व्यंग्य: एक बकरे की आपबीती


बरसात के बाद निकली धूप सेंककर बकरी रानी ऊंघते हुए अपना बदन गरमा रही थी, "उफ़ ये बारिश तो हड्डी कँपकंपा देती है।"

"ए रानी उठो न, कुछ दिन तो साथ बिता लो" अनमने ढंग से चिढ़ती बकरी की नींद खुल गई।  वह बकरे पर नाराजगी दिखा रही थी। ऐसे भी बीबी के साथ कुछ भी गलत हो कुसूरवार तो शौहर ही होता है। लेकिन वह एक सभ्य नागरिक की तरह बोली, "अजी चलो कहीं घुमा लाओ।एक ही जगह रहते रहते ऊबने लगी हूँ।"

बकरा भला अपनी प्राणप्रिया की बात कैसे काटता, निकल पड़ी जोड़ी तफरीह के लिए। रास्ते में एक जगह बकरी का बड़ा सा पोस्टर देख मन खुश हो गया।

"देखो, तुम कहती थी न फोटो खिंचाने के लिये! किसी ने बिना बताये खींचकर यहाँ दीवार पर चिपका दिया है। तुम हो ही इत्ती खुबसुरत।" पत्नीश्री पर दीवानगी छलक रही थी। पास जाकर देखा, लिखा था  ... इस चुनाव में बकरी को वोट दो।

"ये लो जी बिना मांगे हमे कुछ दिया जा रहा है।" 
"इ वोट क्या होता है?"
"कुछ महंगी चीज होगी, छोडो न, मुफ्त में जो मिल जाए, कम है क्या?" 
"उधर देखो भीड़ आ रही है!"
"हाँ, सब भोंपू पर कह रहे हैं कि बकरी को वोट दो। लगता है अच्छे दिन आ गये, अब ये इंसान हम निरीह जानवरों की भी चिन्ता करने लगे।"
"हाँ पगली, बेकार कोसते थे इन्हें कि जानवर हम नहीं बल्कि ये ही हैं जो सब कुछ, कच्चा-पक्का, घास-पात के साथ हड्डी तक चबा जाते हैं।" 
"किस दिन दिया जाएगा वोट? हम तो लाली लगा कर आयेंगे, और सुनो तुम भी सेन्ट-वेन्ट मार कर आना। बहुत बदबू देते हो। हमें इतना मान दिया जा रहा है, इसका ख्याल तो रखना होगा।"
"हाँ, हम बुद्धू हैं क्या? इतवार को वोट दिया जायेगा।"

***
"सुनते हो? सब आपस में बात कर रहे हैं कि बकरी को वोट दिया। लेकिन हमें तो कुछ नहीं मिला। अब तो शाम भी होने वाली है।"
"थोड़ा इन्तजार करो ... मिलेगा ज़रूर। इतने लोग झूठ तो नहीं कह सकते। ध्यान से सुनो, लोग क्या कह रहे हैं।"

" ... भीड़ बढ़ती जा रही है। सिंह बाबु की विजय का पुरा चांस है। लगता है बकरी जीत जाएगी...। बकरी को जिताने में  साल-भर खून-पसीना एक हो गया। अरे, अरे, देखो वह बकरी... वाह, उसके साथ ही मूँछों पर ताव देता हुआ बकरा भी मिल गया।"

चादर फेंक कर बकरा पकड़ा गया, बकरी मिमियाती रह गई। वोट का मतलब अब उसे कुछ-कुछ समझ आने लगा था।

दावत का दौर चल रहा था, ... बकरी की जीत तो निश्चित ही है।

1 comment :

  1. कहते हैं लोकतंत्र में जनता की जीत होती है. शायद इसी तरह होती है.

    शानदार व्यंग्य.

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