नम्रता अग्निहोत्री (प्रतिनिधि कवयित्रियाँ 2020)

नम्रता अग्निहोत्री महाराष्ट्र के नागपुर में रहने वाली हैं। विज्ञान, कला और शिक्षाशास्त्र विषय में शिक्षा ग्रहण की है  और एम॰बी॰ए॰ (एचआर) किया है। विविध शैक्षणिक संस्थाओ में पढ़ाया है। आप विभिन्न संगीत एवं अन्य कार्यक्रमों का मंच संचालन करती हैं और एक वॉइस ओवर आर्टिस्ट हैं। कविता पठन पाठन में रुचि है और लिखना आपका शौक़ है।

नम्रता अग्निहोत्री
एक नयी मैं हूँ ...

एक दिन हुआ यूँ
ज़िंदगी की दौड़ में भागते भागते,
अचानक हम सबको रुकना पड़ा

पता चला वजह जानलेवा करोना है,
और फिर, जान है तो जहान है!

माना कि आज़ादी छिन गयी है,
मगर जाना, क्या कुछ नहीं दे रही है
ज़िंदगी भर भी कम न पड़े,
उतनी दौलत लुटा रही है

आज़ाद रहकर, अंधी दौड़ का हिस्सा हुआ करती थी,
अब क़ैद होकर, नयी ऊँचाइओं को छुआ करती हूँ

सच कहूँ, इन दिनों,
ख़ामोशी भी बहुत कुछ बोल जाती है
ठहरकर भी कल्पना कितनी फुर्ती से आगे निकल जाती है

सबको जानने में, सबको समझने में, सबको पढ़ने में,
जैसे भूल सी गयी थी खुद को मैं,

आज खुद को ही जानने, समझने और पढ़ने लगी हूँ
सच कहूँ एक नयी ज़िंदगी हूँ
एक नयी सोच हूँ, एक नयी दिशा हूँ
एक नया अन्दाज़ हूँ, एक नया तजुर्बा हूँ

एक नयी मैं हूँ!


1 comment :

  1. Very simple thing powerfully described touching one's heart.

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