व्यंग्य: हिंदी नाम की भीनी चुनरिया

धर्मपाल महेंद्र जैन

बिंदास: धर्मपाल महेंद्र जैन

दस जनवरी को विश्व भर में हिंदी प्रेमी सक्रिय हो टर्राने लगते हैं हिंदी, हिंदी। कोई इसे कहता है माथे की बिंदी, कोई इसमें पाता है चंदे की चिंदी। विदेशों में स्थित भारतीय कार्यालय इस दिन हिंदी दिवस इस तरह मनाते हैं जैसे हिंदी का श्राद्धोत्सव मना रहे हों। भारतवंशी टीवी चैनलों पर हिंदी का लुभावना घमासान मचता है। स्थानीय हिंदी संस्थाओं के प्रथम संस्थापक और आजीवन अध्यक्ष अपनी हिंदी-कुर्सी की पेटी मजबूती से बांध अखाड़े में उतर आते हैं। एक संस्था, दूसरी की हिंदी उतारने के लिए कृतसंकल्प दिखती है। संस्थागत ठेकेदार कौंसल कार्यालय से अपना अच्छा सम्मान चाहते हैं। इस कारण हिंदी दिवस के आयोजन कथित हिंदी सेवियों की प्रतिष्ठा के सूचक बन गए हैं। कुछ वरिष्ठ दशकों से सरकारी सम्मान के इच्छुक हैं, वे भारत जाने का न्यौता चाह रहे हैं। संस्कृति विभाग, विदेश और गृह मंत्रालयों की टेबलों पर पड़ी-पड़ी उनकी हिंदी सेवा की फाइलें निरंतर मोटी हो रही हैं, पर आगे नहीं बढ़ रहीं। बिना सरकारी पुरस्कार के उनकी हिंदी सेवा और हिंदी (अ)ज्ञान को मान्यता नहीं मिल रही! इस सूची में उनके नीचे अपना नाम जुड़वाने के इच्छुक अन्य पदाधिकारी भी हाजिर हैं। जब उन्हें अपना ही भविष्य नहीं दिखता तो वे हिंदी के भविष्य को ले कर प्रश्नचिह्न लगा देते हैं। हिंदी नाम की चुनरिया ओढ़ कर प्रवासी हिंदी सेवी भारत सरकार के अंगने में नाचना चाहता है और बख्शीश पाना चाहता है।

हिंदी दिवस पर देसी लाट साहबों से पुरस्कारों की चिंदी पाकर कई हिंदीसेवी बहुत खुश हैं। सैकड़ों विभूतियों को हिंदी-रत्न, हिंदी-भूषण, प्रवासी रत्न जैसी आकर्षक उपाधियाँ शाल और प्रमाणपत्रों के साथ मिल गई हैं। अब पूरे साल उन्हें हिंदी सेवा के नाम पर अपनी जुगाड़ बिठाने के नए उपक्रम करना हैं ताकि स्थानीय समाज उनका नाम आदर से ले। अन्यथा यहाँ सत्ता की भाषा अंग्रेजी है, काम और हुक्म की भाषा अंग्रेजी है पर उसके लिए उन्हें कोई सम्मान नहीं देता। साहित्य के भारतवंशी ठेकेदार हिंदी और संस्कृति की बड़ी-बड़ी बातें बना कर लोगों को भावुक बना सकते हैं। यही कौशल है जो नैतिक-ठगी करने के काम आता है। संबंधित अधिकारीगण उदारमना हैं, उनके पास पार्टी के लिए भारत सरकार का बड़ा बजट है, अपने पंख फैलाने के लिए उन्हें यही चाहिए।

अचेतनजी से मिलिये। वे घर पर अपने बच्चों को हिंदी की प्रेक्टिस कराते-कराते खुद हिंदी सीख गए, पर बच्चे नहीं सीखे। वे अखिल ब्रह्मांड हिंदी संघ के सब कुछ हैं, केंद्रीय कुर्सी विराजमान से लेकर कुर्सियों की घड़ी करके टेंटहाउस को वापस लौटाने वाले। उनकी संस्था माँगने पर अमूल्य पुरस्कार देती है। परस्पर सम्मान का भाव लिए जो भी प्रस्ताव आये वह उन्हें सहर्ष स्वीकार है। वे कई वर्षों से हिंदी को राष्ट्रसंघ की भाषा बनाने की माँग कर रहे हैं। हिंदी की वैश्विक स्थिति पर वे भरपूर नींद से अचानक उठकर बोलना शुरू कर सकते हैं। सवेरा होते ही वे वैश्विक फोन संपर्क सेवा में जुट जाते हैं। वैश्विक हिंदी की गोष्ठी में वे बीज वक्तव्य देने लगे तो मैं बोल उठा, ‘राष्ट्रसंघ वाले चार सालों से साप्ताहिक हिंदी बुलेटिन जारी कर रहे हैं, उसे कुछ सौ लोग ही पढ़ते-सुनते हैं। आपने भी उसे नहीं देखा। राष्ट्रसंघ ने हिंदी भाषा अपना भी ली तो कितने लोग उसका लाभ उठाएँगे।’ वे खीज कर बोले, ‘हिंदी को लेकर लाभ-हानि की बात मत कीजिए, यह हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रश्न है। हिंदी बोलने-पढ़ने वाले बनाना हमारा काम नहीं है।’ उनकी रुचि प्रदर्शन और आँकड़ेबाजी में है। रबर की मोहरें, नाम पट्टिकाएँ, मुद्रित रद्दी, विज्ञापन, समाचार विज्ञप्तियाँ आदि हिंदी में हो गई तो हिंदी बन गई विश्व भाषा।

इसी गोष्ठी के अध्यक्ष एक समाजसेवी हैं। वे दानराशि इकठ्ठी करने वाले ‘फंड रेज़र’ हैं। वे दो मिलियन डॉलर की निधि इकठ्ठी कर विश्वविद्यालय में ‘हिंदी पीठ’ खुलवाना चाहते हैं। उनकी निस्वार्थ सेवा का हेतु कुछ नहीं है, बस दानपाता से छोटी-सी प्रत्याशा है, हिंदी पीठ के आगे उनका नाम लिखवादें। यहाँ के टॉप विश्वविद्यालय में पिछले पैंतीस सालों से हिंदी पढ़ाई जा रही है। उनके बच्चों सहित हमारे सैकड़ों बच्चे वहाँ के पासऑउट हैं। मैंने उनसे पूछा आपके किसी बच्चे ने वहाँ हिंदी पढ़ी क्या? वे हीं हीं कर बोले, बेटा इंजीनियरिंग में था और बेटी मेडिकल में। हिंदी उनके किस काम की। मैं पूछना चाहता था फिर हिंदी किसके काम की, क्या बस आपका नाम चमकाने के काम की? न्यूज़ और फोटो छपवाने के काम की? अपनी संस्था का खोमचा लगाने के काम की? वैश्विक हिंदी के नाम पर फैलते आडंबर और छल से हिंदी का वटवृक्ष शायद नहीं लगे। अपने घर और मित्र परिवारों में हिंदी के पौधे खिलेंगे तो हिंदी के उपवन बनने में देर नहीं लगेगी।

ईमेल: dharmtoronto@gmail.com फ़ोन: +1 416 225 2415
सम्पर्क: 22 फेरल ऐवेन्यू, टोरंटो, एम2आर 1सी8, कैनेडा

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