सत्यार्थी जी के अनछुए जीवन प्रसंगों का सजीव रेखांकन करती किताब

डॉ. कन्हैया त्रिपाठी

- कन्हैया त्रिपाठी

लेखक भारत गणराज्य के महामहिम राष्ट्रपति जी के विशेष कार्य अधिकारी का दायित्व निभा चुके हैं एवं सेतु संपादन मंडल के सम्मानित सदस्य हैं। आप अहिंसा आयोग के समर्थक एवं अहिंसक सभ्यता के पैरोकार भी हैं।

पुस्तक: कैलास सत्यार्थी के जीवन के प्रेरक प्रसंग
लेखक: शिवकुमार शर्मा 
प्रकाशक: प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली
प्रकाशन वर्ष: 2022
पृष्ठ संख्या: 144

जीवनी सदैव किसी महान पुरुष के उन जीवन अध्यायों का पाठ कराती हैं, जिनसे हम अछूते होते हैं। ऐसी ही एक सुंदर सी जीवनी रूप में पुस्तक शिवकुमार शर्मा की आयी है-कैलाश सत्यार्थी के जीवन के प्रेरक प्रसंग। सामाजिक सरोकारों में लंबा वक्त गुजर चुके कैलाश सत्यार्थी जी के करीबी शिवकुमार शर्मा ने अपनी पुस्तक में कैलाश सत्यार्थी के उन अनछुए पहलुओं को उजागर किया है, जो अब तक किसी पुस्तक में बातें नहीं आयी हैं।

अनछुए पहलुओं को पढ़ने की दिलचस्पी लोगों के भीतर ज्यादा होती है और यदि वास्तव में व्यक्तित्व बड़ा हो तो उसके बारे में पाठक और ज्यादा रुचि लेकर पढ़ते हैं। इस पुस्तक में शिवकुमार शर्मा ने 35 शीर्षकों से नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी जी के संघर्ष, और त्यागशील व्यक्तित्व को तो रेखांकित किया ही है साथ ही उन्होंने सत्यार्थी जी के श्रेष्ठ जीवन मूल्यों को भी प्रतिष्ठित किया है।

नोबेल पुरस्कार देश के नाम और शर्मा कैसे बने सत्यार्थी, ये ऐसे शीर्षक हैं जो पाठक की जिज्ञासा को बढ़ा देते हैं। सबलोग सत्यार्थी जी की जाति को लेकर उनसे ही कई बार सवाल किए और उन परिस्थितियों ने जिसने सत्यार्थी जी को शर्मा से सत्यार्थी बना दिया और वे दृढ़-प्रतिज्ञ हो गए कि आज से हम तो सत्यार्थी रूप में ही जाने जाएंगे, यह किसी भी पाठक को अपनी ओर खींचने के लिए काफी हैं। इस पुस्तक में इस जिज्ञासा को शिवकुमार शर्मा ने बहुत ही रोचक तरीके से प्रस्तुत किया है।

सत्य के साथ मेरे प्रयोग पढ़ते हुए गांधी जिस प्रकार लोगों की रुचि बन जाते हैं उसी प्रकार शिवकुमार शर्मा की यह लगभग 150 पृष्ठों की पुस्तक पाठकों की रुचि का विषय बन जाती है तो यह सामग्री और विषय प्रस्तुति का कमाल है। खासकर, दलितों के घर यज्ञ की कहानी और नाई से निभाया बहनोई का नाता, यह ऐसे शीर्षक हैं जिसे पाठक जरूर जानना चाहेगा कि आखिर इसके भीतर की कहानी क्या है या इसकी पृष्ठभूमि क्या है? इसी प्रकार क्षमादान का सुख पढ़ते हुए जब कोई पाठक यह समझना चाहेगा कि इसमें क्या अंतर्कथा है तो उसे यह पुस्तक पढ़ना पड़ेगा।

