ग़ज़लें: पीयूष अवस्थी

पीयूष अवस्थी

ग़ज़ल 1

ग़ैर का दर्द भी सीने में बसाकर देखो
उसके होठों पे भी मुस्कान सजाकर देखो

एक जुगनू भी चमकता है बहुत दूर तलक
इन अँधेरों में कोई शम'अ जलाकर देखो

घर की दीवार से आयेगी महक फूलों की
हँसते बच्चे की भी तस्वीर लगाकर देखो

उसके दिल में भी है क्या तुझको पता चल जाये
अपने ख़्वाबों में कभी उसको बुलाकर देखो

ख़त तेरा जा भी तो सकता है ख़ुदा के घर तक
आसमाँ तक ये गुबारे तो उड़ाकर देखो

चाँद बादल में छिपा होगा दिखेगा कैसे
उसके चेहरे से भी परदा तो हटाकर देखो

और आवाज़ें भी तुमको तो सुनाई देंगी
मेरी आवाज़ में आवाज़ मिलाकर देखो
***


ग़ज़ल 2

इस कड़ी धूप में साये भी झुलसते होंगे
किस तरह लोग यहाँ घर से निकलते होंगे

जिसको कल की है बहुत फ़िक्र उसे नींद कहाँ
उसकी आँखों में कहाँ ख़्वाब ठहरते होंगे

वो किसी और ही मिट्टी के बने थे शायद
लोग जो ग़ैर के ग़म में भी पिघलते होंगे

उम्र के साथ ही रस्ता भी कठिन लगता है
लोग बस अपनी ज़मीं देख के चलते होंगे

आइने और भी दुनिया के तो देखा करिये
बेवज़ह रोज़ ही सूरत को बदलते होंगे

इनको मालूम है कुछ भी न मिलेगा माँगे
ऐसी बस्ती में तो बच्चे न मचलते होंगे

भूख है, दर्द है , छत भी नहीं सर पे कोई
देख इनको भी ज़रा कैसे ये पलते होंगे
***


ग़ज़ल 3

लोग जब अपनी हक़ीक़त जानने लग जाएँगे
ज़िन्दगी से ज़िन्दगी को माँगने लग जाएँगे

दूर करिये आस्तीनों से इन्हें वरना ज़रूर
एक दिन ये साँप सर पे नाचने लग जाएँगे

रेत हो या राख़ हो बर्बाद मत करिये उसे
क्या पता कब लोग इनको फाँकने लग जाएँगे

इस ज़माने का चलन बदलेगा उस दिन देखना
आग जब हम मुठिठयों में बाँधने लग जाएँगे

पीठ के कूबड़ कहाँ ले जाएँगे वो दोस्तो!
आइनों के सामने जब आइने लग जाएँगे

क्या करें ज़िक्रे- वफ़ा "पीयूष" अब इस दौर में
है ये मुमकिन लोग बगलें झाँकने लग जाएँगे
***


ग़ज़ल 4

आज अच्छा कोई मुहूरत है
उनको मेरी बड़ी ज़रूरत है

हौसला प्यार का भी देख वहाँ
जिस जगह दर्द की हुकूमत है

प्यार तुझको हुआ है उससे मगर
इम्तिहानों में तेरी कूवत है

मुझमें रहने दे बचपना भी कहीं
ये मेरे दिल की अस्ल सूरत है

बस वही चीज़ मिल नहीं पाती
हमको लगती जो खूबसूरत है

ये ज़मीं आसमान सब उसका
देखने भर को एक मूरत है
***


ग़ज़ल 5

सब परिन्दे थक गये हैं रात को सो जाएँगे
अब सवेरे ही सवेरे काम पर वो जाएँगे

ज़िन्दगी जब तक चले चलते रहो चलते रहो
वक़्त जब ठहरेगा आँखें मूँदकर सो जाएँगे

तुम मुझे ही ढूँढ़ते रह जाओगे सारे जहाँ
देखना जब हम किसी दिन भीड़ में खो जाएँगे

है मेरे बचपन का साथी दर्द उसका नाम है
वो बुरा मानेगा गर हम आपके हो जाएँगे

उम्र भर छाया तुम्हे दे हर कड़ी सी धूप में
हम कोई ऐसा शजर राहों तेरी बो जाएँगे

ये नदी, पर्वत ये झरने, चाँद , सूरज , आसमाँ
सब उसी के हैं किसी दिन उसके ही हो जाएँगे
***


ग़ज़ल 6

मेरी आँखों में मुददत से रहा है यूँ बसर तेरा
नहीं जाता , नहीं जाता मेरे दिल से असर तेरा

हमारी ज़िन्दगी में ख्वाहिशें तो थीं बहुत लेकिन
कहाँ हम छोड़ कर जाते गली,कूचा ये दर तेरा

मेरी खामोशियाँ मत देख मेरी रूह को पढ़ ले
मैं पहले था , अभी भी हूँ, रहूँगा मोतबर* तेरा

हजारों फूल की कुर्बानियाँ होती हैं मक़तल में
तभी होता है पैदा बस ज़रा सा ये अतर*तेरा

तुझे हम ढूँढ़ ही लेंगे तेरे क़दमों की आहट से
हमारे साथ चलता है हमेशा रहगुज़र तेरा

मेरे ख़्वाबों को भी आख़िर कभी मरने नहीं देता
तेरी आँखों का ये जादू , दिलासे का हुनर तेरा

* मोतबर - विश्वसनीय, भरोसेमंद
* अतर - इत्र , ओत्र
***


ग़ज़ल 7

दर्द जब हद से गुज़रता है बुरा लगता है
ये लहू आँखों टपकता है बुरा लगता है

लूटकर चैन वो हंसता है कोई बात नहीं
साथ दुश्मन के टहलता है बुरा लगता है

फब्तियाँ कसता है वो रोज़ मेरी हालत पे
होंठ खामोश सा रहता है बुरा लगता है

हाल मेरा भी कभी पूछ तो लेता आकर
हाले -दिल अपना ही कहता है बुरा लगता है

बीच राहों में मुझे छोड़ दिया क्यूँ सबने
दिल सवालों से गुज़रता है बुरा लगता है

ख़ुद से डरना भी नई बात नहीं है लेकिन
आइना मुझसे ही डरता है बुरा लगता है

घर पड़ोसी का सही, हैं तो चहकते पँछी
पर कोई उनके कतरता है बुरा लगता है
***


ग़ज़ल 8

मुझसे नज़र भी अपनी छिपाये हुये है वो
कोई तो बात दिल में दबाये हुये है वो

उसके भी ज़ेहन कोई घुटन तो ज़रूर है
पिंजरों से सब परिन्दे उड़ाये हुये है वो

अपने हुनर पे उसको यकीं इस क़दर से है
मुट्ठी में अपनी आग दबाये हुये है वो

बेहद घने अँधेरों में बैठा है चुप सा जो
दिल में कोई तो शम'आ जलाये हुये है वो

मैं सच न बोल दूँ कहीं उसके ख़िलाफ़ ही
सबकी नज़र से मुझको बचाये हुये है वो

करता दुआ सलाम है मुझको कभी-कभी
रिश्ता पड़ौसियों सा निभाये हुये है वो
***

ईमेल: piyush.avasthi3@gmail.com
चलभाष +91 08114210572
पता: 203 यंत्र, पैरामाउण्ट सिम्फ़नी, क्रॉसिंग रिपब्लिक, ग़ाज़ियाबाद 201016, उत्तर प्रदेश


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