मीनाक्षी मोहन: तीन कविताएँ

मीनाक्षी मोहन
जीवन

आज अपनी बाल्कनी से सिंदूरी चादर ओढ़े
गरिमा विहीन सूर्य का विनीत, नम्र निर्गमन देख
एक टीस सी उठ आई
कितने ऐसे सूर्यास्त देख लिए अपने जीवन में।

कहाँ गई वह बचपन की चहल पहल
सखियों के साथ गुड़ियों का ब्याह और गुट्टे खेलना
कुछ रूठना मनाना, भाई बहनों के साथ खेल रचाना
कुछ झगड़े कुछ शिकायतें
फिर सब कुछ भूल कर एक हो जाना!

कहाँ गई माँ बाप की छत्र छाया
दादा का “मिनुआ” कह कर बुलाना
रामायण-महाभारत की कहानियाँ सुनाना
दादी का ताश के खेल में चीटिंग करना
हँसना-हँसाना कितना मासूम था वह सफ़र।

जाने कब हँसते-खेलते बचपन बीत गया
फिर कॉलेज और हॉस्टल के वे दिन
बेसब्री से शनिवार की प्रतीक्षा करना
टकटकी लगाए गेट की तरफ़ देखते रहना
कब पापा की काली ऑस्टिन मरीना दिखाई देगी
और हम पापा के पास जाएँगे
कितना सुकून था उस प्रतीक्षा में भी —
भाई बहनों के साथ दो दिन बिताने में!

ऐसे ही वह तीन वर्ष भी बीत गए
और कब मेरे सपनों का राजकुमार
सात समुंदर पार से आ गया
पहली ही नज़र में मोहित मैं
सात फेरों के बंधन में बंध
एक नई दुनिया के सफ़र पर निकल पड़ी!

नया देश, नये लोग, नई भाषा की परिभाषा में बंधी
पुरानी यादों की चादर अपने साथ ले आई
फिर माँ की चिट्ठियों को सहेज कर रखना
दूर से आए उस फ़ोन की प्रतीक्षा
माँ बनने की मिठास और बच्चों की तोतली बातों न उस बिछड़ने के ग़म को भी भुला दिया!

आज अपनी बाल्कनी से उस डूबते सूरज को देख
एक टीस सी उठ आई—
शीशे की खिड़की में अपना अक्स देखा
गालों पर कुछ सिलवटें
और बालों में बिखरी कुछ चाँदी —
क्या जीवन सिर्फ़ एक मायाजाल है?
या फिर उस डूबते सूरज की तरह
जो फिर कहीं और जन्म लेगा
मेरा भी इस जीवन के बाद
एक बार फिर पुनर्जन्म होगा!
***


ज़िंदगी

ज़िंदगी क्या है
बादल के कुछ  टुकड़े जैसी
मस्त, तरह. तरह के आकार बनाती
सत रगों की छाया में खेलती
कभी काले तूफ़ानों से टकरा कर
आँसू बहाती
फिर नीलांबर में विलीन हो जाती

ज़िंदगी क्या है
हिमशिखर से बहती झरने की धारा
उज्जवल. पवित्र
इठलाती बलखाती
शहरों गाँवो खेत खलिहानों से गुज़रती
कुछ अच्छे और कुछ बुरे अनुभवों से सिमटी
थक भव सागर में मिल जाती!
***


मोह

हवा की भीनी चादर ओढ़ कर
झाड़ियों के झरोखे से
गुलाब ने हँस कर देखा
मुग्ध हो जब मैंने उसे सराहा
उफ़ एक आह सी निकल गई।
एक काँटे से फिसलती
रक्त की कुछ बूँदे
गुलाब की पंखुड़ी से जा लिपटीं
***

मीनाक्षी मोहन शिक्षाविद, कलाकार, और लेखिका हैं। अंग्रेज़ी और हिन्दी में उनकी रचनाएँ छप चुकी हैं। उन्होंने शिकागो, बॉस्टन और टाउसॉन, मेरीलैंड विश्वविद्यालयों में पढ़ाया है! वे शिकागो की नैशनल लुइस यूनिवर्सिटी (National Louis University) के इंक्वायरी इन एजूकेशन सम्पादन मण्डल की सदस्या हैं। मीनाक्षी मेरीलैंड, अमेरिका में रहती हैं।

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