अंकिता कुलश्रेष्ठ (प्रतिनिधि कवयित्रियाँ 2020)

अंकिता कुलश्रेष्ठ, शिक्षिका, आगरा, उ.प्र. भारत की निवासी हैं। इनके लेखन की मुख्य विधाएँ गीत, छंद व लघुकथाएँ हैं। इनकी रचनाएँ समय-समय पर विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। इन्हें सुप्रसिद्ध कामायनी संस्था द्वारा 'मुक्तक शिरोमणि', प्रज्ञा संस्थानम् द्वारा गीत श्री, इत्यादि विभिन्न सम्मान प्राप्त हुए हैं।

अंकिता कुलश्रेष्ठ
गीत

अब उजाले स्वयं को करने प्रमाणित आ गए हैं
अब अँधेरों को कहीं मुँह बाँधकर छिपना पड़ेगा।

पार्थ! जो तुम सत्य का परचम उठाये चल रहे हो,
ज्ञात हो यह युद्ध अपने ही जनों से लड़ रहे हो,
मार्ग में अवरोध कितने पाँव की बेड़ी बनेंगे,
किंतु तुमको मोह तज सत राह पर बढ़ना पड़ेगा।

दीप नन्हा झिलमिलाकर घोर तम को चीर देता,
शूल छोटा ही सही पर चुभ गया तो पीर देता,
हो विनत सम्मान में वो है अनुज सो झुक रहा है,
भूलकर निज मान क्या इस चाल में ढलना पड़ेगा।

आज देखो सूर्य की आँखों में जुगनू चुभ रहा है,
है उसे डर दूर भू पर एक सूरज उग रहा है,
वृक्ष को पौधे के कद से क्यों वितृष्णा हो रही है,
क्या सदा निश्छल हृदय को विष-वमन करना पड़ेगा..

अब समय है सत्य, सद्गुण, श्रेष्ठ का सम्मान होगा,
और कुंठा, द्वेष के तम का अटल अवसान होगा,
एक निर्मल अंशु विहँसी शुभ्र द्युति अब खिलखिलाई,
है समय अब कालिमा को पूर्णतः चुकना पड़ेगा।


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