काव्य: वीना शर्मा

वीना शर्मा (सहारनपुर-247001)

मेरी माँ

खुले हुए पर्दों में से
सुबह के सूर्य की किरणें झाँकती हैं।
मेरी यादों में अनेक छायाओ का जाल बुन जाता है।
किस तरह से तुम बर्फ पर लेटी हुई हो
तुम्हारी साँसें कभी की थम चुकी हैं
तुम्हें सजाया गया है गेंदे और गुलाब
से बनी मालाओं से।
तुम्हे रंग बिरंगी साड़ियों से ढँक दिया गया है।
उन्हीं साड़ियों में से मुझे तुम्हारी अनामिका अँगुली
दिखाई दे जाती है
जिसमें एक बार तुम्हारी अंगूठी फँस गई थी।
वह अब तक रखी है तुम्हारी अलमारी में
तुम्हारी अन्य चीजों के साथ।
तुम्हारे सिरहाने रख दिया गया है एक जलता हुआ दिया।
अग्नि की लपटों से तुम्हारी छाती पर रखे
लकड़ियों के टुकड़े जलकर सब ओर बिखर जाते हैं।
उन्होंने मेरे शरीर पर जलने के बाद के निशान
छोड़ दिये हैं।
मैं निढाल सी हो जाती हूँ
मुझे फिर से बहुत कुछ याद आता है।
रसोई घर में रखे बर्तनों में
तुम्हारे हाथों की महक महसूस होती है।
ऐसा क्यो होता है समय चलता रहता है
मगर उसकी सुइयां रुक जाती हैं
ऐसा बहुत कुछ है जो मेरे और तुम्हारे बीच रखा है
अनकहे शब्दों के रूप में
इसे सिर्फ मैं ही समेट सकती हूँ।
***


बवंडर

एक व्यस्त शहर जहाँ सभी भाग रहे है
बवंडरो की तरह।
इन्सानियत की आँधी
और भावनाओ का तूफान लिए
अपनो को अपनो की ही सुध नहीं
सभी कुछ अस्त-व्यस्त
कुछ मन्दिरो की तरफ
कुछ मस्जिदों की तरफ
कुछ मन्दिरों-मस्जिदों के बीच
टंगे हुए अंतहीन विवादों की तरफ
कुछ रेलगाड़ी और कुछ बस स्टैंड की ओर
खाना भी खाकर चले है पता नही
कुछ लाचार महिलाओं की तरफ
विवशता से देखते हुए,
शायद कुछ सपनों को पूरा
करने की जल्दी है
कुछ बसों मे, कुछ बसों की छत पर
और कुछ बसों के नीचे कुचले जाते हुए
उठकर फिर भी चलने लगते है
कुछ तीव्रता में ठोकर खाकर गिरते
और शीघ्र ही संभलते हुए
फिर से भागने लगते हैं।
यह कैसा शहर है यह कैसी तहजीब है
मै सोच मे हूँ बस।

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।