शिवकुमार शर्मा का भाषा कौशल भी बहुत अच्छा है। क्षमादान का सुख पढ़ते हुए- हमारे जीवन में विश्वास का बहुत महत्व है। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो किसी का भरोसा तोड़ने में जरा भी नहीं हिचकते। जिसमें भरोसा तोड़ने और धोखेबाजी का ऐब आ जाए, वह जीवन भर दुखी रहता है। सामान्य लोग दगाबाजों से बहुत नफ़रत करते हैं। साथ-साथ उनसे बदला लेने, उन्हें सबक सिखाने के भी मौके खोजते रहते हैं। दूसरी तरफ ऐसे महान लोग भी इस धरती पर हैं, जो भरोसा तोड़ने वालों के अपराधों को भी माफ कर देते हैं, भले ही उसने कितना भी नुकसान पहुँचाया हो। (द्रष्टव्य: पृष्ठ 111)।

पाक कला में निपुण लोग एक चावल से पता कर लेते हैं कि उसका पूरा भोजन कितना पका हुआ है, ठीक उसी प्रकार शिवकुमार शर्मा की इस पुस्तक में विषय की प्रस्तुति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है, इसके कुछ हिस्से की भाषा-शैली को समझकर। वह न केवल अपनी बात को आमजन की भाषा में प्रस्तुत करके अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं, अपितु वह विषय के साथ नया सन्देश भी अपने प्रत्येक शीर्षक के माध्यम से देने की कोशिश करते हैं। हिंदी के साथ हिंदुस्तानी आबो-हवा को समझकर उर्दू शब्दों का प्रयोग भाषा के प्रवाह को बढ़ा देता है, यह श्री शर्मा के लेखकीय गुण हैं।

प्रभात प्रकाशन की ओर से पेपरबैक्स में आई यह दिलचस्प पुस्तक पाठकों के बीच निश्चित रूप से अधिक से अधिक पढ़ी जाएगी और पाठक इससे बहुत कुछ सीखने के लिए इस सद्यप्रकाशित पुस्तक को पढ़ेंगे, इसमें कोई दो मत नहीं है। शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित व्यक्तित्व पर सृजित की गई शिवकुमार शर्मा की पुस्तक ‘कैलास सत्यार्थी के जीवन के प्रेरक प्रसंग’ निःसन्देह एक अच्छी व महत्वपूर्ण पुस्तक बन पड़ी है और इसको यदि विद्यार्थी भी एक बार पढ़ेंगे तो उनकी रुचि बढ़ती जाएगी और वे पुस्तक को पूरा पढ़कर ही इसे छोड़ेंगे, ऐसा मुझे विश्वास है। विश्वास यह भी है कि शिवकुमार शर्मा इस एक पुस्तक से ही लोगों के बीच लोकप्रिय होंगे और अभिनंदनीय होंगे। पुस्तक के लेखक और प्रकाशक के साथ इस पुस्तक के कलेवर को जिसने निर्मित किया है, वह भी बहुत सुंदर प्रस्तुति है। सब मिलाकर एक पठनीय और संग्रहणीय पुस्तक है यह, और इसे पाठकों को पढ़ने के लिए यदि आग्रह करूं तो पुनीत कार्य मैं समझता हूँ।

किताबें पढ़ी जा रही हैं। पुस्तकों का बाजार कम नहीं हुआ है। लेकिन इसकी एक शर्त है कि अच्छी पुस्तक बाजार में आए।

इस पुस्तक की सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी समस्त सामग्री नई है और ऐसे कई पहलुओं पर प्रकाश डालती है जो भारतीय पाठकों के बीच नया होगा। बहुधा पुस्तकों के लिए खास पाठक होते हैं और वे अपने विषय और रुचि के अनुसार पुस्तकों का चयन करते हैं। सत्यार्थी जी पर तैयार इस पुस्तक को पढ़ने के लिए ऐसी कोई सीमा-रेखा नहीं होगी इसे तो हर एक नागरिक पढ़ सकता है। इसलिए शिवकुमार शर्मा का यह श्रम-साध्य कार्य बड़े पाठकवर्ग के बीच पढ़ा जाएगा और लोगों को लाभान्वित करेगा।
***

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।