लघुकथा: सलाम रिश्ता

रामकुमार आत्रेय

रामकुमार आत्रेय

दादा जी की दृष्टि पोते द्वारा तैयार किये गए मोबाइल विडियो पर जमी हुई थी। पोते ने उन्हें वह विडियो देखने का आग्रह करते हुए बताया था कि वे विडियो को देखकर रोमांचित तो होंगे ही, साथ में विडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति को सलाम किये बिना नहीं रह पायेंगे। ऐसे में निश्चय ही वे पोते द्वारा किये गए एक बढ़िया काम की वजह से उसकी पीठ भी थपथपाये बिना नहीं रह पायेंगे। वैसे तो वे हमेशा ही इसी मोबाइल को लेकर भला-बुरा कहते ही रहे हैं।
दादा जी ने विडियो में देखा कि, एक व्यक्ति चलती हुई रेलगाड़ी में सवार होने की कोशिश करते हुए नीचे जा गिरा। तब सौभाग्य और दुर्भाग्य उसके दायें-बायें खड़े थे। वह मरने से तो बच गया लेकिन उसकी बाईं टांग कट गई। वह रेलवे ट्रैक पर पड़ा दर्द से बिलबिला रहा था। प्लेटफार्म पर खड़े कई लोग विडियो बनाने में जुट गए। उस व्यक्ति ने थोड़ी देर तक प्रतीक्षा की कि कोई न कोई उसकी सहायता करने के लिए उसके समीप अवश्य आएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो उसने स्वयं हिम्मत की। वह लड़खड़ाता हुआ प्लेटफार्म की दीवार पकड़ कर किसी तरह उठ खड़ा हुआ। फिर नीचे झुककर उसने अपनी कटी हुई टांग उठाकर प्लेटफार्म पर रख दी। फिर वह प्लेटफार्म पर चढ़ने का प्रयास करने लगा। तभी पुलिस के दो जवान सिपाही कहीं से दौड़ते हुए। उन्हों ने उसकी दोनों बाँहें थाम कर उसे ऊपर खींच लिया।
तभी पोता घर से बाहर आया तो उसने दादा जी को चुपचाप आँसू बहाते पाया। आश्चर्य चकित होते हुए उसने दादा जी से कहा, " इस व्यक्ति की जीवटता तथा साहस को देखकर सलाम करना चाहिए था। और आप हैं कि चुपचाप आँसू बहाये जा रहे हैं। मुझे शाबाशी देना तो दूर की बात रही।"
दादा जी ने आँसू पोंछते हुए भीगे मन से उत्तर दिया, "बेटा, मैं इस विडियो को देखकर हतप्रभ रह गया हूँ। उस व्यक्ति का जीवट और साहस तो सचमुच सलाम करने के लायक है। लेकिन तुम भी उन तमाशबीन लोगों की भीड़ का हिस्सा बन गए जो उस की सहायता करने की बजाय किसी उत्सव की तरह रोमांचित होकर उसका विडियो बनाने लगे। लगता है हमारी संवेदनाओं को ‘हमारा ऑनलाइन होना’ निगल गया है।
पोते ने दादा जी की बात का मर्म न समझते हुए पूछा, "दादा जी, आप ऐसी-वैसी बात पर आँसू बहाने वाले जीव तो हैं नहीं; जरूर ही विडियो में दिखाई देने वाला आदमी आपका कुछ न कुछ लगता होगा। बताइए न प्लीज, क्या रिश्ता है इस व्यक्ति से आपका?"
"जो रिश्ता आँसू का किसी आँख से, दर्द का एक दिल से और इन्सानियत का किसी सच्चे इंसान से होता है, वही रिश्ता उस विडियो वाले व्यक्ति से मेरा है बेटा!"
पोते को लगा कि दादा जी का दिमाग फिर गया है शायद।

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