समीक्षा: "जीवनानुभूतियों की पारदर्शी अभिव्यक्ति: काव्य कृति प्यार का पहला कदम"

समीक्षक: ज्ञानप्रकाश 'पीयूष'

कृति: प्यार का पहला कदम (कविता संग्रह)
कवि: नीरज कुमार मनचंदा
प्रकाशक: उमंग प्रकाशन, दिल्ली
प्रकाशन वर्ष: 2020
मूल्य: ₹ 295/- (सजिल्द)
पृष्ठ-120


"सदा बहती है कविता/ मेरे अंदर निर्बाध/ काव्य पंक्तियों के जनक सुकवि चर्चित साहित्यकार श्री नीरज कुमार मनचंदा की प्रथम काव्य कृति "प्यार का पहला कदम" प्राप्त हुई। वैसे तो यह इनकी प्रथम काव्य कृति है परंतु भाव सौंदर्य एवं शिल्प सौष्ठव की दृष्टि से यह अत्यंत अनुपम व उपादेय कृति है।

इसमें कुल 85 कविताएँ संगृहीत हैं जो एक से बढ़कर एक हैं। इनमें जहाँ जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण प्रतिबिंबित हुआ है, वहीं जीवन के प्रति अनुराग का भावभरा संदेश भी मुखरित हुआ है यथा "जीने की तू आस जगा ले / प्यार का पहला कदम बढ़ा ले /....दूजे की तू राह न देख/दूजे की तू चाह न देख/ पहले अपना हाथ बढ़ा ले...।" पृष्ठ 15.

जनहित में अच्छे काम करने का श्रीगणेश सर्वप्रथम अपने से होना चाहिए और कभी अभिमान नहीं करना चाहिए। इस मनोवैज्ञानिक सत्य से मनचंदा जी पूर्णतया वाक़िफ़ हैं। अतः उन्होंने अनुभूति के धरातल पर इस तथ्य का मार्मिक उद्घाटन कृति की प्रारंभिक कविताओं "जो प्यार का पहला कदम" व अभिमान का मैं क्या करूं" में बखूबी किया है।

"पिया तुम कब आओगे, बाकी अभी भी प्यार है, नैना बात करते हैं, काहे पिया न आए, प्यार, तेरे आने से, तुम चले आओ, व तुम्हारे बिन आदि कविताओं में शृंगार रस के संयोग व वियोग दोनों पक्षों का मनोहारी चित्रांकन हुआ है। ये कविताएँ अत्यंत मार्मिक,ह्रदय स्पर्शी व आह्लादकारी हैं,इन्हें पढ़कर पाठक भावविभोर हुए बिना नहीं रह सकता। इन कविताओं में शृंगार के साथ करुण रस व माधुर्य गुण का भी सुंदर परिपाक हुआ है।
ज्ञानप्रकाश 'पीयूष'


"इंसान की कीमत कुछ नहीं" कविता में मनचंदा जी ने पैसे के बढ़ते वर्चस्व पर कटाक्ष किया है जिसके कारण आज समाज में मानव का महत्त्व निरंतर गिरता जा रहा है व इंसानियत मरती जा रही है। "धुआँ-धुआँ-सी ज़िन्दगी" में भी कवि ने  कुछ इसी प्रकार के भावों को शिद्दत से रेखांकित किया है- "किसी से नहीं प्यार है/रिश्तों में उधार है/ अपना नहीं दिखता कोई /कैसी है
यह ज़िन्दगी....।" पृष्ठ 60.

