कविताएँ: राज 'व्योमकेश'

राज 'व्योमकेश'
1. क्या बनोगे तुम मेरे आंगन का गुलाब?


जो है मेरे लिए देवलोक के पारिजात से भी
ज्यादा महत्त्वपूर्ण।
जिसकी खुशबू से महकता है पूरा घर।
और करता है अनुभव,
प्राणों में नवऊर्जा के संचरण का।
वो अनुभव बनोगे तुम!
क्या बनोगे तुम मेरे आंगन का गुलाब?


काँटो से घिरा होने के बावजूद जो
झूमता उन्मुक्त।
और बिखेरता हवा में गुलाबी सुगन्ध।
जो मुस्कुराता रहता हमेशा खुद
और देता वजह सबको मुस्कुराने की।
वो वजह बनोगे तुम!
क्या बनोगे तुम मेरे आंगन का गुलाब?


जिसकी हरी हरी पत्तियाँ
बिखेरती रहतीं हमेशा हरियाली।
जिसके होने से इठलातीं
घर में रंग बिरंगी तितलियाँ।
जो बनता है साधन
मेरी आराधना का।
और मुझे देवालय तक ले जाने का।
वो साधन बनोगे तुम!
क्या बनोगे तुम मेरे आंगन का गुलाब?
***




2. सुबह आती रोज़ लेकर 


एक नई उम्मीद की किरण।
उम्मीद पर कायम है दुनिया
कहते हैं सब।
मुस्तक़बिल में है बिछड़ना,
लेकिन सिर्फ जिस्मों का।
जिस्म बैसे भी ढल जाएगा सूरज की तरह
शाम तक।
रूह कभी नहीं मरेगी न मरेगा रूहानी प्यार।
पढ़ा जाएगा जो सदियों तक इबारत की तरह
और कर देगा मजबूर,
दुनिया को खुद के सामने झुकने के लिए।
गुज़िश्ता वक्त की यादें बनेंगी साथी
जिंदगी के अगले सफर की
तुमसे बिछड़ने के बाद।
सुबह आती रोज़ मेरे कमरे तक,
इसी उम्मीद के साथ।
***




3. समय की आदत


समय की आदत होती है बदलते रहना
और कुछ लोगो की समय से पहले ही
बदलने की।
बदलता हुआ समय न केवल बदलता
है स्वयं को,
बल्कि उनके साथ में बदलता है व्यक्ति
समाज और धीरे धीरे सभ्यताएँ तक।


इसी प्रकार बदल जाएगी यह सभ्यता भी
जिसमे जी रहे हैं हम।
और जन्म होगा किसी नई सभ्यता का।
प्राप्त होंगे पुरानी सभ्यता के अवशेष रूप में
कुछ कागज के वे टुकड़े
जिनपर लिखे हैं हमने पत्र तुम्हारे नाम के।
और टूटे हुए कुछ तोहफे जो रखे हैं
हमने अभी तक बहुत सम्भाल कर
तुम्हे देने के लिए।


क्योकि तब भी प्रेम वही होगा जो कि
है आज।
प्रेम बदलता नहीं किसी भी परिस्थिति में
यह शाश्वत है
ईश्वर की तरह ही। 


10 comments :

  1. सहज,में ताज़ा और कोमल अर्थ लिए हुए ।
    बहुत सुंदर।

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  2. बहुत सुंदर पंक्तियाँ

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  3. Bahut Sundar, SHAHJAHANPUR k liye Garv Ka pal

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  4. बहुत खूब
    ऐसे ही आगे बढ़ो बेटा
    God bless you

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  5. बहुत खूब
    ऐसे ही आगे बढ़ो बेटा
    God bless you

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