सुझाव: कुछ कह रहा बसंत

सीमा राजीव (अवधपुरी भोपाल)

लो, फिर आ गया वसन्त। सब अपनी तरह से इस बार भी वसन्त का स्वागत कर रहे होंगे। कुछ वासंती मौसम की अनुभूति करने के लिए, प्रकृति का सामीप्य पाने को आतुर हो रहे होंगे तो कुछ यादों के झरोखे से बीते वसन्त का स्मरण कर रहे होंगे। ऐसे भी लोग हैं जो सब कुछ पिछला भुलाकर इस वासंती बयार में नई जिंदगी शुरू करने का मन बना रहे होंगें। ऋतु परिवर्तन पर मुझे भी आप सबकी तरह ऐसा लगा जैसे ये मौसम हमसे कुछ कह रहा है। एक ऐसा अनुभव आप सभी के साथ साझा करने का मन हो रहा है।

कुछ समय पहले, मेरी सहकर्मी-सखी ने सिर्फ 50 साल की उम्र पार की थी। जन्मदिन के लगभग आठ दिनों बाद वे कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गई और उन्हें बचाया नहीं जा सका। हमें शोक संदेश प्राप्त हुआ, ‘‘दुख की बात… वह हमारे साथ नहीं है... आप जहाँ हैं कृपया वहीं से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।” 

पूरी तरह अनलॉक होते ही कोई तीन महीने बाद मैंने उसके पति को फोन किया। एक विचार मेरे दिमाग में आया कि वे बेहद मुश्किल में, काम के बोझ से दबे होंगे, क्योंकि मेरी सहेली के पास बहुत काम था। अपनी मृत्यु होने तक वह सब कुछ देख रही थी – घर, बच्चों की शिक्षा, वृद्ध ससुराल वालों की देखभाल, उनकी बीमारी, रिश्तेदारों का प्रबंधन आदि। एक कुशल, सशक्त, आत्मनिर्भर महिला की तरह... ’सब कुछ, सब कुछ, सब कुछ’

जब भी हम मिलते या फुर्सत के क्षणों में बात होती वह कई बार कहती, ‘मेरे घर को मेरे समय की जरूरत है, मेरे पति को चाय भी नहीं बनाना आती, मेरे परिवार को हर समय मेरी जरूरत है, ’लेकिन कोई भी मेरे द्वारा किए गए प्रयासों की परवाह नहीं करता है और न ही मेरी सराहना करता है। मुझे लगता है कि वे सभी मेरे काम का सम्मान नहीं करते। जब मैं नहीं रहूँगी शायद तब उन्हें पता पड़ेगा।‘

मैंने उसके पति को यह देखने के लिए फोन किया कि क्या परिवार को किसी सहारे की जरूरत है, जैसा कि, मुझे लगा कि उनके पति को बहुत बुरा अहसास होना चाहिए, अचानक से सारी जिम्मेदारियाँ निभाना है, उम्र बढ़ने के लिए, माता-पिता, बच्चे, उनकी यात्रा, इस पर अकेलापन, सब कैसे होगा? कुछ देर घंटी बजी पर फोन नहीं उठा, एक घंटे के बाद उसने कॉल वापस कर दिया, उसने माफी मांगी कि --वह मेरे कॉल का जवाब नहीं दे सके। उसने बताया कि वह अपने क्लब में एक घंटे के लिए बॉस्केटवॉल खेलने गया था और दोस्तों से मिलना आदि। यह सुनिश्चित करने के लिए कि उसके पास अच्छा समय है। यहाँ तक कि उन्होंने महानगर में ट्रांसफर ले लिया है। इसलिए अब यात्रा नहीं करनी पड़ती है। 

