अक्षरों के प्रति ईमानदारी लेखन को सार्थक बनाती है

(अर्चना पांडेय की रिपोर्ट)

 “अक्षरों के प्रति ईमानदारी लेखन को सार्थक बनाता है। लेखन की जिम्मेदारी अगली पीढ़ी की है। अगर आपके भीतर बेचैनी है तो वह शब्दों के रूप में अवश्य बाहर आती है। लेकिन उससे यह नहीं सोचना चाहिए कि इससे हमें क्या लाभ है।“ यह उद्गार हिंदी की वरिष्ठ साहित्यकार सुदर्शना द्विवेदी  ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में हेमंत फाउंडेशन पुरस्कार समारोह मुम्बई में व्यक्त किए। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन तथा ऋतुप्रिया खरे की गाई हुई सरस्वती वंदना मूर्धन्य कवि सोहनलाल द्विवेदी की रचना “वंदना के इन स्वरों में” से हुआ। अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था की अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने अपने स्वागत भाषण में कहा- “आज यह पुरस्कार अपने 20वें पायदान पर हैं। इन 20 वर्षों में कई बार मनोबल टूटा है लेकिन किसी अदृश्य प्रेरणा से हम चलते रहे। कुछ इस अंदाज में कि... धूल पोछ, कांटे मत गिन, छाले मत सहला... टकराएगा नहीं आज उद्धत लहरों से.... कौन  ज्वार फिर तुझे दिवस तक पहुंचाएगा।”

आयोजन की प्रस्तावना एवं संस्था का परिचय कथाकार संस्था की सचिव प्रमिला वर्मा ने दिया। उन्होंने विजय वर्मा कथा सम्मान एवं हेमंत स्मृति कविता सम्मान की पिछले बीस वर्षों की जानकारी दी ।विजय वर्मा कथा सम्मान के लिए चयनित पुस्तक "यीशु की कीलें" के लिए सुप्रसिद्ध पत्रकार साहित्यकार हरीश पाठक ने कहा कि “किरण सिंह की कहानियाँ धरातल से उठकर बहुत ही ताकतवर कहानियाँ है। पाठक एक बार पढ़ना शुरू करता है तो बगैर पूरा पढे छोड़ नहीं सकता।”

हेमंत स्मृति कविता सम्मान के लिए सुमीता केशवा की चयनित पुस्तक "चाय की चुस्कियो में तुम" पर बोलते हुए भोपाल से पधारे डॉ राजेश श्रीवास्तव निदेशक रामायण शोध केंद्र भोपाल ने कहा :जब शब्द संवेदना से जुड़ जाते हैं तभी सच्ची कविता का जन्म होता है। इस दृष्टि से सुमीता जी की कविताएँ खरी  हैं। वे ह्दय की अंतरतम गहराइयों से कविता लिखती हैं। यही उनकी मौलिक विशेषता है।”

20 वाँ विजय वर्मा तथा सम्मान एवं 17वाँ हेमंत स्मृति कविता सम्मान वरिष्ठ साहित्यकार सुदर्शना द्विवेदी के हाथों प्रदान किए गए।

किरण सिंह ने विजय वर्मा तथा सम्मान प्राप्त करने के पश्चात धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा: मैं कल्पना को अनुभव से बड़ा सच मानती हूं । अनुभव की सीमा है कल्पना ,कई जिंदगियों के साथ संवेदना के आधार पर जुड़ने से प्राप्त सच है कल्पना की आंखों से देखी गई सच्चाई को जब दृष्टि मिलती है तब 'फेंटेसी 'संभव हो पाती है। इसलिए मेरे लिए लेखन का निर्धारक तत्व 'विजन' या दृष्टिकोण है। उन्होंने आयोजक हेमंत फाउंडेशन को धन्यवाद देते हुए अपना सम्मान पिछले कुछ समय से एक एक कर बिछड़ते चले गए रचनाकारों की स्मृति को समर्पित किया।

सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं हमारी विशेष अतिथि अचला नागर ने अपने वक्तव्य में महान साहित्यकारों को याद करते हुए बाबूजी अमृतलाल नागर के संस्मरण सुनाए।

कवि गजल कार देवमणि पांडे ने कार्यक्रम का संचालन किया ।एवं कवयित्री आभा दवे ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। समारोह में भोपाल से आई वरिष्ठ कवयित्री डॉ क्षमा पांडे, रजनी मोरवाल ,उमाकांत बाजपेयी, जुबेर आजमी, रासबिहारी पांडे, संगीता बाजपेयी, वनमाली चतुर्वेदी, रानी मोटवानी, रितु प्रिया खरे, शिल्पा सोनटक्के, लक्ष्मी यादव, धीरेंद्र अस्थाना, ललिता अस्थाना, राजेश विक्रांत, अर्चना पांडे एवं आई सी एस आई के डीन तरुण पांडे विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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