काव्य: अनुराधा मिश्रा

अनुराधा मिश्रा
इन्द्रधनुष-1

कमरे की दीवारों पर
या खिड़की के उस पार दिखते
खुले आसमान पर,
कुछ रेखाओं को खींच कर
एक आकृति बनती हूँ मैं।
आकृति या स्वप्नों का जाल
कल्पनाएँ नहीं यथार्थ
नहीं यथार्थ की आकृति में
कल्पनाओं के रंग से एक इन्द्रधनुष
स्वयं को बुनते देखती हूँ मैं,
कमरे की दीवारों पर
या खिड़की के उस पार दिखते
खुले आसमान पर।
***


इन्द्रधनुष-2

अपनी हँसी से इन्द्रधनुष खिला जाना
दुपट्टे से मेल खाते बुन्दों को हिलाना
माथे की लाल बिंदी को चमकाना
रंगबिरंगी चूड़ियाँ छनकाना
गोरे हाथों से भूरे बालों को सहलाना
घर आँगन की दीवारें रंग जाना
हरी घास में हरसिंगार के फूल सजा आना
श्वेत श्याम को तो बस कैनवस ही बना जाना
उसका परिचय था बस रंग बिखराना।
किसी की स्याह सफ़ेद तस्वीरों में
रंग का नुक्ता लगाते,
गहरी नीली आँखों में झांक
रंगों का महत्व समझाते
नीला समुद्र नीला आकाश
पार कर जाना
अपनी होली अपनी रंगोली भूल आना
स्याह रात में इन्द्रधनुष का खो जाना
बस एक कैनवस भर रह जाना
और बस एक कैनवस भर रह जाना।
***


मन की वसीयत

बहुत कुछ कहना था तुमसे
शब्द भी थे, जोड़ना भी आता था
जुड़ें शब्दों को डायरी में
संजोना भी आता था
बस नहीं आता था
तुमको वह सब सुना पाना
ऐसा नहीं था की
सुनाने का साहस न रहा हो
बस सुनने की
तुम्हारी सामर्थ्य नहीं थी
संजोये शब्दों से कहानी
पिरोकर तुम्हें परोसी
इस आशा के साथ कि
शायद ये तो पचा पाओगे
मेरे मन को अब तो समझ पाओगे
उसे पढ़ते ही तुम्हारा
चीखना-चिल्लाना और फिर
लम्बे मौनव्रत में चले जाना
मुझे
कहानी की गरिष्ठता,
तुम्हारी सामर्थ्य, मेरी हैसियत
और एक बड़ा सबक सिखा गया
कि जो मन में है गर वह कह जायेंगे
तो ज़िन्दगी से भी लम्बे रिश्ते मर जायेंगे
क्या मिल जाएगा मन को सुनाने से
मन की वसीयत अगले जन्म के लिए कर जायेंगे
मन की वसीयत अगले जन्म के लिए कर जायेंगे।
***

4 comments :

  1. इंद्रधनुष के दोनो भागों का भाव मन को छूने वाला है ....

    और मन की वसीयत में स्त्री के अंतर्द्वंद का चित्रण अद्भुत है ,..🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

    अनुराग

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  2. Very nice lines Anuradha Ma'am. This talent is an add-on to your persona.

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  3. सुंदर शब्दों का चयन एवं उससे भी सुंदर मनोभावों का अंकन । मानव मन की भावनाओं को बहुत सुंदर रूप से कागज पर उतारा है कवि को साधुवाद।

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