‘‘घर पर सब ठीक है?” मैंने पूछा- उसने बताया कि उसने एक खाना बनाने वाली लगा ली है, जिसे थोड़ा और पैसे देने पर वह किराने का सामान भी ले आती है। उन्होंने अपने बूढ़े माता-पिता के लिए भी एक नौकर लगा लिया है। ‘‘सब ठीक चल रहा है... बच्चे ठीक हैं। जीवन सामान्य स्थिति में लौट रहा है” ...उन्होंने कहा।
मैं मुश्किल से एक-दो वाक्य ही कह सकी कि मेरा गला पसीज गया मैंने फोन रख दिया। मेरी आँखों में आँसू आ गए।
‘मेरी सहेली मेरे ख्यालों में बनी रही ...’ वह अपनी सास की बीमारी के चलते स्कूल के दोस्तों से मिलने नहीं आती थी। वह अपनी भतीजी की शादी में भी नहीं जा सकी क्योंकि उसे अपने घर में मरम्मत का काम देखना था।

वह कई मजेदार पार्टियों और फिल्मों से चूक गई थी क्योंकि उसे बच्चों की परीक्षा दिलानी थी और खाना बनाना है, उसे अपने पति की जरूरतों का ख्याल रखना था ...उसने हमेशा कुछ प्रशंसा और कुछ पहचान की तलाश की थी, जो उसे कभी नहीं मिली।

आज मुझे उससे कहने का मन हो रहा है कि कोई भी अमूल्य नहीं है। और कोई भी याद नहीं किया जाएगा, यह सिर्फ हमारे दिमाग का खेल है। शायद यह सांत्वना है। पहले दूसरों की मदद करके आपने उन्हें सिखाया है कि-आप दूसरे नंबर पर आते हैं। ’वास्तविकता’यह है कि सहेली के दुनिया से चले जाने के बाद दो और नौकरानियाँ काम पर रख ली गईं और घर आराम से चलता रहा। कुल मिलाकर कहने का तात्पर्य ये है कि अपनी इच्छा अपने हुनर अपने कौशल को यूँ ही व्यर्थ नहीं जाने दें। समय का सद्पयोग करते हुए अपनी उड़ान जारी रखिए।

‘हम केवल अपने सम्मान और मूल्य को मापते हैं, क्या यह सच नहीं है?’ फिर जीवन का आनंद लो, मन से यह धारणा मिटा दो कि मैं अपरिहार्य हूँ, और मेरे बिना घर को नुकसान होगा। चिंता करना मतलब ईश्वर की व्यवस्था पर शक करना है। इसमें हम महिलाओं के लिए ये संदेश छिपा है कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने लिए समय निकालें, अपने दोस्तों के साथ संपर्क में रहें, बात करें, हँसें और जीवन का आनंद लें। जुनून से अपनी जिंदगी को जियें। वह सब करें जो आप करना पसंद करते हैं ... दूसरों में अपनी खुशी मत देखो, ’तुम भी कुछ खुशियों के हकदार हो’ क्योंकि अगर तुम खुश नहीं हो तो तुम दूसरों को खुश नहीं कर सकते, हर किसी को आपकी जरूरत है, और आपको भी अपनी देखभाल और प्यार की जरूरत है।

महिलाओं को उन अन्य महिलाओं की मदद करने और मार्गदर्शन करने के लिए आगे आना चाहिए जो अपने व्यक्तिगत तनाव को संभालने में असमर्थ हैं और उन्हें अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए हाथ दे, सहयोग करें।

हम सभी के पास जीने के लिए केवल एक ही जीवन है। इसलिए ये जीवन तमाम बाधाओं को पार करते हुए जीना है। हर दिन सिर्फ मुस्कुराकर न रह जाएँ, बल्कि जोरदार ठहाका लगाकर हंसे पर हंसे जरूर। अब आपको भी ये महसूस हो रहा होगा कि ये वसन्त का मौसम हम सबसे कुछ कहने आया है और ये भी समझाने आया है कि चाहे जो हो जाए कभी हँसना और हँसाना न भूलें।

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