सम्भावना जगाती लघुकथाओं का संग्रह - 'अब न अंगूठा छाप'

समीक्षक: दिनेश पाठक ‘शशि’

28, सारंग विहार, मथुरा-6; चलभाष: +91 987 063 1805; ईमेल: drdinesh57@gmail.com


पुस्तक: अब न अंगूठा छाप (लघुकथा संग्रह)
लेखक: सुमन कुमार
ISBN: 978.93.92218.11.0
पृष्ठ: 48
मूल्य: ₹ 100.00 रुपये
प्रकाशन वर्ष: 2021
प्रकाशक: कौस्तुभ प्रकाशन, समस्तीपुर, बिहार


दिनेश पाठक ‘शशि’
 मित्रमण्डल सचिवालय (राजभाषा) विभाग, बिहार के अंशानुदान से प्रकाशित, नवोदित साहित्यकार श्री सुमन कुमार का प्रथम लघुकथा संग्रह ‘अब न अंगूठा छाप’ मेरे सामने है। यूँ तो सुमन कुमार का यह प्रथम लघुकथा संग्रह है किन्तु उनकी कथानक चुनने की सजगता, कथ्य की बारीकी से पकड़ और उसके प्रस्तुतीकरण की समझदारी उन्हें नवोदित से इतर सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है। 

सुमन कुमार लघुकथा के अतिरिक्त भी हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं में सक्रिय रूप से लेखन कर रहे हैं और उनकी अनेक रचनाएँ प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में एवं पत्रिकाओं में निरन्तर प्रकाशित होती रहती हैं। इतना ही नहीं वे एक अच्छे चित्रकार भी हैं। 

48 पृष्ठीय इस संग्रह में 36 लघुकथाएँ समाहित की गई हैं। जिसमें ‘अब न अंगूठा छाप’ शीर्षक लघुकथा प्रौढ़शिक्षा की सार्थकता को दर्शाती लघुकथा है तो गरीबी, गरीब के शोषण और अमीर-गरीब की मजबूरियों आदि के बारे में दर्शाती हुई लघुकथाएँ हैं- -‘बूढ़े होते हाथ’, फर्क की संवेदना तथा ‘कला की कीमत’।

सुमन कुमार
स्वार्थवश अपने खून के रिश्ते भी सम्बन्धों को नकार देते हैं इस बात को पुष्ट करती हुई लघुकथा है-‘बेटे होकर’ तो सम्बन्धों में छल करते लोगों की मानसिकता को दर्शाती है-‘कागज बोल उठा’। इस संग्रह की कुछ लघुकथाएँ मानवता व सकारात्मक सोच का पुरजोर समर्थन करती अच्छी लघुकथाएँ हैं जैसे ‘आवश्यक’, ‘दूसरी रुलाई’, ‘दर्द’ तथा संयोग’ आदि। कुछ लघुकथाओं में प्रयोग किए गये ठेठ आंचलिक शब्द जैसे- ‘टांगूर-मांगूर’ ‘लजपच्ची’ सर्वत्र पठनीयता को बाधित अवश्य करते हैं। प्रख्यात् साहित्यकार डॉ. भगवती प्रसाद द्विवेदी जी ने इस पुस्तक की भूमिका में सुमन कुमार के बारे में सही लिखा है कि-

‘वे  बिना किसी लाग-लपेट के सामाजिक विसंगतियों-विद्रूपताओं पर रोशनी डालते हैं और सहज ढंग से विरोधाभास अथवा अंतर्विरोधों पर करारा व्यंग्य भी करते हैं।’

 कुल मिलाकर लघुकथा संग्रह ‘अब न अंगूठा छाप’ की सारी लघुकथाएँ सुमन कुमार को भविष्य में एक अच्छा लघुकथाकार सिद्ध होने की ओर संकेत करती हैं। मेरी शुभकामनाएँ।


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