वसंत पञ्चमी की शुभकामनाएँ!

लाला लाजपत राय
सन् 2023 के पहले अंक के साथ आप सभी को सेतु परिवार की ओर से नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाएँ!

26 जनवरी का दिन सभी भारतीयों के लिये महत्त्वपूर्ण है। आपको संसार के सबसे बड़े लोकतंत्र के गणतंत्र दिवस की बधाई! 

28 जनवरी को शेरे पंजाब लाला लाजपत राय का जन्मदिन भी था। पंजाब केसरी के नाम से प्रसिद्ध लाला लाजपत राय का व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे गरम दल के नेता और अनेक स्वतंत्रता सेनानियों के प्रेरणास्रोत तो थे ही, लेखक और वकील भी थे। वे संयुक्त पंजाब में क्रांति और स्वतंत्रता की प्रेरणा के साथ-साथ हिंदी, शिक्षा, और आर्यसमाज के प्रसारक भी थे। इसके अलावा उन्होंने पंजाब नैशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कम्पनी की स्थापना भी की थी।

19 दिसम्बर 1927 को हुई पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की फाँसी के बाद चन्द्रशेखर आज़ाद ने जब हिन्दुस्तान रिपब्लिकन आर्मी के पुनर्गठन का बीडा उठाया तब नई संस्था हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन ऐसोसियेशन (HSRA = हि.सो.रि.ए.) को पंजाब की ओर से सक्रिय योगदान मिला। उस समय लाहौर में लाला लाजपत राय के 'पंजाब नेशनल कॉलेज' में सरदार भगतसिंह, यशपाल, भगवतीचरण वोहरा, सुखदेव थापर, तीर्थराम, झण्डासिंह आदि क्रांतिकारी एकजुट हो रहे थे। सुखदेव थापर ने पंजाब नेशनल कॉलेज में भारत के स्वाधीनता संग्राम के दिशा-निर्देशन के लिए एक अध्ययन मण्डल की स्थापना की थी। भगवतीचरण वोहरा और भगत सिंह नौजवान भारत सभा के सह-संस्थापक थे। भगवतीचरण वोहरा "नौजवान भारत सभा" के प्रथम महासचिव भी थे। हिसोरिए में पंजाब से आने वाले क्रांतिकारियों में उपरोक्त नाम प्रमुख थे।

लाला लाजपत राय प्रथम दिवस आवरण
जिन दिनों भारत में साइमन कमीशन के विरुद्ध विशाल विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, तभी 30 अक्टूबर 1928 के एक प्रदर्शन में भारतीय नागरिकों पर पुलिस द्वारा किये गये लाठी व गोली-चार्ज में बुरी तरह से घायल होने के बाद लाला लाजपत राय ने कहा था, "मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी।" और वही हुआ भी; लालाजी के बलिदान के 20 साल के भीतर ही ब्रिटिश साम्राज्य का सूर्य अस्त हो गया। 17 नवंबर 1928 को इन्हीं चोटों की वजह से उनका देहान्त हो गया।

लाला लाजपत राय का ज़िक्र छिड़ने पर सरदार भगत सिंह का संदर्भ आना, और उनकी फांसी की बात आने पर गांधी जी की याद आना भी स्वाभाविक है। अहिंसा के अपने नियमित स्तम्भ में गांधी जी को याद कर रहे हैं डॉ. कन्हैया त्रिपाठी।

साहित्य अकादमी ने हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार शैलेश मटियानी को याद किया। प्रकाश मनु जी का आभार क्योंकि उनके द्वारा उस कार्यक्रम में दिया गया व्याख्यान सेतु के इस अंक में प्रस्तुत है। इन प्रस्तुतियों सहित इस अंक में लगभग 40 रचनाएँ हैं, आशा है आपको पसंद आयेंगी।

पिछले सम्पादकीय में हिंदी भाषा के मानकीकरण पर बात हुई थी। उसके बाद अन्यत्र एक चर्चा में ज़िक्र आया कि उर्दू के शब्दों को हिंदी में लिखते समय संयुक्ताक्षरों के प्रयोग को अमानक करार देते हुए कुछ शब्दों की सूची के साथ स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं। सूची के उदाहरणों के अनुसार इंतहा की जगह इनतहा और इंसान की जगह इनसान लिखा जाये। एक देश के एक संस्थान के एक छोटे से समूह द्वारा एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय भाषा को नियंत्रित करनेवाले इस प्रकार के आदेशों से मेरी घनघोर असहमति है क्योंकि इससे सही शब्दों के ग़लत उच्चारण का मार्ग खुलता है। उदाहरण के लिये जिन्होंने इंतहा शब्द पहले नहीं सुना होगा वे यदि उसे इनतहा के रूप में लिखा पायेंगे तो उसे नैसर्गिक रूप से इ-नतहा या इनत-हा ही कहेंगे। इंसान शब्द इंतहा से अधिक प्रचलित है लेकिन इनसान लिखने पर उसे भी इ-नसान पढ़े जाने की भरपूर गुंजाइश है। इसके अलावा एक और मुद्दा निर्देश के लिये बनाई सूची की सीमाओं का भी है। निर्देश में संयुक्ताक्षर की मनाही लिखी है अर्धाक्षर की नहीं, लेकिन उदाहरण में इन्तहा, या इन्सान का ज़िक्र नहीं है, जबकि बर्दाश्त को बरदाश्त लिखते हुए अर्ध र को अमानक किया है लेकिन अर्ध श को नहीं। मुझे इस प्रकार के आदेशों के आधार और उद्देश्य की जानकारी नहीं है, लेकिन ये भ्रामक अवश्य हैं। नये मानक बनाने के सुझाव दिये जा सकते हैं, लेकिन उनकी आधिकारिक घोषणा से पहले उन पर व्यापक चर्चा की जानी चाहिये।

सेतु के इस अंक पर भी आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है, धन्यवाद!

नववर्ष की मंगलकामनाओं सहित,
आपका शुभाकांक्षी,
सेतु, पिट्सबर्ग
31 जनवरी 2023 ✍️

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