काव्य: लिप्सा महापात्र

लिप्सा महापात्र
गिलहरी 

गिलहरी की चंचलता मैंने देखी
कितनी सरल कितनी सुन्दर है वह। 
क्या होता अगर वह धीरे चलती?
क्या होता अगर उसकी चंचलता को रोक लिया जाता?
क्या फिर भी वो मन को भाति?
हरे घास के गलीचे पर 
सुनहरा सा उसका तन,
बेर की खुशबू में हो मगन
वह पत्तों के बीच छिप जाती। 
और फिर चुपके से बाहर निकल 
खेलने लगती।
दिशाहीन हो कर, मगर तृप्त।
जैसे मुझे कुछ सीखा रही हो।
बुला रही हो अपनी दुनिया में।
कह रही हो मुझसे,
धीरे चलने से कहीं जल न जाऊँ।
गति इतनी कि हाथ न आने पाऊँ।
सुंदर इतनी की सूरज की किरणें झलक उठे मुझे छूकर।
जो मन करे वही कर जाऊँ।
जग जीत जाऊँ या छुप जाऊँ 
कुछ उधार की साँसों के साथ,
मैं …
उन बड़े घरों की दीवारों में।
***


बारिश 

रिश्ते बिखरे पड़े हैं मेरे 
अभिमान की लहर से।
आशाएं जो दूर दिख रहे 
दूर तारों के शहर से।
उलट पलट किताबों के पन्नो में 
ज़ख़्म कितने कैद हुए मेरे 
धुंधली पड़ी यादें साफ़ हो रही थी 
गहरे ज़ख्मों के ज़हर से।
आज फिर बारिश हो रही है 
एक तस्वीर कम है टेबल पर।
कुछ दाग़ चाय के,
प्याली जो छलक कर गिर गए थे कभी।
फिर कलम में स्याही नहीं है 
और वह पौधा सूख चुका है।
क्या लिखूं अब मैं
ख्वाबों की खाक़ से !
बस दर्द का रंग है बाकि।
पर तुम, चुप क्यों हो?
बोलो ना, साथ जो छूट गया 
तो हार मान लूँ मैं भी, 
ज़िन्दगी से?
***

चमकते मोती 

कागज़ की कश्ती पे सवार 
मैं निकली थी सैर पर।
एक बड़ी लहर आई 
पर मेरी कश्ती, पार हो गयी।
मैंने देखा मोतियों का एक टापू।
कुछ नारियल के पेड़,
और गोल गोल मंडराती 
चिड़ियों की एक टोली।
चमकते मोती शंख से बातें कर रहे थे।
और मैं किनारे पर पहुँच गयी। 
तभी कुछ कर्कश आवाज़ें आने लगी।
और मेरी नींद खुल गयी।
वह मोतियों का चमकता हुआ टापू 
ग़ायब हो चुका था।
और मेरे पास,
वही सोने का पिंजरा था 
कुछ रिश्तों का भ्रम 
और कुछ बदसूरत तस्वीरें।
***
 
ग़ुलाब 

काँटों के आँगन में, खिलखिलाता  हुआ  
सूरज को देख शर्माता हुआ  
मेरे बगीचे का लाल ग़ुलाब 
झरोखे से झाँकने की कोशिश करता है।
पता नहीं क्या देखना चाहता है?
मेरे रेशम के कपड़े,
झिलमिलाते मेरे गहने 
या अँधेरे कोनों में छुपे हुए कुछ राज़।
उदासी भरे कुछ लम्हे,
हाथों में पड़ी काँटों की लकीरें 
या पैरों में पड़ी 
कुछ अजीब सपनों की बेड़ियाँ।
पता नहीं मुझे 
उसके और मेरे होने में क्या अंतर है।
सह आचार्य, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट), भुवनेश्वर, ओडिशा

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