जगदीप सिंह दांगी - विनम्र श्रद्धाञ्जलि


हिंदी का पहला ब्राउज़र बनाने वाले मृदुभाषी इंजीनियर श्री जगदीप सिंह दांगी का पिछले माह निधन हो गया। दुर्भाग्य की बात है कि एक पुस्तक छपने को भी समाचार बनाने वाले हिंदी माध्यम को उनके अवसान की खबर भी न लगी। लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान बनाने वाले श्री दांगी ने कंप्यूटर क्षेत्र में हिंदी की अनुपस्थिति के कारण हिंदीभाषी जनसामान्य को होने वाली कठिनाई को पहचाना और अपने स्तर पर हिंदी को कम्प्यूटर क्षेत्र तक लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिंदी शब्दों के अज्ञान से जूझते कम्प्यूटर प्रयोक्ताओं की सुविधा के लिये उन्होंने हिंदी शब्दकोश बनाया। अनेक सम्मानों व पुरस्कारों के विजेता श्री दांगी ने हिंदी टंकण की कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य से प्रखर देवनागरी लिपिक तथा पूर्व-यूनिकोड युग के विभिन्न प्रचलित हिंदी फॉण्ट्स के कारण होने वाली असुविधा से बचाने के लिये प्रखर फ़ॉन्ट परिवर्तक भी बनाया था ताकि उनमें लिखी जानकारी को यूनिकोड में बदलकर खोज, प्रसार आदि के लिये सहज उपलब्ध कराया जा सके। भाषा-सेतु परियोजना में उन्होंने कम्प्यूटर पर विभिन्न भारतीय भाषाओं को जोड़ने का काम किया।
“किसी भी भाषा को कंप्यूटर अपने तरीके से समझता है, अतः अंग्रेज़ी या दूसरी किसी भाषा में होने वाला हर कार्य हिंदी में भी हो सकता है। बस उसे हिंदी में प्रोग्राम किए जाने की आवश्यकता है।” - जगदीप सिंह दांगी
मध्य प्रदेश के वैशाली जिले के गंजवासौदा तालुका के ग्राम 'भुंआरा' के एक कृषक परिवार में जन्मे जगदीप सिंह दांगी को बचपन में पोलियो हो गया था। बाद में एक ग़लत टीके के कारण उनकी एक आँख भी खराब हो गई थी। ग्राम में विद्यालय न होने के कारण उनकी आरम्भिक शिक्षा-दीक्षा गंजवासौदा में हुई। हायर सेकेंडरी की परीक्षा में उन्होंने अपने जनपद में प्रथम स्थान पाया था और सन् 2001 में उन्होंने बीई (अभियांत्रिकी) की शिक्षा पूर्ण की। दुर्भाग्य से स्वास्थ्य समस्याओं ने विलक्षण प्रतिभा के धनी इस जुझारू व्यक्ति पीछा नहीं छोड़ा और उन्होंने वृक्कीय समस्याओं (renal failure) का सामना डटकर किया।

दांगी जी के फ़ेसबुक पृष्ठ पर उनके अवसान की पोस्ट


'रचनाकार' के सम्पादक तथा हिंदी तकनीक के एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर श्री रवि रतलामी द्वारा बारह वर्ष पहले प्रकाशित दांगी जी का साक्षात्कार उनके बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान करता है। इच्छुक पाठक निम्न कड़ी पर इसे पढ़ सकते हैं - सॉफ़्टवेयर इंजीनियर जगदीप डांगी से एक खास साक्षात्कार

छह नवम्बर 2017 की उनकी फ़ेसबुक पोस्ट:
जिंदगी हर कदम एक नई जंग है - आज से मेरी कैंसर के साथ जंग शुरू। मित्रों दुआ करना कि मैं यह जंग जीत सकूं और आप सभी के बीच में बना रहूं। मेरी जिंदगी एक पहेली बन गई बचपन से एक के बाद एक बीमारी क्या जिंदगी इतनी कठिन और पीड़ादायी होती है। मेरी समझ से परे है। मित्रों आप सभी की दुआएं मुझे हमेशा संकट में एक असीम ऊर्जा देतीं हैं। आगे ईश्वर इच्छा। 🙏
दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में इलाज जारी है। दो थैरेपी पैरालिल चालू हैं। साप्ताहिक टार्गेटेड थैरेपी (Cetuximab) तथा प्रतिदिन (Radio therapy). अभी तक टार्गेटेड थैरेपी की तीन साइकिल पूरी हो चुकी हैं शेष पांच साइकिल होनी है।बहुत कष्टकारी समय है लेकिन उसी में जीवन तलाशने की एक उम्मीद भी लिए हुए हूँ । 🎈🙏

कैंसर ने अंततः उन्हें हमसे छीन लिया और इस प्रकार इंडिक कम्प्यूटिंग को अपूर्णनीय क्षति हुई है।

अनुराग शर्मा
सेतु परिवार की ओर से जगदीप सिंह दांगी को विनम्र श्रद्धाञ्जलि!

सेतु के अङ्ग्रेज़ी संस्करण ने वार्षिक सेतु सम्मान की परम्परा जारी रखते हुए विजेताओं की घोषणा की है, जिसे सेतु के अंग्रेज़ी संस्करण पर पढ़ा जा सकता है।

सेतु में हिंदी भाषा की संरचना, लिपि, व्याकरण, आदि पर निरंतर चलते विमर्श की कड़ी में इस अंक में इस बार हम बहुवचन सम्बोधन पर चर्चा कर रहे हैं।

हिंदी और अंग्रेज़ी में कुल 52 अंक, छह सौ लेखक, और 2,100 रचनाओं के साथ आपकी प्रिय पत्रिका सेतु, पाँच लाख अद्वितीय क्लिक्स का लक्ष्य पार कर चुकी है। पिछले दो वर्षों में सेतु ने दो पुस्तकों का प्रकाशन भी किया है जो एमेज़ॉन के माध्यम से संसार के अधिकांश भागों में उपलब्ध हैं -


आपकी राय और सुझावों का सदा स्वागत है, अवश्य साझा कीजिये।

शुभाकांक्षी,
अनुराग शर्मा



6 comments :

  1. Dharmpal Mahendra JainDecember 1, 2018 at 8:27 AM

    जगदीप सिंह जी दांगी को विनम्र श्रद्धाञ्जलि!

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  2. जगदीप सिंह दागी के निधन का समाचार बड़ा कष्टकारी है। मैं फेसबुक पर उन से सम्पर्क में रहा । उन की पुण्यात्मा को श्रृद्धांजलि ।

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  3. श्री जगदीप दांगी जी का जुझारू जीवन सबके लिये प्रेरणादायी है । उनके जाने से कई तकनीकी कार्यों को विराम लगा । हम उनके सदा आभारी रहेंगे । उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि ।

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  4. I thank to Setu team for the repeated again the valuable interview with revered Sri Jagdeep Singh Dangi

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  5. I thank to Setu team for the repeated again the valuable interview with revered Sri Jagdeep Singh Dangi

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  6. नमन नैट पर हिंदी के प्रणेता को...

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