काव्य: अमरेन्द्र सुमन

अमरेन्द्र सुमन

अमरेन्द्र सुमन

(1) अब तक मुझे याद नहीं कि...

(19 वें वैवाहिक वर्ष (28 जून 2020) के अवसर पर, अपनी जीवन संगिनी को समर्पित कविता)

मात्राएँ
जिस तरह
नि‘स्वार्थ भाव से
शब्दों के चरित्र निर्माण में
अंतिम क्षणों तक निभाती हैं साथ अपनी
ठीक उसी तरह परिस्थितियां जब जब भी रहीं जैसी
रत्ती भर भी शिकन लिये बिना चेहरे पर पूरी दृढ़ता से
निभाती रही वह अपने हिस्से का अद्धांगिनी धर्म अब तक मेरे लिये।

जब कभी
टूटने बिखरने की
आयी नौबत सामने
रास्ता बन देती रही दिशा
पैरों को मेरे मंजिल तक पहुँचने की।

चलती रही
साये की तरह
साथ साथ जीवन पथ पर मेरे।

आरोप प्रत्यारोप,
धूप छाँव भरी जिन्दगी में
महसूस किया जब कभी खुद को तन्हा, अकेला
मुस्कुराती रही अच्छे दिनों का विश्वास लिये सपनों में मेरे।   

सींचती रही
हौसलों को मेरे
जीवन की पूरी व्यवस्था में
टुकड़े-टुकड़े में संग्रहित अपार उर्जा से अपनी।

उन्नीस वर्षों के
लम्बे वैवाहिक जीवन में
अब तक मुझे याद नहीं कि
कुछ भी चाहा हो कभी खुद के लिये।

तलब हुई
वक्त वेवक्त
जब भी जिन चीजों की
भरोसे के खजाने से लुटाती
रही एक एक कर उन्हें मेरे लिये।
***


(2) कैसे कह दूँ ...

-----------------------
गहनों की
दुकानों पर
पैर भी फटकना
नहीं चाहती वह कभी
और कोई दिलचस्पी नहीं
सोने चांदी के आभूषणों से उसे
कैसे कह दूँ ...

नहीं सुहाते
फैशनेबल साड़ियाँ
और ब्रांडेड मैचिंग ब्लाउज
आँखों को उसके, कैसे कह दूँ ...

जयपुर की
लहठी हो या
लक्मे का लिपिस्टिक
वुडलैंड का मखमली सैंडिल हो
या कोरियन आईफोन, दूर ही रहना
चाहती है इन तमाम चीजों से वह, कैसे कह दूँ ...

फाईव स्टार होटलों में
कभी कभार का ही महंगा डिनर
और लाल किला व बाघा बाॅर्डर का एनुअल ट्रिप
सुनकर ही आगबगुला हो जाती है वह, कैसे कह दूँ ...

सबकुछ
चाहते हुए भी जीवन में
कुछ नहीं चाहती है वह कैसे कह दूँ ...

कुछ कुछ
खास मामलों में
स्त्रियाँ होती हैं सभी एक जैसी
दूर दूर तक जबकि उसमें नहीं दिखता
वैसा कोई भी गुण, कैसे कह दूँ।

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।