Multilingual Poetry :: बहुभाषी काव्य :: ਬਹੁ-ਭਾਸ਼ਾਈ ਕਵਿਤਾ

बहुभाषी काव्य, पंजाबी, हिंदी और अंग्रेज़ी में - ਰਾਮੇਸ਼ਵਰ ਸਿੰਘ - रामेश्वर सिंह
Multilingual Poetry (Punjabi, Hindi, and English) by Rameshwer Singh
Rameshwer Singh : रामेश्वर सिंह
कुहुक!

अरे प्रिय
तुम यहाँ!

तुम्हें ढूंढता था न
आकाश के उड़ते बादलों में!
तुम मिली हो आज
हजारों फीट ऊपर!

हवाई जहाज की खिड़की
से यूँ ही ताक रहा था
बादलों की नदी को 
कि
तुम अचानक यहाँ दिख गईं
लहराते सफेद बादलों
के शर्माते आंचल का पल्लू किए!

सच कहूँ
तुम्हें नहीं ढूंढ रहा था।
पर
तुम यहाँ!

तुम चहकीं
हाँ तो!
हम यहाँ!
तुम बताओ
तुम तो मुझे नही दूंढते अब!

तुम मुझे नाराज़ दिखीं।

मैंने पूछा,
तो तुम्हें पता था
कि
मैं तुम्हें ढूंढता हूँ।

हाँ! तुम बोलीं।

वही कोमल कली सी कुहूक!

जवाब नहीं दिया
मुझे क्यूँ नहीं ढूढते अब।

मैने कहा
ये भला कैसी बात हुई
मिलोगी भी नही
और
चाहोगी कि
मैं 
पोर-पोर तुम्हें खोजूँ!

हाँ जी! यही तो बात है
तुम नहीं समझोगे
हमारा प्यार!

तुम मुझे ढूंढो
और 
मैं
तुम्हें देखती रहूँ!

एक दिन मिलूंगी
वायदा है।

बादल दूर होते गए
मैं बेचैन हुआ।

मत जाओ
मेरे साथ आओ। 

तुम बोली
ढूंढते रहना मुझे जरूर
हमे अच्छा लगता है।

तुम दूर होती गईं
मेरी उड़ान मुझे मीलों दूर
ले जाने लगी।

और
अब मैं फिर तुम्हें ढूंढने लगा

मिलन की आस में!
***

Kuhook

O Love!
You are here!

Thousand feet 
Above and Amidst
White Swirling Clouds
As
I look outside my Air Flight
Not looking for you
As I used to.

You are Angry

You are not looking for me now,
Why have you changed?

No
I haven't.
Only that you never appeared anywhere,
My heart and soul just revolted

Oh
Is that so?
Is that  your Deep Love?
If you keep on your spiritual journey to find me
You will merge with me
That is my promise
That is my Love for you

Moment will come
I will be yours।

You kuhook
And
Start disappearing
As
My flight takes me away.

I vow
I will be on my journey again
To
Find You
To
Get You!

Love is really Strange
And
Above Any Principle!

Love is Spritual and Eternal!
***

ਕੁਹੁਕ

ਓ ਜੀ 
ਤੂੰ ਭੀ ਬਸ!

ਧਰਤੀ ਤੋਂ ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਫ਼ੀਟ ਉਤੇ
ਮੈਂ ਹਵਾਈ ਜਹਾਜ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਤਕ
ਰਹਾਂ ਹਾਂ।
ਤੂੰ ਮੈਨੂੰ ਸਫੇਦ ਬਦਲਾਂ ਦੇ
ਉਮੜਦੇ ਆਂਚਲ ਵਿਚ ਵਿਖਦੀ ਹਾਂ!

ਗੁੱਸੇ ਜਾਪਦੀ ਹੈ ਤੂੰ।

ਮੈਨੂੰ ਲਬਦੇ ਨਹੀਂ ਤੁਸੀਂ ਹੁਣ।
ਤੂੰ ਪੁਛਆ।

ਏ ਕਿ ਗੱਲ ਹੋਈ
ਤੂੰ ਮਿਲਦੀ ਨਹੀਂ
ਮੇਰਾ ਦਿਲ ਰੂਥ ਗਯਾ
ਸੋ ਨਹੀਂ ਲੱਭਦਾ ਹੁਣ।
ਮੈਂ ਬੋਲਆ।

ਦੇਖੋ ਜੀ
ਮੈਨੂੰ ਲਭਦੇ ਰਹੋ
ਮੈ ਤਦੇ ਇਕ ਦਿਨ ਤੁਹਾਨੂੰ
ਮਿਲੁੰਗੀ!
ਤੂੰ ਕੁਹੁਕੀ!

ਏ ਕਹਕੇ ਤੂੰ 
ਅੰਖਾ ਤੋਂ ਦੂਰ ਦੂਰ ਹੁੰਦੀ ਗਈ
ਮੇਰੀ ਫਲਾਈਟ ਮੈਨੂੰ ਸਮੰਦਰ ਪਾਰ
ਲੈ ਗਈ।

ਹੁਣ ਮੈ 
ਫੇਰ ਨਵੀਂ ਉਮੀਦ ਨਾਲ
ਤੈਨੂੰ ਲਬੰਗਾ।

ਤੂੰ ਮੇਰਾ ਰੂਹਾਨੀ ਪ੍ਰੇਮ ਹੈ!
***
रामेश्वर सिंह :: Rameshwer Singh :: ਰਾਮੇਸ਼੍ਵਰ ਸਿੰਘ

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