पाँच मौलिक कविताएँ

भुवेन्द्र त्यागी

समाचार संपादक, नवभारत टाइम्स, मुंबई

1. तुम

तुम, 
जो फूल पर ठहरी
ओस की एक बूंद की तरह
भोर में चमकती हो
मोती सी 
मेरी स्मृति में 
दमकती हो

तुम,
जो पोखर में हिलती
एक लहर की तरह
नृत्य करती हो
रजत दामिनी सी
मेरी स्मृति में
खनकती हो

तुम…।
*** 


2. सावन का झूला

सर-सर बरसे चांदनी
तारों की ओट में
बादलों के घूंघट से 
सर-सर बरसे चांदनी

चांदनी का यह रूप
मन को भाता है
आँखों में समाता है
इंद्रधनुष पंखों पर चढ़
अक्सर नजर आता है
शीतलता इसकी
झम-झम झूमे
पवन की थाप पर
गाए गीत सावन के

सावन के प्यार भरे
मोहक-सुहाने गीत
गाँव के पनघट 
और उस पर पड़े 
झूले की याद दिलाएँ

और झूला झट ले जाए
स्मृति के उस पाट में
जिस पर पींगे भर
मन सहसा पहुँच जाए
प्रियतम के पास

और शुरू हो जायें
सावन के गीत
रूठने-मनने के गीत
ये ही गीत गूंजें फिर
इंद्रधनुष पंखों पर चढ़
सरसराती चांदनी में
***


3. बिंदिया

ये बिंदिया
टंगी है जो
अलमारी के शीशे पर,
आईने पर,
किचन-बाथरूम की टाइलों पर,
बेड के सिरहाने पर,
और भी न जाने कहाँ-कहाँ;
बन जाती है सहसा चंदा
घूमने लगती है यह सृष्टि इस चंदा में
सृष्टि में दिखने लगता है फिर
चेहरा तुम्हारा
जो बन जाता है चंदा
और फिर बिंदिया!

तुम्हारा चेहरा
लटका है बनकर
बिंदिया
अलमारी के शीशे पर,
आईने पर
किचन-बाथरूम की टाइलों पर,
बेड के सिरहाने पर,
और भी न जाने कहाँ-कहाँ!
*** 


4. काजल

तुमने आँखों में 
काजल लगाया
मानो मेह बरसाया
काजल में तैरकर
नेह लहराया
सघन वन में 
उजाले की छाया
प्रज्ज्वलित दीये पर 
बाती का साया।

काजल वाली जब
खोलीं पलकें
थम गई हवा,
रुक गई धरा,
स्थिर दृग,
स्थिर मृग,
स्थिर जग,
स्थिर चंदा,
स्थिर तारे,
कंपित सारे।

तुमने आँखों में 
काजल लगाया
रोककर सब कुछ,
फिर सब चलाया।
***


5. सपना

तुम्हारी महक
बसी है यहाँ,
यहाँ चिपकी है 
तुम्हारी मुस्कान,
जर्रे-जर्रे पर यहाँ
लिखा है तुम्हारा नाम।

रात जो सपना देखा था मैंने,
क्या वह तुमने भी देखा?

उस सपने में
हम थे, फूल थे, तितलियाँ थीं
रूठना था, मनना था, मचलना था
सुर थे, लय थी, लहरें थीं
रंग थे, बादल थे, हवा थी
आँचल था, बिंदी थी, पायल थी
सावन था, पतझर था, वसंत था
चंदा था, सूरज था, गगन था…

… और थे हमारे सपने!

***
कवि परिचय
पत्रकार, लेखक और अनुवादक भुवेन्द्र त्यागी के विविध विषयों पर 2,500 से अधिक लेख, फीचर, रिपोर्ताज, साक्षात्कार और समीक्षाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। आकाशवाणी, विविध भारती और बीबीसी से 250 से अधिक वार्ताएँ, कार्यक्रम और साक्षात्कार प्रसारित।

प्रकाशित पुस्तकें
दहशत के 60 घंटे, ये है मुंबई

ई-बुक
जासूसी @ वॉट्सऐप, नोबेल विजेता लुईस ग्लूक की कविताएँ, नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी

संपादित
आँखों देखी, स्पेशल रिपोर्ट, फिल्मी स्कूप

अनूदित
संस्कार, वैदिक गणित, एम. एफ. हुसेन (अंग्रेजी से हिंदी)
Bahadur Can't Sleep, You Are Worth Millions, Sir (हिंदी से अंग्रेजी) 

सह लेखक
संगीत के जवाहरात 

संपर्क 
bhuvtyagi@gmail.com


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