समीक्ष्य कृति की घोटाले ,रिश्ते अब बाजार बन गए,सियासत,
आतंक को नकार दो, बदनाम रावण, चुनाव का मौसम,
कैसे मुस्कराऊँ, क्या कहेंगे लोग, महानगर, आदि कविताएँ सामाजिक एवं राजनैतिक जीवन के कटु यथार्थ को प्रभावशाली तरीके से व्यंजित करती हैं ,जिन्हें पढ़कर संवेदनशील पाठक के मन में विकृतियों के प्रति आक्रोश पैदा होता है तथा उनसे  छुटकारा पाने की प्रबल आकांक्षा जागृत होती है।

"बोल तेरे अनमोल, हिंदी है अपनी पहचान, दोस्त तेरा शुक्रिया,ईंट से ईंट बजा दो,  करो रोज तुम योग,खिलखिलाते रहो, मुस्कुराइए, पेड़ लगाओ और उजाले आदि कविताएँ संदेशप्रद, प्रेरणादायी एवं उत्साहवर्धक हैं, इनमें कवि ने मधुर वाणी व दोस्ती के महत्त्व, राष्ट्रभाषा हिंदी की उपादेयता, राष्ट्रप्रेम व देश के दुश्मनों को ललकार, नित्य योग करने, हँसते- खिलखिलाते रहने एवं नित्य पेड़ लगाने का महनीय संदेश  दिया है। इनमें प्रसाद एवं ओज गुण का स्वाभाविक प्रयोग हुआ है। पेड़ लगाने की प्रेरणा देते हुए कवि कहता है-
"फूलती सांसें घुटता जीवन कटते पौधे घटता कानन
आओ इन्हें बचाओ पेड़ लगाओ भई पेड़ लगाओ...।" पृष्ठ 87.

'जीवन का सौंदर्य, सवेरा, फागुन की है मस्त बहार व ठूँठ आदि कविताओं में प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य का अनुपम चित्रण हुआ है व 'नारी" कविता में कवि ने नारी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए परिवार एवं समाज में माँ,बहिन व बेटी के रूप में उसकी मह्त्वपूर्ण  भूमिकाओं को रेखांकित किया है।
कृति की अंतिम कविता 'सबको मुबारक़ नया साल' में कवि ने गरीब-अमीर सभी को रोग-शोक से मुक्त होने  व स्वस्थ,सुखी और खुशहाल देखने की कामना प्रकट की है तथा देश के नागरिकों में पारस्परिक प्रेम व सद्भाव का संचार होने और भारत देश को विश्व का सिरमौर बनने की सदेच्छा व्यक्त की है।
संग्रह की कविताओं में मुक्त छंद व छंद युक्त दोनों प्रकार की काव्य शैलियों का मिश्रित प्रयोग हुआ है। गीत, ग़ज़ल आदि काव्य रूपों का वैशिष्टय भी दृष्टिगोचर होता है। सरल, सुबोध व प्रवाहमयी भाषा ने कृति की अर्थवत्ता, पारदर्शिता एवं अभिव्यक्ति कौशल में चार चाँद लगा दिए हैं।

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि नीरज कुमार मनचंदा द्वारा रचित "प्यार का पहला कदम" यद्यपि इनकी पहली काव्य कृति है फिर भी यह भाव, भाषा, शिल्प, प्रयोजन, शीर्षक, सन्देश व काव्य अभिप्रेत की दृष्टि से अनुपम एवं उपादेय कृति है। यह साहित्य जगत व सुधी समाज में समादृत होगी। ऐसा मेरा ध्रुव विश्वास है और इनकी इससे भी उत्कृष्ट दूसरी कृति शीघ्र ही पाठकों को पढ़ने को मिलेगी, इसी आशा और विश्वास के साथ शुभकामनाओं सहित।
ज्ञानप्रकाश 'पीयूष',  आर.ई.एस.
पूर्व प्रिन्सिपल,1/258,मस्जिदवाली गली,
तेलियान मोहल्ला,नजदीक सदर-बाजार सिरसा-125055(हरि.)
संपर्क--094145-37902, 070155-43276
ईमेल-gppeeyush@gmail.com

1 comment :

  1. बहुत बहुत बधाई नीरज जी 👏👏👏👏 हार्दिक शुभकामनाएं आदरणीय पीयूष जी सादर नमन 🙏🏻💐😊

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