पुस्तक समीक्षा: मन के धागे

समीक्षक: डॉ. उर्मिला पोरवाल

हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं व्याख्याता, शेषाद्रीपुरम महाविद्यालय बैंगलोर


पुस्तक: मन के धागे (कहानी संग्रह)
रचनाकार: अर्चना अग्रवाल
प्रकाशक: राजमंगल पब्लिशर्स अलीगढ़
पृष्ठ: 152, मूल्य: ₹ 175.00 रुपये, प्रकाशन वर्ष: 2019


हाल ही में साहित्यिक समूह के माध्यम से अर्चना जी से परिचय हुआ, परिचय के साथ ही उनका स्नेहिल आग्रह पुस्तक समीक्षा का, मैंने सहर्ष स्वीकृति प्रदान की और कुछ ही दिनों में डाक से पुस्तक हाथों में।

सर्वप्रथम जब पुस्तक हाथों में आई तब शीर्षक ने ध्यान खींचा, उत्सुकतावश उसी समय सरसरी निगाह से पुस्तक पढ़ी, और एक बात तो स्पष्ट हो गई कि अर्चना जी ने समीक्षा के लिए मेरा ही चयन क्यों किया। पुस्तक में कुछ कहानियों का आधार दिल्ली तो कुछ कहानियों का आधार बैंगलोर है।

दिल्ली निवासी अर्चनाजी वर्तमान समय में बैंगलोर में रहती हैं, शैक्षिक तौर पर एम ए, बीएड, लिखने में उनकी रूचि बालपन से ही रही, महाविद्यालयीन समय में लेखन विधा जीवन का अहम हिस्सा बनी और अर्चना जी ने स्वतंत्र रूप से लेखन कार्य प्रारंभ किया। यदि अर्चनाजी की लेखन प्रकृति का वर्णन करूँ तो उसकी तरफ वे स्वयं ही इशारा करती हैं, पुस्तक मैं अपनी बात लिखते हुए अर्चनाजी कहतीं है कि "मानव मन की सूक्ष्म संवेदनाओं का अंकन सदैव मेरा प्रिय विषय रहा है।"

दिल्ली विश्वविद्यालय में दो बार सर्वश्रेष्ठ लेखन पुरस्कार प्राप्त करते हुए जर्मनी में भी इनकी कविता को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। राजमंगल प्रकाशन के अंतर्गत ही इनकी प्रथम कृति आँसू और दिल प्रकाशित हुई और यह इनकी द्वितीय कृति है। मन के धागे दिल्ली विश्वविद्यालय से पुरस्कार प्राप्त कहानियों का संग्रह है। जिसमें 10 कहानियाँ संकलित है। पुस्तक का शीर्षक सटीक और तर्कसंगत ही प्रतीत होता है इन कहानियों में कई भाव रूपी धागे छुपे हुए हैं जो कि अपने अपने अंदाज में मन से संपर्क करते हैं। जोकि उनके लेखन का केंद्र बिंदु भी है।

पुस्तक का प्रत्येक अध्याय नारी मन पर केंद्रित है, प्रत्येक कहानी नारी के संघर्ष और उसके एक नये स्वरूप को परिभाषित करती सी प्रतीत होती है। पुस्तक में भावनाओं और विचारों के नन्हे-नन्हे अंश...अपने आप में एक कहानी-सी कहते है...। रचनाओं में लौकिकता और अलौकिक प्रेम, मानवीय दर्द, नारी चेतना, लोकोन्मुखी देशज रंग, स्थानीयता, निष्ठा और समर्पण के स्वर मानव मन को छूते है।

वैदेही कहानी एक तरफ सामाजिक बंधन और धन लोलुपता से उपजी मनोव्यथा का चित्रण करती है तो दूसरी तरफ नारी की सक्षमता और स्वाभिमानीता का चित्रण भी करती है। एक वो लड़की कहानी तो लगभग जगत व्यापी व्यभिचार को इस प्रकार उजागर करती है कि पाठक भावुक हो जाता है। ख्वाबों का आसमान हकीकत की ज़मीं, यह कहानी तो लगभग प्रत्येक युवा की कहानी है जहाँ अनदेखा आकर्षण हो और एक अबोला मीठा रिश्ता निर्मित हो जाता है।कुछ पा लिया कुछ खो दिया कहानी आधुनिकता का प्रस्तुतीकरण करती प्रतीत होती है जहाँ प्रेम की नई परिभाषा है। नारी द्वारा स्वतंत्र सहजीवन की पद्धति का स्वीकरण कहीं न कहीं पाश्चात्य परंपरा का अनुगमन है।सांसों का सफर कहानी एक तरफ नारी की विवशता प्रदर्शित करती है तो दूसरी तरफ पुरुष वर्ग का सहयोगी पक्ष भी उजागर करती है। कहानी का अंत आहत कर जाता है। घुंघरू कहानी में विश्वव्यापी अपराध एसिड प्रहार को आधार बनाकर अर्चना जी ने नारी का जीवन संघर्ष और उसकी विपन्नता से संपन्नता की यात्रा का सुंदर चित्रण किया है। गंगा की गोद में कहानी महिला के आध्यात्मिक पक्ष को उजागर करती है जीवन पर्यंत नारी की तपस्या और मातृभूमि से प्रेम का अनूठा उदाहरण इस कहानी में देखने को मिलता है। यादों के साये कहानी में नारी के पतिव्रता धर्म का चित्रण होने के साथ-साथ एक माँ के कर्तव्य का वर्णन देखने को मिलता है।मन के धागे कहानी इस पुस्तक का प्राण है। और मोरपंख कहानी सच्चे प्रेम की मिसाल।

आज के बाजारवाद और भौतिकतावादी युग में पुस्तक की रचनाएँ संवेदना से ओतप्रोत और प्रासंगिक है। रचनाओं में प्रेम की गहरी चाहत, टूटे दिल की गहराई से, दीदार को तरसती, सावन भादों सी बरसती जीवन की संवेदनाएँ हृदयस्पर्षी, कहानियों में चित्रात्मकता है जिनसे पाठक के मनमस्तिष्क में जीवन के रंगों से वर्गीकृत चित्र उभरते है।

निष्कर्ष रूप में कहा जाए तो अर्चनाजी ने कहानियों के पात्रों के माध्यम से आज समाज में नारीत्व के बदलते परिमाण तथा स्त्रीत्व के ठोस, सकारात्मक एवं मजबूत पहलुओं की भी बात की है और प्रेम के विभिन्न रंगों को भी शब्द दिए हैं। कुल मिलाकर मन के धागे पुस्तक सार्थक और सफल प्रयास है।

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