उत्कृष्ट बालगीतों का संग्रह - ‘सूरज आया, सूरज आया’

समीक्षक: शशि पाठक

28, सारंग विहार, मथुरा-281006; चलभाष: 987 063 1805; ईमेल: pathakshashipathak60@gmail.com

पुस्तक: सूरज आया सूरज आया (बाल गीत संग्रह)
ISBN: 979-81-95184-30-9
लेखक: रमेश प्रसून
प्रकाशक: श्वेताम्बरा प्रकाशन, नई दिल्ली-110041 
मूल्य: ₹ 99.00 रुपये
पृष्ठ: 60
संस्करण: 2021

शशि पाठक
पुराने समय में दादा-दादी या नाना-नानी सोने से पूर्व अपने नौनिहालों को चरित्र निर्माण करने वाली कहानियाँ, कविताएँ व विविध रचनाएँ सुनाया करते थे किन्तु आज के व्यस्ततम जीवन में उस कमी की पूर्ति कई बाल पत्रिकाएँ एवं कहानी तथा कविता संग्रह कर रहे हैं। श्री रमेश प्रसून का बाल कविता-संग्रह ‘सूरज आया, सूरज आया’ भी उसी कड़ी का एक हिस्सा है। 

बाल साहित्य लेखन के लिए ही नहीं बल्कि हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं में कई पुस्तकों का सृजन करने वाले वरिष्ठ साहित्यकार एवं बुलन्दप्रभा पत्रिका के मुख्य सम्पादक श्री रमेश प्रसून का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है।

उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का सोहनलाल द्विवेदी पुरस्कार प्राप्त 60 पृष्ठीय बालगीत-संग्रह ‘सूरज आया, सूरज आया’ में प्रसून जी द्वारा विविध विषयों पर रचित 48 उत्कृष्ट बालगीत समाहित हैं।

वर्तमान वैज्ञानिक युग के बच्चे अब केवल परी कथाओं से ही बहलने वाले नहीं हैं। वे अत्याधुनिक आविष्कारों को जानने, समझने की भी जिज्ञासा रखते हैं। प्रसून जी ने अपने बालगीत- ‘बच्चे हैं, हम बच्चे हैं’ में यही दर्शाते हुए कहा है-

है हमको आगे बढ़ना
एक-एक सीढ़ी चढ़ना
ईबुक, नेट-एप सब कुछ
आता है खुलकर पढ़ना।
साथ समय के चलते हैं, नहीं अक्ल के कच्चे हैं
बच्चे हैं, हम बच्चे हैं, हम भारत के बच्चे हैं। (पृष्ठ 16)

बालगीत रोबोट जी जहाँ रोबोट के बारे में सहज ही जानकारी प्रदान करने वाला है तो बालगीत ‘एलियन’ अंतरिक्ष मानव के बारे में।

सभी बालगीतों के शीर्षक बच्चों के मन को भाने वाले हैं तो गीतों में अद्भुत प्रवाहमयता है जो बच्चों को गुनगुनाये जाने पर बाध्य करने वाली है। सभी बालगीतों पर तदनुसार उपयुक्त चित्र उन्हें और आकर्षक बना रहे हैं।

कुल मिलाकर संग्रह ‘सूरज आया, सूरज आया’ के सभी बालगीत सरल और सहज भाषा और शैली में लिखे गये हैं। सभी शिक्षाप्रद, एवं उत्कृष्ट हैं। पुस्तक का गेटअप बहुत ही लुभावना एवं प्रयुक्त कागज उच्च स्तरीय है।

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