काव्य: द्वारका प्रसाद तापड़िया

द्वारका प्रसाद तापड़िया
ओ मेरे सनम


प्रीत जश्न गुलज़ार सनम...
राग इश्क मलहार सनम...

बसा लिया आँखों में सावन। 
स्वप्न हकीकत है मनभावन। 
करो प्यार को मिलकर पावन। 
'सदाचार' अभिसार सनम... 

शमा हुई खुश परवानों से। 
मिला हौसला अरमानों से। 
गिला नहीं अब फरमानों से। 
गुलो चमन दिलदार सनम... 

राग बिरह छेड़े शहनाई। 
दम्भ छोड़ आ जा हरजाई। 
सूनी तुम बिन यह अमराई। 
कुदरत का शृंगार सनम... 

भूल-चूक सब दफा करेंगे। 
मैल दिलों का सफा करेंगे। 
हम आपस में वफ़ा करेंगे। 
संग साज तकरार सनम... 

समय नहीं अब काटे कटता। 
लाख जतन ध्यान नहीं हटता। 
रहकर दूर कलेजा फटता। 
दम बिरहा दुश्वार सनम... 

त्रिविध बयार इधर आती है।
उपालम्भ देकर जाती है।
साखी बनकर खुद गाती है।
उल्फत के अश‌आर सनम...

गुफ्तगू सवार इशारों पर।
मौजें आ गईं किनारों पर।
छा गया खुमार सितारों पर।
याद करो‌ इकरार सनम...

गोया दूरियाँ गुनाहों में।
छिपा लो‌ अपनी निगाहों में।
खुशियाँ महफूज पनाहों में।
बन जाओ पतवार सनम...

इन्तजार अब सहा न जाए।
बिना तुम्हारे रहा न जाए।
दर्दे-दिल कुछ कहा न जाए।
प्रीतम शुभ सत्कार सनम...

अब न चलेगा एक बहाना।
कहने दो जो कहे जमाना।
मध्य सोम शनि काम‌ फसाना।
आज हुआ इतवार सनम...

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।