काव्य: खेमकरण ‘सोमन’

खेमकरण सोमन
तब मैंने अनुसरण किया आपका

बादलों की आँखों से लेकर पानी
दादी-नानी, माँ से लेकर कहानी
चाँद से लेकर एकान्त, मौन, शीतलता
पंछियों से लेकर हौसला-अविकलता
सूरज से लेकर परम ऊर्जा-ताप
जब निरंतर हँसते-बढ़ते रहे आप
तब मैंने अनुसरण किया आपका।

कोयल से लेकर मधुर गीत-अलाव
पेड़ों से लेकर हरियाली, फल-फूल, छाँव
नदियों से लेकर गीत, प्यार-प्रवाह
योद्धाओं से लेकर मजबूत कंधे , कदम-राह
दर्जियों से लेकर लम्बाई-चौड़ाई, ऊँचाई-नाप
जब निरंतर हँसते-बढ़ते रहे आप
तब मैंने अनुसरण किया आपका।

किसानों से लेकर साग, सब्जी-राशन
सैनिकों से लेकर उच्च स्तरीय अनुशासन
बच्चों से लेकर चंचलता, हँसी-मुस्कान
मन में लेकर सबके लिए आदर, मान-सम्मान
रंगों से लेकर असर-उमंग, छाप
जब निरंतर हँसते-बढ़ते रहे आप
तब मैंने अनुसरण किया आपका।

कलाकारों से लेकर अदब, भाव-भंगिमा
मजदूरों से लेकर जीवन-साँस, श्रम-पसीना
फूलों से लेकर एहसास, ताजगी-महक
लड़कियों से लेकर चंचलता, धैर्य-चहक 
प्रकृति से लेकर स्वभाव, छवियाँ-निष्पाप
जब निरंतर हँसते-बढ़ते रहे आप
तब मैंने अनुसरण किया आपका।
***


सबसे बुरी मौत के शिकार

बहुत बड़े गद्दार साबित हुए
वे लोग-
जिनका पेट भरा हुआ था
जिन्होंने चुप्पी ओढ़ ली थी 
गलत तरीके से खींची जा रही लकीरों को देखकर
और मुक्तिबोध, धूमिल-शमशेर सिंह बहादुर, 
हरिशंकर परसाई को पढ़ने-जीने के बाद भी

सबसे बड़ी भूल-गलती के शिकार हुए
वे लोग-
जिन्होंने भाई, दोस्त या सहोदर समझकर
बहुत प्यार से हाथ रखा
उन कंधों पर
जिन्हें केवल छल-छलावा और रक्त पसंद था

सबसे बड़े ढोंगी प्रमाणित हुए
वे लोग-
जो बहुत पढ़ने-लिखने के बाद भी
रिश्वत लेना साँस लेने -खाना खाने जैसा समझते
या योजना-परियोजना में समायोजन दिखा-दिखाकर 
डकारते रहे सरकारी पैसा

सबसे बड़े अभागे-दयनीय निकले
वे लोग-
जिनके मुँह से जीवनपर्यन्त 
किसी प्रतिभा की प्रशंसा में दो शब्द भी न निकले
जबकि देखते रहे सब कुछ- गुपचुप

और अन्त में
सबसे बुरी मौत-अवसाद के शिकार हुए
वे लोग-
जिन्होंने समझा था कि सुरक्षित हैं वे
हर घड़ी- हर समय।
***

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