखद घटना । ॐ ।

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  3. मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे ने बाँट दिया इंसान को
    धरती बाँटी अंबर बाँटा मत बाँटों इंसान को.
    दुखद घटना । ॐ ।

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  4. बेहद दुखद घटना है यह और इस तरह की घटनाएं वर्तमान दौर में बढ़ भी रही है। जिसका बड़ा कारण यही है कि जातिगत भेदभाव आज बड़ी तेजी बढ़ने लगा है, जिसे पूर्ण रूप से रोक पाना तो अभी संभव नहीं है किन्तु इसे कम करने का प्रयास अवश्य किया जा सकता है।

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  5. बहुत ही दुखद घटना

    अफ़सोस है कि हम सीख बिना उनकी आवश्यकता को बताए देते रहते हैं. यह हम सभी को समझना चाहिए कि अभौतिक चीजों को समझना और उन्हें स्वीकार करना सभी के लिए बराबर नहीं होता है.

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